NEET में कश्मीर के छात्रों का शानदार प्रदर्शन

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 19-07-2026
Four promising youths from Kashmir set an example of success in NEET.
Four promising youths from Kashmir set an example of success in NEET.

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

जम्मू-कश्मीर की वादियों से इस वर्ष शिक्षा, मेहनत और आत्मविश्वास की ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र के युवाओं में नई उम्मीद और आगे बढ़ने का जज्बा पैदा किया है। कभी सीमित अवसरों, कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाले कश्मीर के युवाओं ने अब अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है।

दक्षिण कश्मीर के शोपियां और अनंतनाग जिलों से सामने आई चार मुस्लिम युवाओं की सफलता की कहानी इसी बदलाव का प्रतीक है। इन चारों युवाओं ने देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 में शानदार प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी क्षेत्र, गांव, आर्थिक स्थिति या संसाधनों की मोहताज नहीं होती। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत लगातार हो और सपनों को पूरा करने का संकल्प मजबूत हो, तो कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है।

इन चार युवाओं की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे कश्मीर के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गई है। इनकी कहानी उन हजारों विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की किरण है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

शोपियां जिले के बटपोरा गांव निवासी फैजान गुलज़ार ने NEET UG 2026 में 607 अंक हासिल कर शानदार सफलता प्राप्त की है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद फैजान ने अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा और मेडिकल क्षेत्र में प्रवेश का सपना पूरा किया।

इसी तरह शोपियां जिले के मोलू डेंजरपोरा गांव के रहने वाले मुकीम मुज़फ्फर वानी ने NEET परीक्षा में 584 अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। मुकीम की सफलता इस बात का उदाहरण है कि परिवार का सहयोग, आत्मविश्वास और लगातार मेहनत किसी भी विद्यार्थी को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।

वहीं, मनीहाल गांव के रहने वाले शारिक मुज़फ़्फ़र ने भी NEET UG 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 720 में से 601 अंक हासिल किए। शारिक की सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि वह एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों और कई चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपने को कमजोर नहीं पड़ने दिया और लगातार मेहनत करते हुए मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की।

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के वेरीनाग क्षेत्र के बटागुंड गांव निवासी मेहरान अमीन ने भी NEET UG 2026 में शानदार सफलता हासिल की। उन्होंने 610 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक (AIR) 7000 हासिल की। साधारण परिवार से आने वाले मेहरान ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद पूरी लगन और समर्पण के साथ परीक्षा की तैयारी की।

इन चारों युवाओं की यात्रा यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति के भविष्य का फैसला नहीं करतीं। असली ताकत मेहनत, अनुशासन, धैर्य और अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार प्रयास में होती है।

दिहाड़ी मजदूर के बेटे शारिक की संघर्ष से सफलता तक की कहानी

शारिक मुज़फ़्फ़र की सफलता हजारों संघर्ष कर रहे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है। एक साधारण परिवार से आने वाले शारिक ने साबित किया कि आर्थिक परेशानियां किसी विद्यार्थी की क्षमता को सीमित नहीं कर सकतीं।

अपनी तैयारी के बारे में बताते हुए शारिक ने कहा कि छात्रों को शॉर्टकट के बजाय विषयों की मजबूत समझ विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हर विषय की बुनियाद मजबूत करना सबसे जरूरी है। जब नींव मजबूत होती है तो आगे की पढ़ाई आसान हो जाती है। कभी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए, लगातार मेहनत करते रहना चाहिए और प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए। सफलता रातों-रात नहीं मिलती, लेकिन लगातार प्रयास जरूर रंग लाते हैं।”

अपने शैक्षणिक सफर को याद करते हुए शारिक ने बताया कि वह कक्षा 10 तक एक सामान्य छात्र थे। इसके बाद उन्होंने अपने लक्ष्य को गंभीरता से लिया और अनुशासित तरीके से पढ़ाई शुरू की। उन्होंने कहा, “मैं 10वीं तक एक औसत छात्र था। उसके बाद मैंने अपने लक्ष्य के लिए गंभीरता से मेहनत शुरू की। पहली कोशिश में NEET पास नहीं कर सका, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। अपनी गलतियों से सीखा, एक साल और तैयारी की, पहले से ज्यादा मेहनत की और आखिरकार दूसरी कोशिश में सफलता हासिल की।”

शारिक ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को दिया। उन्होंने कहा कि उनकी मां ने हर मुश्किल समय में उनका साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “मेरी मां ने हर परिस्थिति में मेरा साथ दिया। उनके त्याग, प्रोत्साहन और मेरे ऊपर विश्वास ने मुझे कठिन समय में भी आगे बढ़ते रहने की ताकत दी।”

