जामिया ने बताया विदेश में पीएचडी कैसे करें?

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 30-08-2025
How to do PhD abroad explained in Jamia?
How to do PhD abroad explained in Jamia?

 

आवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली

जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) के Centre for the Study of Social Inclusion (CSSI) ने Project EduAccess के सहयोग से एक निःशुल्क कार्यशाला “विदेश में पीएचडी करना चाहते हैं?” शीर्षक से सफलतापूर्वक आयोजित की. यह कार्यशाला उन छात्रों का मार्गदर्शन और सशक्तिकरण करने के उद्देश्य से आयोजित की गई जो विदेशी विश्वविद्यालयों में डॉक्टोरल रिसर्च करना चाहते हैं.

इस कार्यक्रम का आयोजन जामिया के कुलपति प्रो. मजहर आसिफ और कुलसचिव प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी के संरक्षण में हुआ, जबकि CSSI की निदेशक प्रो. तनुजा ने इसकी अध्यक्षता की.

कार्यशाला की शुरुआत पवित्र कुरआन की आयतों की तिलावत से हुई. इसके बाद CSSI में सहायक प्रोफेसर डॉ. अरविंद कुमार ने स्वागत भाषण दिया, जिसमें उन्होंने प्रेरणादायक और सारगर्भित वक्तव्य के ज़रिए सत्र की दिशा निर्धारित की.

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प्रमुख वक्ता और मार्गदर्शन

इस कार्यशाला में दो प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया,डॉ. सूरजकुमार थुबे, जिन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड से इतिहास में पीएचडी की है.श्रीमयी बिस्वास, जो ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन, आयरलैंड में सोशल वर्क और सोशल पॉलिसी की पीएचडी स्कॉलर हैं.

इन वक्ताओं ने विदेश में पीएचडी के लिए आवेदन प्रक्रिया, स्कॉलरशिप व फंडिंग के अवसरों पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने छात्रों को वैश्विक शैक्षणिक परिदृश्य को समझने और उसमें अपनी जगह बनाने का व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया.

वक्ताओं ने यह भी बताया कि काम के प्रति ईमानदारी और आत्म-संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है. उन्होंने सांस्कृतिक भिन्नताओं के प्रति जागरूकता, समय की पाबंदी और वित्तीय स्पष्टता को अत्यंत आवश्यक बताया. अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने स्कॉलरशिप प्रक्रिया, मेंटरशिप और अकादमिक यात्रा में गाइड की भूमिका को रेखांकित किया.
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प्रश्नोत्तर और संवाद सत्र

इस सत्र के बाद छात्रों को वक्ताओं से सीधा संवाद करने का अवसर मिला. प्रतिभागियों ने सीवी, कवर लेटर और शोध प्रस्ताव लिखने को लेकर सवाल पूछे, जिनका वक्ताओं ने अत्यंत व्यावहारिक और उपयोगी उत्तर दिए। यह सत्र छात्रों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ और उन्होंने इसे आत्मविश्वास बढ़ाने वाला अनुभव बताया.

कार्यशाला के समापन पर प्रो. तनुजा ने उल्लेख किया कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया की कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सक्रिय एमओयू हैं, और इच्छुक छात्र डीन ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि शोध के प्रति जुनून बेहद महत्वपूर्ण है और देश में किए जाने वाले छोटे कार्य भी उतने ही सम्मानजनक हैं जितने विदेश में। इसके साथ ही उन्होंने विदेश जाने से पहले आर्थिक योजना सुनिश्चित करने की सलाह दी.

अंत में डॉ. अरविंद कुमार ने सभी का आभार व्यक्त किया और कहा कि CSSI ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन जारी रखेगा ताकि विविध पृष्ठभूमियों से आने वाले छात्रों को उचित जानकारी और मार्गदर्शन मिल सके.

कार्यशाला में भाग लेने वाले छात्रों ने इसे अत्यंत प्रेरणादायक और उपयोगी बताया और भविष्य की शैक्षणिक योजनाओं को लेकर नए उत्साह के साथ लौटे.