सना खान और मुफ्ती अनस के साथ किरेन रिजिजू ने ‘रोनक-ए-रमजान’ में साझा की अपनी प्रेरक बातें

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 21-02-2026
Kiren Rijiju shares his inspiring words in 'Ronk-e-Ramadan' with Sana Khan and Mufti Anas
Kiren Rijiju shares his inspiring words in 'Ronk-e-Ramadan' with Sana Khan and Mufti Anas

 

आवाज द वाॅयस/नई दिल्ली

रमज़ान शुरू हो चुका है। रमज़ान का पवित्र महीना पूरे विश्व में मुसलमानों के लिए इबादत, आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिकता का प्रतीक होता है। इस पावन महीने में कई कार्यक्रम और पहल सामने आती हैं जो इस रूहानी माह की महिमा को जन-जन तक पहुंचाती हैं। ऐसे ही एक खास कार्यक्रम ‘रोनक-ए-रमजान’ ने इस बार खासी सुर्खियां बटोरी हैं। सुर्खियों में आने का कारण सिर्फ इसका विषय नहीं बल्कि इसमें शामिल personalities की अनूठी साझेदारी है। इस कार्यक्रम के होस्ट हैं पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री सना खान और उनके जीवन साथी, इस्लामी विद्वान मुफ्ती सैयद अनस। और इस बार इसके दूसरे संस्करण में केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

रमज़ान के आगमन के साथ ही ‘रोनक-ए-रमजान’ ने अपनी बहस, बातचीत और अक्सर दिल छू लेने वाली बातों के ज़रिये दर्शकों का ध्यान खींचा है। इस दौरान जब प्रधानमंत्री स्तर के मंत्री कार्यक्रम का हिस्सा बनें तो उसकी बात कुछ और ही बन जाती है। किरेन रिजिजू ने कार्यक्रम के रिकॉर्डिंग सत्र में शामिल होकर न केवल मेजबानों सना खान और मुफ्ती अनस के साथ बातचीत की बल्कि रमज़ान के महत्व, सामाजिक सद्भाव और देश के बहुसांस्कृतिक ताने-बाने पर अपने विचार भी साझा किए।

केंद्रीय मंत्री ने X (पूर्व में Twitter) पर अपनी खुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि मुंबई के गोरे गांव स्थित फ्यूचर स्टूडियो में उन्होंने ‘रोनक-ए-रमजान’ के录ॉर्डिंग सत्र में भाग लिया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि कार्यक्रम का हिस्सा बनकर उन्हें अत्यंत आनंद और गर्व महसूस हुआ। उन्होंने खास तौर पर सना खान और मुफ्ती अनस के साथ हुई बातचीत का ज़िक्र करते हुए कहा कि चर्चा बेहद सकारात्मक, मननशील और प्रेरणादायक रही। मंत्री ने कार्यक्रम की भूमिका और उसके उद्देश्य को सराहा और कहा कि ऐसे मंच समाज में धार्मिक समझ, आपसी सम्मान और सद्भावना को मजबूत करते हैं।

याद दिलाने वाली बात यह है कि किरेन रिजिजू अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री होने के साथ-साथ हज व्यवस्थाओं की देखरेख भी करते रहे हैं। उन्होंने हज और उमराह को सरल, सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए सऊदी अरब के कई दौरे भी किए हैं। इस पवित्र यात्रा के प्रबंधन और धार्मिक यात्रियों की सुविधा में सुधार लाने के लिए उनके प्रयत्नों की प्रशंसा समय-समय पर होती रही है। इस पृष्ठभूमि ने ‘रोनक-ए-रमजान’ जैसे कार्यक्रम में उनके सम्मिलन को और भी ख़ास बना दिया है।

सोशल मीडिया पर सना खान की उपस्थिति पहले से ही काफी सक्रिय और प्रेरणादायक रही है। ग्लैमर की दुनिया से अलग हटकर उन्होंने अपनी ज़िंदगी को नए अर्थ दिए हैं। साल 2020 में उन्होंने फ़िल्म और टेलीविजन की चमक-दमक को पीछे छोड़ते हुए धार्मिक कारणों से अपने अभिनय करियर से संन्यास लेने का निर्णय लिया। उस फैसले ने न केवल उनके प्रशंसकों को हैरान किया बल्कि मनोरंजन जगत में भी गहरी चर्चा बनी। इसी साल 19 नवंबर को उसने गुजरात के इस्लामी विद्वान और व्यवसायी मुफ्ती सैयद अनस सैयद से शादी कर अपने निजी जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत की।

उनकी शादी को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे आलोचना के नजरिये से देखा तो कुछ ने उनके निर्णय का सम्मान भी किया। लेकिन एक बात साफ थी कि सना खान का यह कदम उनके जीवन के मूल्य और आत्मिक शांति की चाहत से प्रेरित था। वर्तमान में यह दंपती अपने दो बेटों, सैयद हसन जमील और सैयद तारिक जमील की परवरिश में जुटा है।