शारिक ने छात्रों की सफलता में माता-पिता की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि माता-पिता का सहयोग और हौसला-अफजाई विद्यार्थियों को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

मेहरान अमीन की सफलता: धैर्य और निरंतर मेहनत का परिणाम

मेहरान अमीन ने अपनी सफलता के बाद कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन व्यक्ति को धैर्य नहीं खोना चाहिए और अपने लक्ष्य से भटकना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा, “जीवन में कई कठिन दौर आते हैं और कई बार परिस्थितियां हमारे पक्ष में नहीं होतीं। लेकिन अगर हम धैर्य रखें, अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें और लगातार मेहनत करते रहें तो सफलता जरूर मिलती है। किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतरता सबसे जरूरी है।”

डॉक्टर बनने की अपनी इच्छा के बारे में मेहरान ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक करियर नहीं, बल्कि लोगों की सेवा करने का माध्यम है। उन्होंने कहा, “डॉक्टर बनना सिर्फ रोजी-रोटी कमाने का जरिया नहीं है, बल्कि जरूरतमंद लोगों की मदद करने और मानवता की सेवा करने का अवसर है।” बटागुंड गांव के लोगों ने मेहरान की सफलता पर खुशी जताई और कहा कि उनकी उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने साबित किया है कि आर्थिक स्थिति किसी के सपनों की सीमा तय नहीं कर सकती।

कश्मीर में शिक्षा की बदलती तस्वीर

NEET UG में इन चार मुस्लिम युवाओं की सफलता कश्मीर में शिक्षा को लेकर बदलती सोच को भी दर्शाती है। आज घाटी के परिवार अपने बच्चों की शिक्षा को पहले से अधिक महत्व दे रहे हैं और उन्हें बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

कभी सीमित संसाधन, आर्थिक परेशानियां और अवसरों की कमी छात्रों के रास्ते में बड़ी बाधा मानी जाती थीं, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं। डिजिटल शिक्षा, ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, बेहतर मार्गदर्शन और सफल विद्यार्थियों की प्रेरणादायक कहानियों ने कश्मीर के युवाओं को नई दिशा दी है।

आज गांवों में रहने वाले विद्यार्थी भी देश के अन्य हिस्सों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में अपनी पहचान बना रहे हैं। विशेष रूप से मेडिकल क्षेत्र के प्रति कश्मीर के युवाओं में रुचि तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टर बनने का सपना अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। घाटी के गांवों और कस्बों से आने वाले विद्यार्थी भी पूरे आत्मविश्वास के साथ मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। कई युवा मानते हैं कि डॉक्टर बनकर वे केवल अपना भविष्य बेहतर नहीं बनाएंगे, बल्कि अपने समाज और क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी योगदान देंगे।

मेहनत और शिक्षा से बदल रहा कश्मीर

फैजान गुलज़ार, मुकीम मुज़फ्फर वानी, शारिक मुज़फ़्फ़र और मेहरान अमीन की सफलता बदलते हुए कश्मीर की कहानी है। यह उस नई पीढ़ी की तस्वीर दिखाती है जो शिक्षा को विकास, सम्मान और बेहतर भविष्य का सबसे मजबूत माध्यम मान रही है।

आज कश्मीर के मुस्लिम समाज में शिक्षा को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है। बड़ी संख्या में युवा मेडिकल, इंजीनियरिंग, शोध, प्रशासनिक सेवाओं, कानून और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं।

जब किसी क्षेत्र से लगातार सफल विद्यार्थी निकलते हैं तो वहां शिक्षा का वातावरण मजबूत होता है, माता-पिता का विश्वास बढ़ता है और आने वाली पीढ़ियों को नई प्रेरणा मिलती है।

शोपियां और अनंतनाग के ये युवा अब केवल NEET सफल विद्यार्थी नहीं हैं, बल्कि हजारों बच्चों के लिए उम्मीद की नई रोशनी बन चुके हैं। उन्होंने साबित किया है कि बड़े सपने देखने के लिए बड़े शहरों में जन्म लेना जरूरी नहीं है। सही दिशा, मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर गांवों से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।

इन चारों युवाओं की कहानी यह संदेश देती है कि असफलताओं से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें सीखने का अवसर समझना चाहिए। संघर्ष जितना बड़ा होता है, सफलता की कहानी उतनी ही प्रेरणादायक बनती है।

कश्मीर के इन चार युवाओं ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और लगातार प्रयास के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

यह केवल चार विद्यार्थियों की सफलता नहीं है, बल्कि एक बदलते समाज की तस्वीर है एक ऐसा कश्मीर जहां शिक्षा नई पहचान बन रही है, जहां युवा बड़े सपने देख रहे हैं, उन्हें पूरा कर रहे हैं और अपनी मेहनत के बल पर देश और समाज के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।