फरहान इसराइली/ जयपुर
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बेटियों के हाथों में जल्द ही भविष्य की सबसे आधुनिक तकनीक होने जा रही है। राज्य की छात्राओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल साक्षरता से जोड़ने के लिए एक बहुत बड़ी और अनूठी पहल की शुरुआत हो रही है। इस सराहनीय मुहिम को जमीन पर उतारने का जिम्मा जयपुर के एक युवा सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाया है। शिक्षा, तकनीक और रोजगार के क्षेत्र में पिछले कई सालों से लगातार जमीन पर काम कर रहे मोहम्मद शहज़ाद को अब उनके प्रयासों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत बड़ी पहचान मिली है।
अमेरिका की जानी-मानी संस्था 'राइज अप टुगेदर' ने उनकी दूरगामी सोच को सराहा है। संस्था ने उनकी परियोजना के लिए 20हजार अमेरिकी डॉलर यानी करीब 17लाख रुपये की अंतरराष्ट्रीय ग्रांट मंजूर की है। यह पूरी राशि “एआई एंड डिजिटल लिटरेसी फॉर मिडिल स्कूल गर्ल्स इन राजस्थान” प्रोजेक्ट पर खर्च की जाएगी। इसके जरिए सरकारी स्कूलों की छात्राओं को तकनीक की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।
यह बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना मार्च 2027 तक पूरे एक साल चलेगी। इस बदलाव की शुरुआत जयपुर जिले के 10चुनिंदा सरकारी स्कूलों से होने जा रही है। इन स्कूलों में पढ़ने वाली कक्षा 6से 10तक की छात्राओं को एआई, डिजिटल लर्निंग और नई तकनीकों के बारे में विस्तार से सिखाया जाएगा।
इस मुहिम को सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसके तहत सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही स्कूलों में तकनीक के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शिक्षा विभाग के साथ बेहतर तालमेल बनाकर इस पहल को आने वाले समय में और बड़े पैमाने पर राज्यभर में लागू करने की तैयारी है।
मोहम्मद शहज़ाद का मानना है कि आज के आधुनिक दौर में शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। वह कहते हैं कि अगर सरकारी स्कूलों के बच्चे आधुनिक तकनीक से महरूम रह गए तो वे भविष्य की दौड़ में बहुत पीछे छूट जाएंगे।
आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। यह बेहद जरूरी है कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को भी ये तमाम आधुनिक अवसर समान रूप से मिल सकें।
इस पूरे बदलाव के पीछे करीब 15साल पहले शुरू हुआ एक छोटा सा सफर है। साल 2010 में 'आगाज़ आर्गेनाइजेशन' नाम की संस्था की नींव रखी गई थी। आज यह संस्था हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की एक नई किरण बन चुकी है। संस्था का असली मकसद बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान देना नहीं है।
इसका मुख्य ध्येय युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। शहज़ाद बहुत साफ शब्दों में कहते हैं कि आज के दौर में शिक्षा का मतलब सिर्फ कागज की डिग्री हासिल करना नहीं रह गया है। आज समाज को ऐसी व्यावहारिक पढ़ाई की जरूरत है जो युवाओं को सीधे रोजगार, आधुनिक तकनीक और समाज में जीने का आत्मविश्वास दे सके। इसी नेक सोच के साथ उनकी संस्था “एंपावरिंग कम्युनिटीज थ्रू एजुकेशन एंड टेक्नोलॉजी” के मिशन पर दिन-रात जुटी हुई है।
उनकी संस्था अब तक 6000 से भी अधिक छात्र-छात्राओं को रोजगार आधारित कोर्स करवा चुकी है। इनमें आरएससीआईटी, टैली अकाउंट्स, डिजिटल मार्केटिंग, रिटेल मैनेजमेंट और बैंकिंग व फाइनेंस जैसे कौशल विकास पाठ्यक्रम शामिल हैं। संस्था का दावा है कि ट्रेनिंग पूरे करने वाले युवाओं में से करीब 70 फीसदी को रोजगार के बेहतर अवसर मिले हैं।
