बकरीद से पहले श्रीनगर की ईदगाह मंडी में बढ़ी बकरों की डिमांड

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 24-05-2026
Demand for Goats Rises at Srinagar's Eidgah Market Ahead of Bakrid
Demand for Goats Rises at Srinagar's Eidgah Market Ahead of Bakrid

 

श्रीनगर से तस्वीरें और रिपोर्ट बासित ज़रगर

श्रीनगर की मशहूर ईदगाह मंडी में इन दिनों सुबह से ही एक अलग सी हलचल दिखने लगी है। ईद-उल-अज़हा यानी बकरीद का त्योहार बेहद करीब है। कश्मीर घाटी के कोने-कोने से लोग यहाँ कुर्बानी के लिए पसंदीदा जानवर खरीदने आ रहे हैं। सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही बाज़ार में खरीदारों का आना शुरू हो जाता है। चारों तरफ भेड़ों और बकरों की म्याँ-म्याँ की आवाज़ें गूँज रही हैं। लोग जानवरों की सेहत और उनकी नस्ल को बहुत बारीकी से परख रहे हैं।

इसके बाद शुरू होता है खरीदार और व्यापारी के बीच मोलभाव का लंबा दौर। हर कोई अपने बजट के हिसाब से सबसे अच्छा जानवर घर ले जाना चाहता है। कश्मीर में इस त्योहार को लेकर हमेशा से ही एक अलग सा उत्साह रहता है। ईदगाह का यह विशाल मैदान अब एक बड़े अस्थायी पशु बाज़ार में बदल चुका है। यहाँ सिर्फ कश्मीर के ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों से आए व्यापारी भी डेरा डाले हुए हैं। बाज़ार का माहौल पूरी तरह से त्योहारी रंग में रंग गया है।

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देश के अलग-अलग कोनों से पहुँचे पशु व्यापारी

इस बार ईदगाह मंडी की रौनक देखते ही बनती है। कश्मीर के स्थानीय ज़िलों जैसे बडगाम, बांदीपोरा, गांदरबल और पुलवामा से तो व्यापारी आए ही हैं। इसके साथ ही राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों से भी बड़े व्यापारी यहाँ पहुँचे हैं। इन बाहरी व्यापारियों ने मैदान में अपने अस्थायी टेंट लगा लिए हैं। वे कई दिनों का लंबा सफ़र तय करके अपनी बेहतरीन नस्ल के बकरे और भेड़ें यहाँ लेकर आए हैं।

राजस्थान से आए एक व्यापारी मोहम्मद अली बताते हैं कि वे भेड़ों का एक बड़ा जत्था लेकर यहाँ पहुँचे हैं। उनका कहना है कि अब तक कश्मीर के लोगों का रिस्पॉन्स काफी अच्छा रहा है। लोग जानवरों को देखने आ रहे हैं। उन्हें पूरी उम्मीद है कि जैसे-जैसे ईद का दिन पास आएगा, उनकी सभी भेड़ें अच्छे दामों में बिक जाएंगी। बाज़ार में आई इस विविधता के कारण खरीदारों के पास भी अब कई विकल्प मौजूद हैं।

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महँगाई की मार और बढ़ती कीमतें

बाज़ार में रौनक तो है लेकिन इस बार महँगाई का असर भी साफ़ दिख रहा है। मंडी में जानवर खरीदने आए सौड़ा के रहने वाले मोहम्मद इसहाक मीर ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि इस साल जानवरों की कीमतें पिछले साल के मुकाबले काफी ज़्यादा हैं। कीमत पूरी तरह से जानवर की नस्ल, उसके आकार और उसकी सेहत पर निर्भर कर रही है। अभी बाज़ार में उतनी ज़्यादा भीड़ नहीं है जितनी ईद के दो दिन पहले होती है। लोग अभी आ रहे हैं और बाज़ार का मूड समझ रहे हैं।

एक और खरीदार ने बताया कि वे इस बार थोड़ी जल्दी बाज़ार आ गए हैं। इसका कारण यह है कि आखिरी दिनों में बहुत ज़्यादा भीड़ हो जाती है। तब अच्छी क्वालिटी के जानवर मनमुताबिक दामों पर मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है। जल्दी आने से तसल्ली से मोलभाव करने का मौका मिल जाता है।

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व्यापारियों का बढ़ा खर्च और मजबूरी

कीमतों में आई इस तेज़ी पर व्यापारियों का अपना पक्ष है। अनंतनाग के रहने वाले व्यापारी शब्बीर अहमद ने बताया कि इस साल उनके लिए भी मुश्किलें कम नहीं हैं। पिछले कुछ समय में ट्रांसपोर्ट का ख़र्च बहुत ज़्यादा बढ़ गया है।

