आवाज द वाॅयस / ढाका ( बांग्लादेश)
बांग्लादेश के सियासी गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आई है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी के कद्दावर नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को देश का 23वां राष्ट्रपति चुन लिया गया है। ढाका स्थित जातीय संसद भवन के सत्र भवन में 20 अगस्त को मतदान कराया गया। मतों की गिनती पूरी होने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने आधिकारिक नतीजों का ऐलान कर दिया।
इस चुनाव में आलमगीर ने भारी मतों से जीत दर्ज करके एक नया इतिहास रच दिया है। यह राष्ट्रपति चुनाव कई मायनों में बेहद खास रहा। पिछले 35 वर्षों में यह पहली बार था जब बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद के लिए दो उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला। आमतौर पर यहां यह पद सर्वसम्मति से तय होता रहा है।
राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए कुल 349 सांसद मतदाता थे। इनमें से 343 सांसदों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। 6 सांसद वोटिंग प्रक्रिया से दूर रहे। वोट डालने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए संसद सदस्यों ने अपनी तय सीटों पर बैठकर मतपत्र पर दस्तखत किए और मतदान किया।गिनती पूरी हुई तो परिणाम काफी एकतरफा नजर आए।
मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को कुल 255 वोट मिले। वहीं दूसरी ओर जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलीय गठबंधन के प्रत्याशी कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद को सिर्फ 88 मतों से ही संतोष करना पड़ा। चुनाव आयोग की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ने आलमगीर को देश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में नामित घोषित कर दिया।

जीत की घोषणा होते ही संसद भवन में बधाई देने का सिलसिला शुरू हो गया। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने नए राष्ट्रपति मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को लाल गुलाब भेंट किया और अपनी शुभकामनाएं दीं।
उनके साथ विपक्ष के नेताओं और तमाम सांसदों ने भी नव-निर्वाचित राष्ट्रपति को बधाई दी। मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर का जन्म 26 जनवरी 1948 को ठाकुरगांव में हुआ था। उनका पारिवारिक पृष्ठभूमि से ही राजनीति से गहरा नाता रहा है।
उनके पिता मिर्जा रूहूल अमीन पेशे से वकील थे और प्रांतीय विधानसभा के सदस्य के साथ-साथ मंत्री भी रहे। उनके चाचा मिर्जा गुलाम हाफिज बांग्लादेश संसद के अध्यक्ष और मंत्री रह चुके हैं।आलमगीर ने ढाका कॉलेज से अपनी शुरुआती उच्च शिक्षा पूरी की और फिर ढाका विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में उच्च डिग्री हासिल की। छात्र जीवन के दौरान ही वे राजनीति में सक्रिय हो गए थे। साल 1969 के ऐतिहासिक जनआंदोलन में उन्होंने छात्र नेता के रूप में अहम भूमिका निभाई थी।
हालांकि अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने तुरंत पूर्णकालिक राजनीति को नहीं चुना। उन्होंने सिविल सेवा की शिक्षा कैडर परीक्षा पास की और 1972 में ढाका कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाने लगे।
वे कई सरकारी कॉलेजों में पढ़ा चुके हैं और यूनेस्को राष्ट्रीय आयोग में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। राष्ट्रपति जियाउर रहमान के शासनकाल में उन्होंने उप-प्रधानमंत्री एस.ए. बारी के निजी सचिव के रूप में काम संभाला। साल 1986 में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और सीधे तौर पर सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
1988 में वे ठाकुरगांव नगरपालिका के अध्यक्ष चुने गए। जब देश में सैन्य शासक हुसैन मोहम्मद इरशाद के खिलाफ आंदोलन चल रहा था, तब वे बीएनपी में शामिल हुए।2001 में ठाकुरगांव-1 सीट से चुनाव जीतकर वे पहली बार सांसद बने।
बेगम खालिदा जिया की सरकार में उन्हें कृषि राज्य मंत्री और बाद में नागरिक उड्डयन एवं पर्यटन राज्य मंत्री का प्रभार सौंपा गया। बीएनपी संगठन के भीतर उनका कद लगातार बढ़ता गया।
A moment of warmth and statesmanship.🌹
— Bangladesh First (@BDFirst2024) August 20, 2026
HPM Tarique Rahman congratulates Mirza Fakhrul Islam Alamgir with a rose immediately after his election as the 23rd President of Bangladesh.
A powerful symbol of respect, unity and democratic transition.#bd #TariqueRahman #MirzaFakhrul pic.twitter.com/cM3RfqnGtO
2009 में वे वरिष्ठ संयुक्त महासचिव बने और 2016 में पार्टी के पूर्ण महासचिव बनाए गए। जब बीएनपी वर्षों तक विपक्ष में रही और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में संकटों का सामना कर रही थी, तब आलमगीर पार्टी के सबसे प्रमुख और विश्वसनीय चेहरे बने रहे।
उस दौर में उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा और कानूनी मुकदमों का सामना भी करना पड़ा। बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव की स्थिति अचानक पैदा हुई। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए 24 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
उनके इस्तीफे के बाद संविधान के अनुसार संसद अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारियां संभाल रहे थे।बांग्लादेशी संविधान का नियम कहता है कि पद खाली होने के 90 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति का चुनाव कराना जरूरी होता है।
इस नियम के तहत संसद में चुनाव कराया गया। बीएनपी ने चुनाव से पहले ही मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को अपना उम्मीदवार तय कर दिया था। नामांकन मिलने के बाद आलमगीर ने पार्टी के महासचिव पद और राष्ट्रीय स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया ताकि वे एक संवैधानिक और निष्पक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल सकें।
बांग्लादेश की शासन प्रणाली में राष्ट्रपति मुख्य रूप से संवैधानिक राष्ट्रप्रमुख होता है। दैनिक सरकारी कामकाज, अर्थव्यवस्था और नीतियां तय करने का अधिकार प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के पास होता है।
राष्ट्रपति सशस्त्र बलों का सर्वोच्च कमांडर होता है और संवैधानिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाता है।फरवरी 2026 में हुए आम चुनावों में बीएनपी को संसद में दो-तिहाई बहुमत मिला है। सरकार अब रोजगार निर्माण, युवाओं के कौशल विकास, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, गरीबों के लिए फैमिली कार्ड और प्रशासनिक सुधारों जैसे वादों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आलमगीर का लंबा राजनीतिक अनुभव अब देश के शीर्ष संवैधानिक पद को दिशा देगा।