इस समय आगाज़ संस्था के दो बड़े स्किल डेवलपमेंट सेंटर जयपुर के रामगढ़ मोड़ और पहाड़गंज इलाके में सफलतापूर्वक चल रहे हैं। इन सेंटर्स पर हर रोज लगभग 250गरीब और जरूरतमंद युवा अपने भविष्य को संवारने की तैयारी में जुटे रहते हैं।
आगाज़ आर्गेनाइजेशन का काम सिर्फ युवाओं को हुनर सिखाने तक ही सीमित नहीं है। यह संस्था बच्चों की स्कूली शिक्षा की बुनियादी नींव को मजबूत करने के लिए भी लगातार प्रयासरत है। इसके लिए मैदान पर एक विशेष “लर्निंग एन्हांसमेंट प्रोग्राम” चलाया जा रहा है।
इस कार्यक्रम के तहत बच्चों को अंग्रेजी, गणित और विज्ञान जैसे कठिन विषयों को बहुत ही आसान तरीके से सिखाया जाता है। शहज़ाद कहते हैं कि आज की असली चुनौती सिर्फ बच्चों का स्कूल में नाम लिखवाना नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती यह देखना है कि बच्चा अपनी कक्षा के हिसाब से सच में कुछ सीख भी पा रहा है या नहीं।
हाल ही में आई एएसईआर 2024 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए वह बताते हैं कि आज भी एक बहुत बड़ी संख्या में बच्चे बुनियादी गणित और अपनी कक्षा के स्तर की किताबें पढ़ने में कमजोर हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए उनकी संस्था बच्चों को खेल-खेल में और व्यावहारिक गतिविधियों के जरिए सीखने का एक बेहतरीन माहौल दे रही है।
तकनीक की समझ देने के साथ-साथ संस्था बच्चों को 'डिजिटल चैंपियन' बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। आज के समय में हर घर में इंटरनेट और मोबाइल का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ा है। लेकिन इस तकनीकी उछाल के साथ-साथ ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर बुलिंग, फेक न्यूज और सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल जैसी गंभीर समस्याएं भी तेजी से बढ़ी हैं।
ऐसे में बच्चों और किशोरों को डिजिटल दुनिया के खतरों से आगाह करना बेहद जरूरी हो गया है। इसी जरूरत को समझते हुए संस्था की ओर से सरकारी स्कूलों में डिजिटल सुरक्षा साक्षरता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसमें बच्चों को केवल मोबाइल चलाना नहीं सिखाया जाता। उन्हें इंटरनेट का सुरक्षित, सही और जिम्मेदारी से उपयोग करना सिखाया जाता है।
विद्यार्थियों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के तरीके, सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल के नियम, अफवाहों की पहचान और अपनी डिजिटल जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक किया जाता है। संस्था का मुख्य उद्देश्य बच्चों को तकनीक का सिर्फ अंधा उपभोक्ता बनाना नहीं है।
वे बच्चों को एक जागरूक और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाना चाहते हैं। पिछले दो सालों में संस्था ने 5500से अधिक छात्र-छात्राओं को डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा की ट्रेनिंग देकर सुरक्षित किया है। इसके साथ ही संस्था युवाओं के करियर को सही दिशा देने के लिए भी काम कर रही है।
एक सरकारी आंकड़े के अनुसार देश में करीब 80से 85प्रतिशत छात्र बिना किसी करियर काउंसलिंग के ही अपने विषयों का चुनाव कर लेते हैं। बाद में यही गलत फैसला उनके पूरे करियर के लिए एक बड़ी मुसीबत बन जाता है।
इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए संस्था साल 2011 से “गाइड फॉर नेक्स्ट” नाम का एक विशेष प्रोग्राम चला रही है। इसके तहत बच्चों को व्यक्तिगत रूप से करियर गाइडेंस और काउंसलिंग दी जाती है। अब तक 10हजार से अधिक विद्यार्थी इस काउंसलिंग का लाभ उठा चुके हैं।
जयपुर के रामगढ़ मोड़ के रहने वाले मोहम्मद शहज़ाद का यह सफर बहुत ही छोटे स्तर से शुरू हुआ था। वह लंबे समय से शिक्षा, डिजिटल साक्षरता और सामाजिक विकास के कामों में जमीन से जुड़े रहे हैं। उनकी संस्था पिछले डेढ़ दशक में 10हजार से अधिक बच्चों तक शिक्षा की अलख जगा चुकी है।
इसके अलावा 5हजार से अधिक युवाओं को सीधे रोजगार के अवसरों से जोड़ चुकी है। शहज़ाद खुद प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन और प्रथम इन्फोटेक फाउंडेशन जैसी देश की नामी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं। साल 2013में उन्हें राजस्थान में एड-टेक कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर लागू करने की एक बड़ी जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।
उनकी इस मेहनत को अब अमेरिका की संस्था 'राइज अप टुगेदर' ने सराहा है। यह अंतरराष्ट्रीय संस्था पूरी दुनिया में जेंडर इक्वलिटी और लड़कियों की शिक्षा के क्षेत्र में काम करती है। इस संस्था की फेलोशिप के लिए देश-दुनिया से डेढ़ सौ से अधिक सामाजिक लीडर्स ने आवेदन किया था।
इनमें से राजस्थान से केवल 30 लोगों का चुनाव किया गया। इन चुने हुए लोगों को पिछले साल नवंबर में उदयपुर में सात दिनों की एक बहुत ही विशेष प्रशासनिक और तकनीकी ट्रेनिंग दी गई।
इसके बाद मार्च 2026 में अंतिम रूप से छह बेहतरीन प्रोजेक्ट्स को चुना गया। इनमें मोहम्मद शहज़ाद के एआई प्रोजेक्ट को सर्वश्रेष्ठ मानते हुए 20हजार डॉलर की अंतरराष्ट्रीय ग्रांट दी गई।
अप्रैल 2026से इस प्रोजेक्ट पर जमीनी काम शुरू कर दिया गया है। फिलहाल स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां होने की वजह से इसकी नियमित कक्षाएं जुलाई के महीने से पूरी रफ्तार से शुरू की जाएंगी।
शिक्षा, डिजिटल जागरूकता और समाज सेवा के क्षेत्र में किए गए इन बेहतरीन कार्यों के लिए मोहम्मद शहज़ाद को अब तक कई बड़े पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान के लिए जयपुर एजुकेशन एक्सीलेंस अवॉर्ड और हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन द्वारा एजुकेशन एक्सीलेंस अवॉर्ड दिया गया है।
इसके अलावा उन्हें काफिला परिवार अवॉर्ड और एटीएम सोसायटी द्वारा स्किल डेवलपमेंट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए प्रिंसेस दिया कुमारी फाउंडेशन की ओर से उन्हें प्रतिष्ठित 'प्रोजेक्ट शक्ति अवॉर्ड' से नवाजा गया। उन्हें सांझी विरासत मंच द्वारा क्वालिटी एजुकेशन एंड स्किल डेवलपमेंट अवॉर्ड और हेल्पलाइन फाउंडेशन द्वारा मशहूर 'सर सैयद अवॉर्ड' भी प्रदान किया जा चुका है।
इस बड़ी अंतरराष्ट्रीय ग्रांट के मिलने के बाद मोहम्मद शहज़ाद और उनकी पूरी टीम नए उत्साह के साथ काम में जुट गई है। उनका एकमात्र लक्ष्य राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब से गरीब बच्चे तक डिजिटल और एआई शिक्षा की पहुंच को आसान बनाना है।
वह पूरी उम्मीद के साथ कहते हैं कि आने वाला कल पूरी तरह से आधुनिक तकनीक का होने वाला है। अगर सरकारी स्कूलों के बच्चे आज से ही इस तकनीक को सीखकर आगे बढ़ेंगे तो वे भविष्य में आने वाले किसी भी बड़े अवसर को भुनाने के लिए पूरी तरह से तैयार रहेंगे।