आवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली
देशभर में मुहर्रम का आशूरा शनिवार को शांति, अनुशासन और आपसी भाईचारे के माहौल में संपन्न हो गया। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कई अन्य राज्यों में लाखों लोगों ने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। कहीं ताजिया और अलम के जुलूस निकले तो कहीं मजलिसें आयोजित हुईं। कई स्थानों पर शरबत और तबर्रुक बांटा गया। गरीबों को भोजन कराया गया। प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। ड्रोन, सीसीटीवी और अतिरिक्त पुलिस बल की निगरानी में अधिकांश स्थानों पर आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। कुछ स्थानों पर सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाने की कोशिश हुई, लेकिन समय रहते पुलिस ने स्थिति स्पष्ट कर दी।

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में इस बार मुहर्रम के अवसर पर विशेष मजलिस और दुआ का आयोजन किया गया। शिमला मस्जिद में धार्मिक विद्वान सैयद काजिम रजा नकवी ने कर्बला की घटना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत किसी एक समुदाय की विरासत नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए न्याय, सत्य, धैर्य और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का संदेश है। उन्होंने कहा कि जब यजीद ने इमाम हुसैन के सामने झुकने या युद्ध का विकल्प रखा तब उन्होंने सत्ता के बजाय उसूलों को चुना। यही कर्बला की सबसे बड़ी सीख है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कर्बला के मैदान में केवल 72 लोगों ने सच का साथ दिया। सात मुहर्रम से उनके पानी की आपूर्ति रोक दी गई थी। तीन दिन की प्यास और भूख के बावजूद उन्होंने अन्याय के सामने सिर नहीं झुकाया। उन्होंने छह महीने के हजरत अली असगर की शहादत का जिक्र करते हुए लोगों को भावुक कर दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने का संदेश केवल इस्लाम तक सीमित नहीं है। भारतीय परंपरा में भी श्रीराम और श्रीकृष्ण ने अन्याय का विरोध किया था। उन्होंने विभीषण का उदाहरण देते हुए कहा कि सत्य का साथ देना ही धर्म का मूल है। इस वर्ष शिमला के बॉयलुगंज से पारंपरिक जुलूस नहीं निकाला गया। इसके स्थान पर मस्जिद परिसर में मरसिया और मजलिस का आयोजन किया गया।
जम्मू कश्मीर के श्रीनगर और बडगाम में भी आशूरा के अवसर पर बड़े पैमाने पर जुलूस निकाले गए। प्रशासन और स्थानीय समितियों के बीच पहले से बेहतर समन्वय देखने को मिला। बडगाम के उपायुक्त अतहर आमिर खान ने बताया कि जिले में लगभग 196 स्थानों पर छोटे और बड़े जुलूस आयोजित हुए।
सभी विभागों के अधिकारी पूरे दिन मैदान में मौजूद रहे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिप्रसाद केके ने बताया कि पिछले दो महीनों से लगातार बैठकों के जरिए सुरक्षा योजना तैयार की गई थी। क्विक रिस्पांस टीम और आपातकालीन वाहन हर समय तैनात रहे।
श्रीनगर में पुलिस ने यातायात व्यवस्था को सुचारु रखा ताकि आम लोगों को परेशानी न हो। जुलूस मार्ग पर स्वयंसेवकों ने भी अनुशासन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। शिया समुदाय के लोगों ने मातम और नौहाख्वानी के जरिए अपना गम व्यक्त किया जबकि सुन्नी समुदाय के अनेक लोगों ने आशूरा के अवसर पर रोजा रखा।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में मुहर्रम जुलूस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो के साथ कई भ्रामक दावे भी प्रसारित किए गए। मामले की जांच के बाद पुलिस ने स्पष्ट किया कि इसका किसी आतंकी संगठन या सांप्रदायिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं है।
पुलिस के अनुसार यह स्थानीय अखाड़ों के बीच प्रदर्शन और प्रतिस्पर्धा का मामला था। इस संबंध में शोएब, तालीम, जाहिद और गोपाल समेत कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी जिम्मेदार व्यवहार की अपील की गई। कई सामाजिक संगठनों ने कहा कि किसी व्यक्ति की गलती को पूरे समुदाय से जोड़ना उचित नहीं है। कुरआन भी फसाद, डर और दिखावे की अनुमति नहीं देता। इसलिए अफवाहों से बचना और सत्यापित जानकारी पर भरोसा करना जरूरी है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस बार सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही। उत्तर पश्चिम दिल्ली की डीसीपी आकांक्षा यादव ने बताया कि सभी आयोजकों को पहले ही ताजिया की निर्धारित ऊंचाई का पालन करने के निर्देश दिए गए थे। जुलूस में प्रतिबंधित हथियारों पर पूरी तरह रोक रही। जहांगीरपुरी, भारत नगर और महिंद्रा पार्क जैसे संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी से लगातार निगरानी की गई। सभी जुलूसों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई।
उत्तर प्रदेश में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारी की गई थी। अयोध्या में पूरे शहर को जोन और सेक्टर में विभाजित किया गया। जुलूस के आगे और पीछे सुरक्षा बल तैनात रहे। लखनऊ में भी कंट्रोल रूम से ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे आयोजन की निगरानी की गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सभी जुलूस तय समय और निर्धारित मार्ग से शांतिपूर्वक संपन्न हुए। मुंबई के डोंगरी क्षेत्र में भी मुहर्रम के कार्यक्रम बिना किसी अप्रिय घटना के पूरे हुए।
इस बीच मध्य प्रदेश के रतलाम से एक दुखद हादसा सामने आया। जुलूस के दौरान एक ऊंचा ताजिया हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गया। करंट लगने से तीन लोगों की मौत हो गई जबकि 15 से अधिक लोग घायल हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली के तार काफी नीचे थे और पहले से उनकी ऊंचाई की जांच होनी चाहिए थी। हादसे ने प्रशासनिक तैयारियों और सुरक्षा मानकों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
दूसरी ओर प्रयागराज का ऐतिहासिक ताजिया इस बार भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। अखरोट की लकड़ी से बना यह ताजिया करीब 300 वर्ष पुराना माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसका इतिहास शेरशाह सूरी के दौर से जुड़ा हुआ है। कई पीढ़ियों से इसे बेहद सावधानी के साथ सुरक्षित रखा गया है। लगभग एक दशक पहले इसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए इसे स्थायी रूप से एक स्थान पर रखने का निर्णय लिया गया था। अब श्रद्धालु वहीं पहुंचकर इसके दर्शन करते हैं।

इस वर्ष मुहर्रम ने एक बार फिर यह साबित किया कि बेहतर प्रशासनिक तैयारी, स्थानीय समितियों का सहयोग और लोगों की समझदारी बड़े धार्मिक आयोजनों को शांतिपूर्ण बना सकती है। अधिकांश राज्यों में पुलिस और समाज के बीच समन्वय देखने को मिला। यही वजह रही कि लाखों लोगों की भागीदारी के बावजूद कहीं भी बड़े पैमाने पर अव्यवस्था नहीं हुई।
🔹अमरोहा में नौवें मोहर्रम पर हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक जोड़ियों का मातमी जुलूस पूरी श्रद्धा के साथ निकाला गया। जुलूस का शुभारंभ दरबार-ए-कला इमामबाड़ा शम्स अली खां से हुआ,समापन इमामबाड़ा दोस्त अली कटकोई पर हुआ,जुलूस के गंगा मंदिर पहुंचने पर हिन्दू भाइयों द्वारा स्वागत किया गय pic.twitter.com/wRmhaRGk0S
— AIR News Lucknow (@airnews_lucknow) June 25, 2026
आशूरा का दिन इस्लामी इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इसी दिन कर्बला के मैदान में पैगंबर हजरत मुहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने सत्य और न्याय की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान की थी। यही कारण है कि दुनिया भर के मुसलमान इस दिन को गहरे सम्मान और शोक के साथ याद करते हैं। शिया समुदाय दस दिनों तक मजलिस, मातम और नौहाख्वानी के माध्यम से कर्बला के शहीदों को याद करता है। वहीं सुन्नी समुदाय के अनेक लोग आशूरा के अवसर पर रोजा रखते हैं और इबादत करते हैं।
વાંકાનેર વિસ્તારમાં હુસૈની માહોલ વચ્ચે મુસ્લિમ બિરાદરો દ્વારા આસ્થાભેર મોહરમ પર્વની ઉજવણી કરાઇ… https://t.co/EDlp2mn1cz via @Chakravat News
— Chakravat News (@ChakravatN) June 26, 2026
कर्बला का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना चौदह सौ वर्ष पहले था। यह घटना बताती है कि सत्ता से बड़ा सच होता है, ताकत से बड़ा इंसाफ होता है और समझौते से बड़ा उसूल होता है। यही कारण है कि मुहर्रम केवल एक धार्मिक अवसर नहीं बल्कि इंसानियत, न्याय, साहस और नैतिक मूल्यों की याद दिलाने वाला दिन भी माना जाता है। देशभर में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए इस वर्ष के आयोजन ने भी यही संदेश दिया कि विविधता में एकता, आपसी सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।