आवाज द वाॅयस/ग्लासगो
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। भारतीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीत लिया। इसी के साथ ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का पदकों का खाता भी खुल गया। झंडू कुमार ने पुरुष हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में 190 किलोग्राम का सफल भार उठाकर तीसरा स्थान हासिल किया।
यह मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। झंडू कुमार ने शुरुआत से ही आत्मविश्वास दिखाया। पहले प्रयास में उन्होंने 181 किलोग्राम वजन उठाया। इसके लिए उन्हें 124.7 अंक मिले। दूसरे प्रयास में उन्होंने 190 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 130.9 अंक हासिल किए। इस प्रदर्शन के बाद वह कुछ समय के लिए शीर्ष स्थान पर पहुंच गए थे।
इसके बाद उन्होंने अंतिम प्रयास में बड़ा दांव खेला। उन्होंने 196 किलोग्राम वजन उठाने का फैसला किया। यदि वह इसमें सफल हो जाते तो बर्मिंघम 2022 में बना कॉमनवेल्थ गेम्स का रिकॉर्ड भी टूट जाता। लेकिन तीसरा प्रयास सफल नहीं हो सका। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन कांस्य पदक दिलाने के लिए काफी रहा।
#WATCH | Scotland | Glasgow 2026 Commonwealth Games | On winning bronze in the men's heavyweight category, Indian para powerlifter Jhandu Kumar says, "I feel great today. I feel like I am flying. This is my first medal. I had only one thing on my mind, that I have to win a… pic.twitter.com/jfFzSFJNk3
— ANI (@ANI) July 24, 2026
यह पदक कई मायनों में खास है। यह ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का पहला पदक है। साथ ही पैरा पावरलिफ्टिंग में भी भारत के अभियान को मजबूत शुरुआत मिली है।
झंडू कुमार के कोच और देश के अनुभवी पैरा पावरलिफ्टर राजिंदर सिंह राहेलू ने कहा कि टीम का लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना था। तैयारी भी उसी हिसाब से की गई थी। लेकिन आखिरी समय में हुई छोटी सी चूक महंगी पड़ गई।
राहेलू ने बताया कि मुकाबले से पहले सभी संभावित अंकों और वजन का पूरा हिसाब लगाया गया था। टीम को भरोसा था कि झंडू कुमार स्वर्ण पदक जीत सकते हैं। लेकिन प्रतियोगिता के दौरान संचार में थोड़ी परेशानी आई। इसी वजह से सही समय पर सही फैसला नहीं लिया जा सका।
उन्होंने कहा कि स्वर्ण पदक की लड़ाई बेहद कड़ी थी। केवल दो अंकों का अंतर रहा। पैरा पावरलिफ्टिंग में दो अंक का मतलब लगभग दो से तीन किलोग्राम का अंतर होता है। इतनी छोटी दूरी पर मुकाबले का परिणाम बदल जाता है।
राहेलू ने कहा कि निराशा जरूर है क्योंकि स्वर्ण पदक बहुत करीब था। लेकिन भारत के लिए पहला पदक जीतना भी बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ी और बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
पुरुष लाइटवेट वर्ग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पूरी ताकत लगाई। अशोक ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उन्होंने 200 किलोग्राम वजन उठाया। उन्हें 143.8 अंक मिले। इसके बावजूद वह चौथे स्थान पर रहे और पदक से मामूली अंतर से चूक गए।
परमजीत कुमार ने 176 किलोग्राम वजन उठाया। उनके खाते में 135.6 अंक आए। वह सातवें स्थान पर रहे। दोनों खिलाड़ियों ने अच्छा संघर्ष किया लेकिन पदक तक नहीं पहुंच सके।
महिला लाइटवेट वर्ग में जसप्रीत कौर ने 100 किलोग्राम वजन उठाया। उन्हें 96.4 अंक मिले। वह छठे स्थान पर रहीं। सुमन देवी ने भी 100 किलोग्राम का सफल प्रयास किया लेकिन उनके अंक 88.4 रहे। वह सातवें स्थान पर रहीं।
महिला हैवीवेट वर्ग में भारत की कस्तूरी राजामणि का दिन अच्छा नहीं रहा। उन्होंने तीनों प्रयास किए लेकिन कोई भी सफल नहीं हो सका। इस कारण वह वैध स्कोर दर्ज नहीं कर सकीं।
हालांकि इन परिणामों के बीच झंडू कुमार की उपलब्धि भारतीय दल के लिए बड़ी राहत लेकर आई। उनके कांस्य पदक ने पूरे दल का मनोबल बढ़ाया है। प्रतियोगिता के शुरुआती चरण में मिला यह पदक आगे आने वाले खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।
कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में पैरा खेलों में उल्लेखनीय प्रगति की है। पैरालंपिक, एशियन पैरा गेम्स और विश्व चैंपियनशिप के बाद अब कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारतीय खिलाड़ी अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं।
झंडू कुमार की सफलता इस बात का संकेत है कि भारतीय पैरा पावरलिफ्टिंग नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। यदि खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, वैज्ञानिक तैयारी और प्रतियोगिता के दौरान सही रणनीति मिले तो आने वाले वर्षों में भारत और अधिक स्वर्ण पदक जीत सकता है।
ग्लासगो से भारत के लिए यह शुरुआत उम्मीद जगाने वाली है। अभी कई स्पर्धाएं बाकी हैं। भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद भी बनी हुई है। खेल प्रेमियों की नजर अब आने वाले मुकाबलों पर है जहां भारत अपना पदक अभियान और मजबूत करने की कोशिश करेगा।
🇮🇳 BRONZE FOR BHARAT! 🥉
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) July 24, 2026
Jhandu Kumar opens India’s #CWG2026 medal tally with a massive 190kg lift in Men’s Heavyweight Para Powerlifting. The entire nation is proud! 🇮🇳 #Cheer4Bharat pic.twitter.com/pyZSOZw0uI
झंडू कुमार ने यह साबित कर दिया कि कठिन मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। उनका कांस्य पदक केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि भारतीय पैरा खेलों की बढ़ती ताकत का भी प्रमाण है।
भारतीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुष हैवीवेट वर्ग में कांस्य पदक जीतकर भारत का पहला पदक दिलाया।
उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया और 130.9 अंक हासिल किए।
कोच राजिंदर सिंह राहेलू के अनुसार प्रतियोगिता के दौरान मामूली गणना और संचार की गलती हुई। इसी कारण स्वर्ण पदक हाथ से निकल गया।
उन्होंने 196 किलोग्राम वजन उठाने का प्रयास किया। यह सफल होता तो कॉमनवेल्थ गेम्स का नया रिकॉर्ड बन जाता।
अशोक चौथे स्थान पर रहे। परमजीत कुमार सातवें स्थान पर रहे। जसप्रीत कौर छठे और सुमन देवी सातवें स्थान पर रहीं। कस्तूरी राजामणि कोई वैध लिफ्ट दर्ज नहीं कर सकीं।