इसके अलावा जानवरों के चारे और घास की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। दूसरे राज्यों से जब वे गाड़ियाँ भरकर जानवर लाते हैं, तो रास्ते का ख़र्च ही बहुत बैठ जाता है। इसी वजह से उन्हें इस बार जानवरों के दाम थोड़े बढ़ाकर बोलने पड़ रहे हैं। अगर वे पुरानी कीमतों पर बेचेंगे तो उन्हें अपनी जेब से नुकसान उठाना पड़ेगा।

पुंछ से अपनी भेड़ें बेचने आए अब्दुल राशिद खटाना कहते हैं कि लोग अभी सिर्फ खरीदारी नहीं कर रहे हैं। बहुत से परिवार ऐसे हैं जो पूरी मंडी का चक्कर काट रहे हैं। वे अलग-अलग स्टॉल्स पर जाकर कीमतों की तुलना कर रहे हैं। पिछले कुछ सालों में कुर्बानी के जानवर आम आदमी के बजट से बाहर होते जा रहे हैं। इसलिए लोग अपनी हैसियत देखकर ही अंतिम फ़ैसला ले रहे हैं।

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बच्चों के आने से माहौल हुआ खुशनुमा

इस भारी भरकम मोलभाव और व्यापार के बीच बाज़ार का एक बेहद ख़ूबसूरत पहलू भी देखने को मिल रहा है। मंडी में कई लोग अपने छोटे बच्चों को भी साथ लेकर आ रहे हैं। बच्चे रंग-बिरंगे और बड़े सींगों वाले बकरों को देखकर बेहद उत्साहित हो रहे हैं।

कुछ बच्चे जानवरों को अपने हाथों से घास खिलाते हुए नज़र आते हैं। बच्चों की इस मौजूदगी ने व्यापार के इस कड़े माहौल को थोड़ा हल्का और खुशनुमा बना दिया है। उनके चेहरे की ख़ुशी यह बताती है कि यह सिर्फ एक बाज़ार नहीं बल्कि एक त्योहार की तैयारी का उत्सव है।

बडगाम के एक पशु व्यापारी नज़ीर अहमद का कहना है कि अभी तो सीज़न की शुरुआत हुई है। इस्लामी महीना ज़िल हिज्जा शुरू हो चुका है। हर गुज़रते दिन के साथ यहाँ पैर रखने की जगह नहीं बचेगी। वीकेंड पर यानी शनिवार और रविवार को यहाँ सबसे ज़्यादा भीड़ होने की उम्मीद है।

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प्रशासन की तरफ से किए गए पुख्ता इंतज़ाम

मंडी में बढ़ती भीड़ और हज़ारों जानवरों की मौजूदगी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद है। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि व्यापारियों और खरीदारों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। मैदान में पानी की सप्लाई का उचित इंतज़ाम किया गया है। जानवरों के लिए चारे और हरी घास की दुकानें भी आसपास ही लगाई गई हैं ताकि व्यापारियों को दूर न जाना पड़े।

इसके साथ ही, इतने बड़े पैमाने पर हो रही भीड़ की वजह से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं। पुलिस बल और ट्रैफिक कर्मी ईदगाह के आसपास के रास्तों पर लगातार निगरानी रख रहे हैं। गंदगी से बचने के लिए साफ-सफाई की टीमें भी दिन में कई बार कचरा हटाने का काम कर रही हैं।

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सिर्फ ईदगाह ही नहीं, हर कोने में सजे स्टॉल

श्रीनगर की यह मुख्य ईदगाह मंडी तो आकर्षण का केंद्र है ही, इसके अलावा शहर के अन्य इलाकों में भी छोटे-छोटे अस्थायी स्टॉल लग गए हैं। शहर के डाउनटाउन इलाके से लेकर बाहरी हिस्सों तक में लोगों ने अपनी ज़मीनों या खाली प्लॉटों में बकरे और भेड़ें बेचना शुरू कर दिया है।

जिन लोगों के पास ईदगाह जाने का समय नहीं है, वे अपने घर के पास के इन स्टॉल्स से ही खरीदारी कर रहे हैं। पुलवामा के भेड़ विक्रेता बशीर अहमद कहते हैं कि असली रौनक तो ईद से ठीक दो-तीन दिन पहले दिखाई देगी, जब हर घर में कुर्बानी की तैयारी पूरी हो चुकी होगी। तब बाज़ार का टर्नओवर भी अपने चरम पर होगा। महँगाई की चिंता अपनी जगह है, लेकिन त्योहार की आस्था के आगे लोग थोड़ा समझौता करके भी अपनी परंपरा को निभा रहे हैं।