आवाज द वाॅयस / नई दिल्ली/ बीदर
मदरसे की शिक्षा को लेकर समाज में एक पुरानी धारणा रही है। लोग अक्सर सोचते हैं कि मदरसे में सिर्फ धार्मिक शिक्षा मिलती है। वहां पढ़ने वाले बच्चे सिर्फ हाफिज या मौलवी बन सकते हैं। आधुनिक दुनिया या विज्ञान के क्षेत्र में उनका कोई बड़ा योगदान नहीं हो सकता। लेकिन इस साल के नीट रिजल्ट ने इस पूरे भ्रम को तोड़ कर रख दिया है। मदरसे से निकले बच्चों ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक नीट यूजी 2026 में न केवल कामयाबी हासिल की बल्कि एक नई मिसाल कायम की है।
इस साल बीदर के मशहूर शाहीन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के 23 से ज्यादा हाफिज-ए-कुरान बच्चों ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शानदार स्कोर किया है। इन छात्रों ने साबित कर दिया कि अगर सही गाइडेंस और पक्का इरादा हो तो धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान में भी टॉप किया जा सकता है। पिछले साल भी इस संस्थान से कई मदरसा छात्रों ने मेडिकल परीक्षा पास की थी। इस बार का परिणाम उससे भी बड़ा और ऐतिहासिक बनकर सामने आया है।
भ्रम टूटा और बनी नई नजीर
समाज में अक्सर यह बहस चलती है कि पारंपरिक मदरसों के बच्चे मुख्यधारा की शिक्षा में पीछे रह जाते हैं। शाहीन ग्रुप के इन बच्चों की सफलता इस पूरी सोच को बदलने वाली है। कुरान को पूरी तरह याद करने वाले इन होनहारों ने नीट के री-एग्जाम और मुख्य परीक्षा दोनों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। यह सफलता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि नीट परीक्षा में हर साल लाखों बच्चे बैठते हैं। देश के सबसे अच्छे कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले छात्र भी इस परीक्षा को पास करने के लिए सालों रात-दिन एक करते हैं। ऐसे में मदरसे की पृष्ठभूमि से आकर सीधे मेडिकल एंट्रेंस क्लियर करना एक चमत्कारी बदलाव जैसा है।
शिक्षकों का कहना है कि कुरान को याद करने से बच्चों की एकाग्रता और याददाश्त बहुत मजबूत हो जाती है। जब इन बच्चों को सही माहौल और आधुनिक विषयों की कोचिंग मिली तो उन्होंने बहुत कम समय में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी पर अपनी पकड़ बना ली। यही वजह है कि आज ये छात्र देश के बड़े मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर बनने की राह पर निकल पड़े हैं।

इन होनहारों ने लहराया कामयाबी का परचम
संस्थान द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार सफलता पाने वाले छात्रों में लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं। इन सभी बच्चों ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर बेहतरीन स्कोर हासिल किया है। कामयाब होने वाले मुख्य छात्रों के नाम और उनके नंबर इस प्रकार हैं
ये आंकड़े बताते हैं कि बच्चों ने केवल परीक्षा पास नहीं की बल्कि बहुत अच्छे नंबरों के साथ सरकारी मेडिकल सीटों की रेस में खुद को शामिल किया है।
धार्मिक और आधुनिक शिक्षा का बेहतरीन तालमेल
शाहीन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के इस मॉडल ने शिक्षाविदों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। संस्थान के प्रबंधन का मानना है कि ज्ञान को टुकड़ों में नहीं देखा जाना चाहिए। एक बच्चा अपनी धार्मिक पहचान और संस्कृति को सुरक्षित रखते हुए भी डॉक्टर, इंजीनियर या वैज्ञानिक बन सकता है। इसके लिए बस एक सही ब्रिज कोर्स यानी सेतु पाठ्यक्रम की जरूरत होती है जो मदरसे के माहौल से बच्चों को आधुनिक स्कूली शिक्षा में आसानी से ढाल सके।
बीदर के इस कैंपस में बच्चों को ऐसा माहौल दिया गया जहां वे अपनी नियमित नमाज और धार्मिक कर्तव्यों को पूरा करने के साथ-साथ नीट की तैयारी के लिए लंबे समय तक पढ़ाई कर सके। शिक्षकों ने इन बच्चों के बुनियादी विज्ञान को मजबूत करने के लिए विशेष कक्षाओं का आयोजन किया। शुरुआत में जिन बच्चों को अंग्रेजी या आधुनिक शब्दावली में थोड़ी दिक्कत आ रही थी उन्हें अलग से समय दिया गया। नतीजा आज सबके सामने है।
माता-पिता और समाज में खुशी की लहर
इस ऐतिहासिक सफलता के बाद बीदर कैंपस के साथ-साथ इन बच्चों के गृह राज्यों में भी जश्न का माहौल है। सफल छात्रों के माता-पिता भावुक हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मदरसा में पढ़ने वाला उनका बेटा या बेटी एक दिन डॉक्टर बनने की दहलीज पर खड़ा होगा। यह पूरी कौम और समाज के लिए एक गर्व का पल है।
स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े दिग्गजों ने सभी सफल छात्र-छात्राओं को बधाई दी है। सोशल मीडिया पर भी इन बच्चों की सफलता की कहानियां खूब शेयर की जा रही हैं। लोग इसे भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं। यह रिजल्ट उन तमाम लोगों के लिए एक सीधा जवाब है जो मदरसे के बच्चों की काबिलियत पर शक करते थे।
आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा
शाहीन ग्रुप के इन 23 हाफिजों की कहानी अब देश के दूसरे मदरसों तक पहुंच रही है। इस सफलता से प्रेरित होकर अब देश के अन्य हिस्सों में भी मदरसे के बच्चों के लिए आधुनिक कोचिंग और नीट-जी जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराने की मांग उठने लगी है। यह बच्चे अपने जैसे हजारों अन्य युवाओं के लिए रोल मॉडल बन गए हैं।
यह नतीजा साफ संदेश देता है कि प्रतिभा किसी खास स्कूल या सुख-सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। अगर बच्चों को सही दिशा, जरूरी संसाधन और शिक्षकों का पूरा सहयोग मिले तो वे देश की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। शाहीन ग्रुप ने जो रास्ता दिखाया है वह आने वाले समय में देश के भीतर एक बड़े शैक्षिक बदलाव की नींव साबित हो सकता है। सभी सफल छात्रों को उज्जवल भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं।