आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
क्रिकेटर से नेता बने हरभजन सिंह ने कहा कि उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) छोड़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का फैसला इसलिए किया, क्योंकि वह ‘आप’ में अपनी बात न सुने जाने से हताश थे। उन्होंने कहा कि पंजाब में नशे की बढ़ती समस्या को लेकर ‘आप’ को बहुत से सवालों के जवाब देने हैं।
हरभजन ने यहां ‘पीटीआई’ मुख्यालय में दिए गए पॉडकास्ट साक्षात्कार में ‘आप’ छोड़ने के फैसले के बाद जालंधर स्थित उनके आवास के बाहर हुए जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन के बारे में भी बात की।
‘आप’ ने हरभजन को 2022 में राज्यसभा भेजा था। हालांकि, इस साल अप्रैल में उन्होंने पार्टी के छह अन्य नेताओं के साथ भाजपा का दामन थाम लिया।
हरभजन ने कहा, “जब ( पंजाब के मुख्यमंत्री) भगवंत मान ने मुझसे ‘आप’ में शामिल होने के लिए कहा था, तो इसका मकसद राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व करना और खेलों से जुड़े मुद्दे उठाना था। मैंने तभी साफ कर दिया था कि मैं सिर्फ खेलों के बारे में बात करूंगा और राजनीति पर चर्चा नहीं करूंगा, क्योंकि यह मेरा काम नहीं है।”
उन्होंने कहा, “मेरे ‘आप’ से जुड़ने की एकमात्र वजह यह थी कि इससे मुझे न सिर्फ पंजाब में, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी खेलों को बढ़ावा देने का मौका मिल रहा था। लेकिन जब मैंने अपने विचार रखने की कोशिश की, तो पार्टी में मेरी बात नहीं सुनी गई। मेरे विचार बस विचार ही बनकर रह गए।”
हरभजन ने कहा कि पार्टी के सामने अपना नजरिया रखने की तमाम कोशिशों के बावजूद लगातार दरकिनार किए जाने से आखिरकार वह तंग आ गए।
उन्होंने कहा, “...मैं जिस काम के लिए ‘आप’ में शामिल हुआ था, वह हो ही नहीं रहा था। अगर मेरे सुझाए रास्ते पर एक छोटा-सा कदम भी उठाया गया होता तो मैं पार्टी नहीं छोड़ता। लेकिन पार्टी में शामिल होने का मेरा मकसद ही पूरा नहीं हो रहा था। इसीलिए मैंने पार्टी छोड़ दी, क्योंकि मेरे सुझावों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा था।”