मुसलमानों के अधिकारों पर जमीयत की अहम बैठक, कई फैसले

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 24-09-2026
Jamiat holds crucial meeting on Muslim rights, several decisions taken
Jamiat holds crucial meeting on Muslim rights, several decisions taken

 

आवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की वर्किंग कमेटी की एक बेहद अहम बैठक राजधानी दिल्ली के केंद्रीय कार्यालय स्थित महमूदिया लाइब्रेरी में आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने की। बैठक में देश के अलग-अलग कोनों से वर्किंग कमेटी के प्रमुख सदस्य और पदाधिकारी शामिल हुए। इसमें मुख्य रूप से दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

बैठक के दौरान देश के मौजूदा हालात, संविधान की तरफ से दिए गए मौलिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, शरीयत के मामलों में कथित दखलअंदाजी और मस्जिदों तथा मदरसों जैसे धार्मिक स्थलों से जुड़े तमाम संवेदनशील मुद्दों पर लंबी चर्चा की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत में जमीयत के महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने पिछली बैठक की कार्यवाही पढ़कर सुनाई, जिसे बाद में सदन और अध्यक्ष द्वारा अधिकृत रूप से अनुमोदित किया गया।

कार्यसमिति ने देश के कई राज्यों में हो रही प्रशासनिक कार्रवाइयों पर गहरी चिंता व्यक्त की। विशेष तौर पर नागरिक और धार्मिक अधिकारों के हनन, मॉब लिंचिंग की घटनाओं, बुलडोजर एक्शन तथा मस्जिदों और मदरसों को गिराए जाने के मामलों पर गंभीर चिंता जताई गई।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इन तमाम गंभीर विषयों को देश के सर्वोच्च संवैधानिक स्तर पर उठाया जाएगा। इसके लिए देश के राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा जाएगा ताकि प्रभावित लोगों की शिकायतों और उनकी परेशानियों को उनके सामने रखा जा सके।

इसके साथ ही न्याय की प्राप्ति और संविधान के मूल सिद्धांतों की रक्षा के वास्ते उचित कानूनी और संवैधानिक मंचों का दरवाजा खटखटाने का भी फैसला किया गया।

बैठक खत्म होने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि सरकार की तरफ से की जा रही एकतरफा कार्रवाई और कई मामलों में प्रशासन का पक्षपातपूर्ण रवैया बेहद निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थितियों के कारण प्रभावित लोगों के लिए अदालतों के जरिए न्याय पाना और कानूनी रास्ते तलाशना काफी कठिन और सीमित होता जा रहा है।

मौलाना मदनी ने जोर देकर कहा कि यदि किसी एक खास समुदाय के खिलाफ लगातार एकतरफा कदम उठाए जाते हैं और प्रशासनिक अमला उन्हें संरक्षण देता है, तो यह पूरे देश के लिए बहुत चिंता का विषय बन जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समस्या किसी एक राज्य या शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से इस तरह की परेशान करने वाली घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि आम जनता और किसी विशेष समुदाय के मन में यह भावना घर कर जाए कि देश की न्यायिक व्यवस्था अब उन्हें समय पर प्रभावी कानूनी सुरक्षा और न्याय नहीं दे पा रही है, तो इसे किसी भी स्वस्थ समाज या राष्ट्र के लिए अच्छा नहीं माना जा सकता है।

ऐसी गंभीर परिस्थितियों के मद्देनजर जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने पूरी दृढ़ता के साथ सभी उपलब्ध संवैधानिक, कानूनी और लोकतांत्रिक रास्तों को अपनाने का पक्का इरादा किया है।

देश के मुसलमानों और आम जनता का हौसला बढ़ाते हुए मौलाना मदनी ने अपील की कि किसी भी परिस्थिति में लोगों को उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए और डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें अपने अधिकारों की यह लड़ाई पूरी हिम्मत, हौसला और लोकतांत्रिक तरीकों से लगातार जारी रखनी होगी।

उन्होंने अपने संबोधन में दोहराया कि यह देश हम सबका है और हम सब इस महान देश के बराबर के नागरिक हैं। अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा करना हमारा मौलिक अधिकार है। देश का संविधान हमें इन अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए कई तरह के रास्ते और अधिकार प्रदान करता है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद देश के कानून के दायरे में रहकर हरसंभव लोकतांत्रिक और कानूनी माध्यम का उपयोग करना जारी रखेगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में संगठन की आंतरिक मजबूती और रूपरेखा से जुड़े कई अन्य संगठनात्मक फैसले भी लिए गए।