नेशनल चैंपियन बना युवा शूटर जुहैर, अब लक्ष्य ओलंपिक

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 08-01-2026
After winning gold in national shooting, young Zuhair has set big goals.
After winning gold in national shooting, young Zuhair has set big goals.

 

नई दिल्ली
 
राष्ट्रीय स्तर पर ट्रैप शूटिंग में गोल्ड जीतने के बाद 20 वर्षीय जुहैर खान अब अपने करियर के लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित कर चुके हैं। यह जीत उनके लिए केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके वर्षों के संघर्ष और मेहनत का प्रतीक भी है।

पिता से मिली प्रेरणा और शूटिंग का सफर

जुहैर का शूटिंग से लगाव उनके पिता बाबर खान से शुरू हुआ, जो स्वयं राष्ट्रीय स्तर के शॉटगन शूटर हैं। छोटे जुहैर ने अपने पिता के साथ शूटिंग रेंज जाना शुरू किया और वहीं इस खेल के प्रति उनका आकर्षण बढ़ा।जुहैर ने बताया,
“जब मैं शूटिंग रेंज गया, तो मैं खेल से बहुत प्रभावित हुआ। मैंने सोचा, ‘चलो इसे एक बार आजमाया जाए,’”
 
12 साल की उम्र में उन्होंने ट्रैप शूटिंग शुरू की और तब से लगातार प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं। हालांकि शुरुआत में कुछ चुनौतियाँ आईं। 13 साल की उम्र में फुटबॉल खेलते हुए उनका कॉलरबोन फ्रैक्चर हो गया, जिसके कारण उन्हें अपनी पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता छोड़नी पड़ी। इसके अलावा COVID-19 महामारी के दौरान भी उनका खेल बाधित हुआ।
 
“एक साल कॉलरबोन चोट और एक साल COVID-19 के कारण गया, लेकिन इसके अलावा मैं लगातार करणी सिंह शूटिंग रेंज में ट्रेनिंग करता रहा,” उन्होंने साझा किया।
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राष्ट्रीय स्तर पर मेहनत का रंग

जुहैर पहले भी तीन बार राष्ट्रीय फाइनल में पहुंचे थे, लेकिन हर बार जीत हाथ नहीं लगी। इस बार हालात बदल गए। उन्होंने वरिष्ठ राष्ट्रीय चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर अपने सपनों को साकार किया।जुहैर ने बताया,“यह मेरा पहला सीनियर नेशनल मेडल है। जूनियर कैटेगरी में मेरे पास दो ब्रॉन्ज़ मेडल हैं। पहले भी मैं फाइनल तक पहुंचा था, लेकिन इस बार मुझे जीत मिली.” 
 
इस जीत के साथ ही जुहैर ने देश के कुछ अनुभवी और ओलंपिक खिलाड़ी शूटरों को पछाड़ते हुए ट्रैप शूटिंग में खुद को एक नई ताकत के रूप में स्थापित किया है।
 
शैक्षणिक और खेल जीवन का संतुलन

जुहैर फिलहाल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में बी.टेक के तीसरे वर्ष के छात्र हैं। उन्होंने बताया कि शैक्षणिक और खेल जीवन को संतुलित करना आसान नहीं है, लेकिन उन्होंने इसे संतुलित करने का तरीका ढूंढ लिया है।जुहैर ने बताया,“जब कॉलेज में एग्ज़ाम होते हैं, तब मेरी पूरी फोकस पढ़ाई पर होती है। और जब शूटिंग प्रतियोगिताएं होती हैं, तब मैं दिल्ली में हूं,” उन्होंने कहा।
 
अंतरराष्ट्रीय अनुभव और भविष्य की योजनाएँ

पिछले कुछ वर्षों में जुहैर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनुभव प्राप्त किया। 2024 में उन्होंने पेरू में विश्व चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व किया। इस साल उन्होंने दो अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेले — पहले जर्मनी के सुल्ह में वर्ल्ड कप और फिर कजाकिस्तान में एशियाई चैम्पियनशिप में जूनियर कैटेगरी में हिस्सा लिया।
 
राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 120 का स्कोर उनके लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहा। “मैंने इस बार नेशनल्स में 120 का स्कोर किया। इससे पहले 2024 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स में भी मैंने 120 का स्कोर कर गोल्ड जीता था,” जुहैर ने साझा किया।
 
अगला बड़ा लक्ष्य ISSF वर्ल्ड कप में अच्छा प्रदर्शन करना है, जो अप्रैल में काहिरा में होगा। लंबे समय में उनका सपना 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में भाग लेने का है।
 
कोचिंग और प्रशिक्षण

जुहैर के कोच, रहान रिज़वी, उनके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वह वर्तमान में नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE) में जूनियर नेशनल स्क्वाड के साथ प्रशिक्षण लेते हैं।जुहैर ने बताया,“मेरे व्यक्तिगत कोच, रहान रिज़वी, मेरी प्रगति में बहुत मदद कर रहे हैं। मैं ज्यादातर गुरुवार से रविवार तक ट्रेनिंग करता हूं। बाकी दिनों में कॉलेज के लिए अलीगढ़ में रहना पड़ता है, इसलिए काफी यात्रा करनी पड़ती है.” 
 
खेल के अलावा fallback योजना

जुहैर ने यह भी माना कि यदि खेल में करियर सफल नहीं होता, तो उनके पास बैकअप योजना होनी चाहिए। इसीलिए वह भविष्य में MBA या M.Tech करने की सोच रहे हैं।जुहैर ने बताया,“मुझे अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मैं किस दिशा में जाऊंगा, लेकिन हां, MBA या M.Tech — ये दोनों विकल्प हैं.” 
 
फुटबॉल से जुड़ी बचपन की यादें

जुहैर फुटबॉल खेलना भी पसंद करते हैं, जो उनकी बचपन की एक खास खेल भावना है और जिस खेल में उन्हें कॉलरबोन की चोट भी आई थी।उनकी कहानी यह दर्शाती है कि समर्पण, मेहनत और सही मार्गदर्शन से युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना मुकाम बना सकते हैं।