सुरेश कलमाड़ी का सफर: वायु सेना के पायलट से लेकर भारत के अग्रणी खेल प्रशासक तक

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 06-01-2026
Suresh Kalmadi's journey: From an Air Force pilot to India's leading sports administrator
Suresh Kalmadi's journey: From an Air Force pilot to India's leading sports administrator

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
सुरेश कलमाड़ी बेहद कुशल प्रशासक थे लेकिन इसके साथ ही उनका विवादों से भी नाता रहा और उन्हें हमेशा आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद वह दो दशक से अधिक समय तक विभिन्न भूमिकाओं में भारत के सबसे प्रभावशाली खेल प्रशासकों में से एक रहे।
 
भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के पूर्व अध्यक्ष कलमाड़ी का आज सुबह पुणे में निधन हो गया। वह बेहद करिश्माई व्यक्ति थे, जिनकी भारतीय खेलों पर पकड़ ने सफलता और विवाद दोनों को जन्म दिया।
 
मद्रास (अब चेन्नई) में 1944 में जन्मे कलमाड़ी ने पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज में पढ़ाई की। उन्होंने बाद में इस शहर का संसद में प्रतिनिधित्व किया।
 
लेकिन राजनीति में प्रवेश करने या खेल प्रशासन में आने से पहले कलमाड़ी ने 1964 से 1974 तक भारतीय वायु सेना में सेवा की। उन्होंने स्क्वाड्रन लीडर के रूप में सेवानिवृत्त होने से पहले वायुसेना में पहले एक कमीशन पायलट के रूप में और फिर एक प्रशिक्षक के रूप में काम किया।
 
शरद पवार की नजर उन पर पड़ी और उसके बाद उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ। उन्हें पुणे युवा कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया और बाद में उन्होंने संजय गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए।
 
अस्सी के दशक के उत्तरार्ध में कांग्रेस के विभाजन के बाद कलमाड़ी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ बने रहे तथा 1982, 1988, 1994 और 1998 में राज्यसभा के लिए चुने गए।
 
राज्यसभा सांसद के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान वह 1995 में पीवी नरसिम्हा राव सरकार में रेल राज्य मंत्री भी रहे।