आवाज द वाॅयस/नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने एक बड़ी पहल की है। उन्होंने ईद-उल-अज़हा यानी बकरीद के त्योहार को लेकर देश भर के मुसलमानों के लिए एक खास गाइडलाइन जारी की है। इस व्यापक एडवाइजरी में कुल बारह अहम बातें शामिल हैं।
इनका मुख्य मकसद देश में शांति, कानून व्यवस्था और साफ-सफाई का माहौल बनाए रखना है। मौलाना ने साफ शब्दों में कहा है कि त्योहार की खुशियों के बीच देश के कानून और दूसरों की सहूलियत का पूरा ध्यान रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
गाय की कुर्बानी पर पूरी तरह रोक
#WATCH | Lucknow | Lucknow Eidgah Imam, Maulana Khalid Rasheed Firangi Mahali says, "When there is a law against the slaughter of cows in the country, then it is illegal for all Indians to do so. In 1920, the Ulemas of Firangi Mahali issued a fatwa in this regard. Hence, there… pic.twitter.com/nADnRrvYyD
— ANI (@ANI) May 22, 2026
इस गाइडलाइन में सबसे ज्यादा जोर देश के कानून के सम्मान पर दिया गया है। मौलाना फरंगी महली ने मुस्लिम समाज से अपील की है कि वे गाय की कुर्बानी से पूरी तरह परहेज करें। उन्होंने याद दिलाया कि भारत के कानून में गोवंश के वध पर सख्त पाबंदी है।
हम सब अपने त्योहारों और रोज़मर्रा की जिंदगी में देश के संविधान और नियमों का पालन करते हैं। इसलिए ऐसी कोई भी बात नहीं होनी चाहिए जो देश के कानून के खिलाफ हो।मौलाना ने एक ऐतिहासिक तथ्य का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फरंगी महल के उलेमा ने आज से करीब सौ साल पहले यानी साल 1920में ही इस संबंध में एक फतवा जारी कर दिया था।
उस फतवे में साफ कहा गया था कि देश के मुसलमान कभी भी गाय की कुर्बानी न करें। न तो बकरीद के मौके पर और न ही किसी आम दिन में। इसलिए इस बार भी सिर्फ उन्हीं जानवरों की कुर्बानी दी जानी चाहिए जिन पर कानूनी रूप से कोई रोक नहीं है।
सार्वजनिक रास्तों पर नमाज पढ़ने से परहेज करें
एडवाइजरी का दूसरा सबसे बड़ा बिंदु नमाज की जगह को लेकर है। मौलाना ने मुस्लिम समुदाय से कहा है कि वे सड़कों, फुटपाथों या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर ईद की नमाज पढ़ने से बचें। अक्सर देखा जाता है कि भीड़ ज्यादा होने की वजह से लोग सड़कों पर सफें बिछा लेते हैं। इससे आम राहगीरों को आने-जाने में भारी परेशानी होती है।
उन्होंने निर्देश दिया है कि ईद की नमाज सिर्फ और सिर्फ ईदगाहों और मस्जिदों के परिसर के भीतर ही अदा की जाए। अगर किसी मस्जिद में जगह कम है तो वहाँ नमाज के दो जमात यानी दो अलग-अलग समय तय किए जा सकते हैं। इस कदम से न तो सड़कों पर जाम लगेगा और न ही किसी प्रशासनिक नियम का उल्लंघन होगा।
साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान
त्योहार के दौरान स्वच्छता बनाए रखना इस गाइडलाइन का एक और बेहद जरूरी हिस्सा है। मौलाना फरंगी महली ने कहा कि कुर्बानी के बाद साफ-सफाई का सबसे ज्यादा ख्याल रखना होगा। जानवरों के अवशेष या गंदगी को खुले में, नालियों में या सड़कों के किनारे बिल्कुल न फेंका जाए।
उन्होंने सलाह दी कि नगर निगम और स्थानीय नगर निकायों ने कचरा उठाने और उसे नष्ट करने के जो इंतजाम किए हैं, उनका पूरा सहयोग करें। गंदगी को सही तरीके से ठिकाने लगाना धार्मिक और नागरिक दोनों ही मोर्चों पर हमारी जिम्मेदारी है। खुले में अवशेष फेंकने से न सिर्फ बीमारियाँ फैलने का खतरा रहता है बल्कि इससे इलाके का माहौल भी खराब हो सकता है।
तय जगहों पर ही हो कुर्बानी की रस्म
