अंताल्या (तुर्किये)।
भारत के युवा तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा और 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड़ ने आर्चरी वर्ल्ड कप 2026 के तीसरे चरण में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के लिए स्वर्णिम इतिहास रच दिया। तुर्किये के अंताल्या में आयोजित प्रतियोगिता के अंतिम दिन भारत ने दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए, जिसमें धीरज ने पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग का गोल्ड जीता, जबकि कुमकुम के साथ मिलकर रिकर्व मिश्रित टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक हासिल किया।
24 वर्षीय धीरज बोम्मादेवरा ने पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व फाइनल में दक्षिण कोरिया के ओलंपिक कांस्य पदक विजेता ली वू-सियोक को 7-3 से हराकर अपने करियर का पहला आर्चरी वर्ल्ड कप स्वर्ण पदक जीता। यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक रही क्योंकि वर्ष 2021 में अतनु दास के बाद किसी भारतीय पुरुष तीरंदाज ने पहली बार वर्ल्ड कप चरण में व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग का स्वर्ण पदक अपने नाम किया है।
धीरज का सफर आसान नहीं रहा। सेमीफाइनल में वह जर्मनी के मोरित्ज़ वीजर के खिलाफ 3-1 से पीछे चल रहे थे, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए मुकाबला 6-4 से जीत लिया। इस जीत के साथ उनके करियर में वर्ल्ड कप का यह चौथा पदक जुड़ गया। इससे पहले वह तीन कांस्य पदक जीत चुके थे, लेकिन स्वर्ण पदक की कमी अब पूरी हो गई।
प्रतियोगिता के दौरान धीरज ने 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड़ के साथ मिलकर एक और बड़ी सफलता हासिल की। भारतीय जोड़ी ने रिकर्व मिश्रित टीम फाइनल में शीर्ष वरीयता प्राप्त दक्षिण कोरिया की ओह येजिन और किम जे-देओक की जोड़ी को 5-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया। यह जीत भारत के लिए बेहद खास रही क्योंकि वर्ल्ड कप के इतिहास में केवल तीसरी बार किसी भारतीय मिश्रित रिकर्व जोड़ी ने स्वर्ण पदक जीता है।
इससे पहले वर्ष 2021 में दीपिका कुमारी और अतनु दास ने पेरिस में तथा 2022 में तरुणदीप राय और रिद्धि ने अंताल्या में भारत को यह उपलब्धि दिलाई थी। अब धीरज और कुमकुम ने इस गौरवशाली सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया है।
कुमकुम मोहोड़ के लिए यह लगातार दूसरा शानदार प्रदर्शन रहा। इससे पहले शंघाई में आयोजित वर्ल्ड कप के पिछले चरण में वह भारतीय महिला रिकर्व टीम का हिस्सा थीं, जिसने स्वर्ण पदक जीता था। उनकी निरंतर सफलता भारतीय तीरंदाजी के उज्ज्वल भविष्य का संकेत मानी जा रही है।
हालांकि अन्य रिकर्व स्पर्धाओं में भारत को निराशा हाथ लगी। कीर्ति, अंकिता भकत और कुमकुम की महिला टीम मेजबान तुर्किये से हारकर क्वार्टर फाइनल में बाहर हो गई, जबकि पुरुष टीम अमेरिका के खिलाफ दूसरे दौर में हार गई। महिला व्यक्तिगत वर्ग में दीपिका कुमारी भारत की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहीं और प्री-क्वार्टर फाइनल तक पहुंचीं।
कंपाउंड वर्ग में भी भारतीय टीम पदक जीतने में सफल नहीं हो सकी। साहिल जाधव, कुशल दलाल और गणेश मणि रत्नम तिरुमुरु की पुरुष टीम कांस्य पदक मुकाबले में मेक्सिको से केवल एक अंक से हार गई। इससे पहले सेमीफाइनल में उसे अंततः चैंपियन बनी चीन की टीम ने हराया था।
अंताल्या में आयोजित यह प्रतियोगिता चार चरणों वाली आर्चरी वर्ल्ड कप श्रृंखला का तीसरा और अंतिम से पहले का चरण था। अब अगले महीने मैड्रिड में होने वाला अंतिम चरण भारतीय तीरंदाजों के लिए इस शानदार प्रदर्शन को आगे बढ़ाने का बड़ा अवसर होगा।