आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर ग्रीम स्वान ने इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) द्वारा खिलाड़ियों पर आधी रात का कर्फ्यू लागू किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि कप्तान बेन स्टोक्स उस माहौल के शिकार बने हैं, जहां किसी उपलब्धि का उत्सव मनाने के बजाय खिलाड़ियों की निगरानी को अधिक महत्व दिया जा रहा है।
स्टोक्स सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में अपने साथी खिलाड़ी गस एटकिंसन के साथ एक नाइटक्लब में जश्न मनाते दिखाई दिए। इन दोनों खिलाड़ियों की मौजूदगी में सारासेन्स अकादमी के रग्बी खिलाड़ी टोतोआ औवा से जुड़ा एक विवाद भी सामने आया।
स्वान का मानना है कि न्यूजीलैंड पर 115 रन की शानदार जीत के बाद इंग्लैंड का ध्यान गलत मुद्दे पर चला गया।
स्वान ने ‘पीटीआई’ से कहा, ‘‘इस मामले को लेकर मेरे विचार मिश्रित हैं। मैं एक पूर्व खिलाड़ी हूं और मैं कभी यह नहीं मानूंगा कि कर्फ्यू लगाना अच्छी बात है। ऐसा नियम बनाना ही बेतुका है।’’
पूर्व ऑफ स्पिनर ने कहा कि कर्फ्यू लागू करते समय ड्रेसिंग रूम की वास्तविक परिस्थितियों को नजरअंदाज कर दिया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘ईसीबी ने संभवतः अपनी सार्वजनिक छवि सुधारने के उद्देश्य से यह कदम उठाया, लेकिन यह तरीका कारगर नहीं हो सकता। मुझे लगता है कि ईसीबी को यह समझना चाहिए कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था।’’
स्वान ने कहा कि प्रतिबंध लगाने के बजाय बेहतर होता कि ईसीबी टीम संस्कृति पर खुलकर चर्चा करता।
उन्होंने कहा, ‘‘बेहतर होता कि टीम संस्कृति पर खुलकर चर्चा की जाती और यह तय किया जाता कि आगे कैसे बढ़ना है। टेस्ट मैच जीतने के बाद आधी रात का कर्फ्यू लगा देना उचित नहीं है। जिस दिन खिलाड़ियों को अपने देश के लिए टेस्ट जीतने का जश्न मनाने से रोका जाए, वह खेल के लिए दुखद दिन है।’’
उन्होंने स्पष्ट किया कि समस्या खिलाड़ी में नहीं, बल्कि नियम में है।
स्वान ने कहा, ‘‘मेरे विचार से बेन स्टोक्स ने कोई गलती नहीं की। उन्होंने अगर कुछ किया भी है तो सिर्फ ऐसे नियम का उल्लंघन किया है, जिसे लागू ही नहीं किया जाना चाहिए था।’’
कप्तान होने के नाते स्टोक्स की जिम्मेदारियों को लेकर उठ रही आलोचनाओं पर स्वान ने टिप्पणी करने से इनकार किया।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पूरी घटना की वास्तविक जानकारी नहीं है। किसी के पास भी इसकी पूरी जानकारी नहीं है, ऐसे में मैं इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दूंगा।’’
स्वान का मानना है कि खिलाड़ियों के साथ वयस्कों जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए और उन पर सामान्य समझदारी से काम लेने का भरोसा किया जाना चाहिए।