अक्सर देखने में आता है कि लोग अपने घरों के बाहर या गलियों में ही कुर्बानी की रस्म पूरी कर लेते हैं। मौलाना ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि ऐसा करना पूरी तरह गलत है। कुर्बानी की प्रक्रिया सिर्फ उन्हीं जगहों पर की जानी चाहिए जो प्रशासन की तरफ से तय की गई हैं या जो निजी चारदीवारी के अंदर हों।
आम रास्तों, चौराहों या ऐसी जगहों पर जहाँ से हर धर्म के लोग गुजरते हैं, वहाँ यह काम बिल्कुल नहीं होना चाहिए। हमें इस बात का पूरा ख्याल रखना है कि हमारी किसी भी आदत या हरकत से हमारे पड़ोसियों या अन्ना गरिकों को कोई मानसिक या शारीरिक असुविधा न हो।
मुल्क की तरक्की और भीषण गर्मी से राहत के लिए दुआएं
इस साल बकरीद का त्योहार बेहद खास माहौल में आ रहा है। देश के कई हिस्से इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। मौलाना फरंगी महली ने इस स्थिति को देखते हुए एक और भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि नमाज मुकम्मल होने के बाद सभी मस्जिदों और ईदगाहों में देश की सलामती, तरक्की और खुशहाली के लिए विशेष दुआएं मांगी जाएं।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस वक्त पूरा देश मौसम की मार झेल रहा है। इसलिए खुदा से इस जानलेवा गर्मी से निजात पाने और अच्छी बारिश के लिए भी खास तौर पर हाथ उठाए जाएं। समाज में जो लोग आर्थिक तंगी या किसी भी तरह के संकट से गुजर रहे हैं, उनकी मुश्किलों को आसान करने के लिए भी सामूहिक प्रार्थना की जानी चाहिए।
गाइडलाइन के 12 मुख्य बिंदु
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया की तरफ से जारी इस एडवाइजरी की 12मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
1. सिर्फ उन्हीं पशुओं की कुर्बानी दी जाए जो कानूनन मान्य हैं।
2 .देश के कानून का सम्मान करते हुए गाय की कुर्बानी बिल्कुल न करें।
3.सड़कों या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर ईद की नमाज न पढ़ें।
4 . नमाज के लिए सिर्फ तयशुदा ईदगाहों और मस्जिदों के परिसर का इस्तेमाल करें।
5 . कुर्बानी की पूरी प्रक्रिया के दौरान सेहत और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें।
6 . जानवरों के अवशेष या गंदगी को भूलकर भी खुले में न फेंकें।
7 . कचरे को नगर निगम की गाड़ियों और तय नियमों के अनुसार ही ठिकाने लगाएं।
8 . इस रस्म को सिर्फ प्रशासन द्वारा निर्धारित या सुरक्षित बंद जगहों पर ही अंजाम दें।
9 .आम गलियों और रास्तों के किनारे ऐसी गतिविधियां न करें जिससे किसी को आपत्ति हो।
10 .नमाज के बाद देश की सुरक्षा, एकता और अखंडता के लिए विशेष प्रार्थना करें।
11.देश को झुलसा रही भीषण गर्मी और लू से राहत के लिए सामूहिक दुआ करें।
12 .देश की आर्थिक स्थिति की मजबूती और गरीबों के कल्याण के लिए प्रार्थना करें।
क्यों बदलती रहती है इस त्योहार की तारीख
इस्लाम में बकरीद को 'कुर्बानी का त्योहार' कहा जाता है। यह त्योहार हर साल इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने यानी ज़ुल-हिज्जा की 10तारीख को मनाया जाता है। यह वह समय भी होता है जब मक्का में सालाना हज यात्रा मुकम्मल होती है।
दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले अंग्रेजी कैलेंडर और इस्लामिक कैलेंडर में एक बड़ा अंतर होता है। अंग्रेजी कैलेंडर सूरज की चाल पर आधारित होता है जिसमें 365 दिन होते हैं। वहीं इस्लामिक कैलेंडर पूरी तरह चांद की चाल पर निर्भर करता है। चांद का यह साल अंग्रेजी साल के मुकाबले करीब 11 दिन छोटा होता है।
यही वजह है कि हर साल बकरीद की तारीख पिछले साल के मुकाबले करीब 11 दिन पीछे खिसक जाती है। तारीखें भले ही बदलती रहें, लेकिन इस त्योहार का मूल संदेश यानी त्याग, समर्पण और आपसी भाईचारा हमेशा एक जैसा रहता है। मौलाना की इस नई गाइडलाइन से उम्मीद है कि इस बार का त्योहार देश भर में बेहद शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न होगा।