बॉलीवुड छोड़ने के बाद सना खान की आर्थिक स्थिति भी मज़बूत बनी रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उनकी कुल संपत्ति करोड़ों में है, जो उन्होंने अपने फिल्मी करियर और अन्य कलात्मक कार्यों के ज़रिये अर्जित की है। इसी आर्थिक स्थिरता और नई पहचान ने उन्हें एक मज़बूत मंच देने में मदद की है, जिससे वे अब धार्मिक और सामाजिक विषयों पर अपने विचार साझा कर सकती हैं।

‘रोनक-ए-रमजान’ सिर्फ एक हल्का-फ़ुल्का टॉक शो नहीं है। यह एक ऐसा मंच है जहाँ रमज़ान के चरित्र, आध्यात्मिकता, सामाजिक ज़िम्मेदारी और व्यक्ति के अंदर के बदलाव पर गहरी चर्चा होती है। सना खान ने जब इसे लांच किया तो उन्होंने इसे सिर्फ एक कार्यक्रम बताया। उन्होंने कहा कि यह उनके दिल का एक सपना था जो अब साकार हुआ है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर कहा कि रमज़ान का महीना बचपन से ही उनके दिल के बेहद करीब रहा है। सेहरी की शांत सुबह, इफ्तार की रोशनी और मस्जिदों में बिताए सुकून भरे लमहों की यादें उनके दिल में गहरे बसी हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि उनका मकसद इस शो के ज़रिये सिर्फ रमज़ान के बारे में बातचीत करना नहीं है बल्कि लोगों को इसकी आध्यात्मिक अनुभूति से भी जोड़ना है। इसी सोच के तहत शो में धार्मिक विषयों के अलावा आम जीवन की जटिलताओं, आत्मिक शांति की तलाश और सामाजिक भाईचारे जैसे मसलों पर भी चर्चा होती है। इस दौरान विभिन्न अतिथि अपने अपने अनुभव साझा करते हैं और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं।

मुफ्ती सैयद अनस सैयद का नाम भी कार्यक्रम की लोकप्रियता में अहम भूमिका निभाता है। वह गुजरात के सूरत के रहने वाले हैं और पेशे से एक सफल व्यवसायी होने के साथ-साथ एक जाने-माने इस्लामी विद्वान भी हैं। उनकी धार्मिक समझ और व्यावहारिक दृष्टिकोण ने ‘रोनक-ए-रमजान’ को एक संतुलित और सारगर्भित मंच बनाया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उनकी संपत्ति भी करोड़ों में है और उनकी व्यावसायिक सफलता तथा धार्मिक विद्वता दोनों ही उनके व्यक्तित्व को आकर्षक बनाती हैं।

जब सना खान और मुफ्ती अनस की संयुक्त संपत्ति की बात होती है तो यह एक मीडिया चर्चा का विषय भी बन चुकी है। कुल मिलाकर दोनों की संयुक्त संपत्ति के बारे में मीडिया में अनुमान लगाया जाता है, जो उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक कार्यों दोनों को मिलाकर एक बड़ा आर्थिक फ़ुटप्रिंट दर्शाती है।

रमज़ान के इस पवित्र महीने की शुरुआत ‘रोनक-ए-रमजान’ जैसे कार्यक्रमों के ज़रिये होती है, जिन्होंने मनोरंजन और धर्म के बीच एक सेतु का काम किया है। इस कार्यक्रम की लोकप्रियता ने यह दर्शाया है कि धर्म और मनोरंजन अगर सकारात्मक रूप से जुड़ें तो वह समाज में एक बेहतर समझ और सांस्कृतिक सम्मान भी पैदा कर सकते हैं।

केंद्रीय मंत्री का इस कार्यक्रम में शामिल होना इस दिशा की एक बड़ी मिसाल है। इससे यह संदेश मिलता है कि धार्मिक कार्यक्रम केवल आध्यात्मिकता तक सीमित नहीं रह जाते बल्कि वे सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक सम्मिलन और आपसी आदर को भी मजबूती देते हैं।

इस रमज़ान, ‘रोनक-ए-रमजान’ सिर्फ एक शो नहीं रह गया है। यह एक संवाद बन चुका है। एक ऐसा संवाद जो लोगों के दिलों में सवाल उठाता है। और उनकी आत्मा को सकारात्मक ऊर्जा से भरता है। यह रमज़ान सिर्फ रोज़े, दुआ और इबादत तक सीमित नहीं रहेगा। यह ‘रोनक-ए-रमजान’ के ज़रिये एक नए सोच, नए दृष्टिकोण और नए सामाजिक मानवीयताओं का भी माहौल बना रहा है।

और इसी सोच के साथ दर्शक, अनुयायी और सामान्य लोग इस कार्यक्रम को देख रहे हैं और उससे प्रेरणा ले रहे हैं। रमज़ान की रूहानियत और उसकी ख़ामोशियों को रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी उतारने की कोशिश कर रहे हैं। इस बार ‘रोनक-ए-रमजान’ ने दर्शकों को सिर्फ entertainment नहीं दिया। उसने उन्हें विचार दिया। उसने उन्हें सोचने को मजबूर किया। और सबसे बड़ी बात यह है कि इस सोच में एक केंद्रीय मंत्री का योगदान भी शामिल है।

रमज़ान का महीना जारी है और ‘रोनक-ए-रमजान’ हर रोज़ एक नया संदेश दे रहा है। यही इस कहानी की असली ख़ासियत है।