सऊदी अरब में मिली पहली सदी हिजरी की प्राचीन मस्जिद

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 17-09-2026
Ancient mosque dating back to the first century Hijri discovered in Saudi Arabia.
Ancient mosque dating back to the first century Hijri discovered in Saudi Arabia.

 

गुलाम कादिर

इन दिनों दुनिया भर के मुसलमानों की नजरें यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा मक्का के पास किए जा रहे हमलों और उससे पैदा हुई उथल-पुथल पर टिकी हुई हैं। इस भू-राजनीतिक तनाव और उठापटक के बीच सऊदी अरब से एक बेहद सुकून देने वाली और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं, लेकिन यह खोज हर मुसलमान और इतिहास प्रेमी को हैरान और प्रसन्न करने वाली है।

सऊदी अरब के हेरिटेज कमीशन ने अल-बाहा इलाके के अल-माल्लामा (Al-Maallamah) साइट पर खुदाई के दौरान पहली सदी हिजरी की एक प्राचीन मस्जिद का पता लगाया है। इस ऐतिहासिक खोज का सीधा संबंध इस्लाम के अंतिम पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब से जुड़ता है। यह खबर शुरुआती इस्लामी इतिहास के पन्नों को टटोलने वाले शोधकर्ताओं और आम लोगों के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है।

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यह सनसनीखेज खोज सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिम में स्थित अल-बाहा क्षेत्र के अल-अकीक (Al-Aqiq) गवर्नरेट में अल-माल्लामा साइट पर चल रही पुरातात्विक खुदाई के चौथे सीजन के दौरान सामने आई है।

सऊदी हेरिटेज कमीशन द्वारा इस प्राचीन स्थल के वीडियो भी साझा किए गए हैं, जिसमें इस ऐतिहासिक मस्जिद की बनावट और उस पर उकेरी गई नक्काशी साफ नजर आती है। इस मस्जिद की वास्तुकला और उसके इतिहास को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह शुरुआती दौर के इस्लामिक साम्राज्य और वास्तुकला शैली पर रोशनी डालती है।

इस मस्जिद की सबसे बड़ी खूबी इसकी क़िबला दीवार पर उकेरी गई वह इबारत है, जिसने दुनियाभर के इतिहासकारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस प्राचीन शिलालेख पर लिखा है, "सच्चे, चुने हुए और सबसे अच्छे व्यक्ति मुहम्मद, जो अब्दुल्ला के बेटे और अमीन हैं, उन पर अल्लाह की दुआएं और सलाम हो, जो दुनिया के मालिक और सच्चाई के खुदा हैं।"

इस संदेश का सीधा जुड़ाव पैगंबर मोहम्मद साहब से है, जो शुरुआती दौर की इस्लामिक संस्कृति और उस वक्त के लोगों की आस्था को बखूबी बयां करता है। इसके अलावा, सऊदी अरब के मदीना क्षेत्र के अल-महद गवर्नरेट में भी इसी तरह की पुरातात्विक खोजें की गई हैं।

कुछ समय पहले पुरातत्वविदों ने इसी क्षेत्र में इस्लाम के दूसरे खलीफा हजरत उमर बिन अल-खताब के नाम वाला एक दुर्लभ पत्थर का शिलालेख भी खोजा था, जिस पर लिखा था कि अल्लाह इस दुनिया और आखिरत में उमर बिन अल-खताब का रक्षक है। इन लगातार मिलती खोजों से अरब प्रायद्वीप के शुरुआती इतिहास और इस्लामिक विरासत के कई अनछुए पहलू सामने आ रहे हैं।

खुदाई में मिली इस प्राचीन मस्जिद का आकार 10 मीटर चौड़ा और 16 मीटर लंबा है। मस्जिद के दक्षिण-पूर्व कोने में एक चौकोर मीनार बनी हुई है और साथ ही अंदर एक खूबसूरत मिहराब भी मौजूद है।

इस मस्जिद की अंदरूनी दीवारों पर जिप्सम प्लास्टर के अवशेष आज भी सुरक्षित मिले हैं। इस मस्जिद की बनावट काफी दिलचस्प है, क्योंकि इसके मुख्य ढांचे के साथ कुल आठ सर्विस रूम या कमरे जुड़े हुए हैं।

मस्जिद में आने-जाने के लिए पूर्व, पश्चिम और दक्षिण दिशा में कुल तीन प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। खुदाई करने वाली टीम के एक विशेषज्ञ ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि इस मस्जिद की सबसे अनूठी विशेषता इसकी दीवारों पर मौजूद वे इस्लामी शिलालेख और कुरानी आयतें हैं, जो अंदरूनी और बाहरी दोनों हिस्सों में करीने से तराशी गई हैं। इसे देखकर उस दौर के शिल्पकारों की कला और दक्षता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

यह मस्जिद एक आवासीय इलाके के पश्चिमी हिस्से में स्थित है और इसे तराशकर निकाले गए ग्रेनाइट पत्थरों से मजबूती के साथ बनाया गया है। इसकी डिजाइन भले ही साधारण लगती है, लेकिन इसकी नपाई और सटीकता हैरान करने वाली है।

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उत्तर से दक्षिण की ओर यह लगभग 16 मीटर और पूरब से पश्चिम की ओर 10 मीटर के दायरे में फैली हुई है। इस मस्जिद के ठीक बगल में पत्थर के बने कुछ कमरे भी मिले हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि उनका इस्तेमाल सामाजिक और व्यावसायिक कामों के लिए किया जाता होगा। इन कमरों में स्टोरेज एरिया, पानी के बेसिन और उस दौर की निर्माण शैली के हिसाब से बनाए गए सपोर्ट पिलर भी शामिल हैं।

इस साइट पर केवल मस्जिद ही नहीं मिली, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली कई पुरानी चीजें भी बरामद हुई हैं। खुदाई के दौरान सोपस्टोन (खड़िया पत्थर) के टुकड़े, मिट्टी के बर्तन, अनाज पीसने वाले पत्थर, मूसल और चक्की के हिस्से मिले हैं।

इन चीजों से यह साफ पता चलता है कि उस जमाने में यहाँ एक सुव्यवस्थित मानवीय बस्ती आबाद थी। इसके अलावा, यहाँ से धातु के व्यापार के भी पुख्ता सबूत मिले हैं। शुरुआती दौर में सोने, चांदी और तांबे के अयस्क को निकालने और उन्हें परिष्कृत करने का काम यहाँ बड़े पैमाने पर होता था।

हेरिटेज कमीशन का कहना है कि अल-माल्लामा साइट उस दौर में धातु के व्यापार का एक बड़ा केंद्र बन चुकी थी, जहाँ शुरुआती इस्लामिक काल के व्यापारी, दस्तकार और कामगार बड़ी संख्या में आते-जाते थे।

मस्जिद और उसके आसपास मिली इन तमाम चीजों ने शुरुआती इस्लामिक युग के दौरान इस इलाके की धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर बहुत महत्वपूर्ण रोशनी डाली है। एक तरफ जहाँ मध्य पूर्व में युद्ध और तनाव की खबरें लोगों को परेशान करती हैं, वहीं सऊदी अरब के रेगिस्तानों से निकलकर आ रही ये ऐतिहासिक खोजें इंसानी सभ्यता और इतिहास के सुनहरे पन्नों को फिर से जीवंत कर रही हैं।

यह खोज न केवल इतिहास प्रेमियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि इस क्षेत्र की जमीन के नीचे सदियों पुराना इतिहास आज भी अपनी दास्तान सुनाने के लिए दबा हुआ है।