गुवाहाटी
भारतीय लेग स्पिनर रवि बिश्नोई का मानना है कि पिछले एक साल में की गई कड़ी मेहनत, आत्ममंथन और गेंदबाज़ी की लेंथ पर नियंत्रण ने उन्हें न सिर्फ अप्रत्याशित मौका दिलाया, बल्कि टी20 वर्ल्ड कप की दावेदारी भी फिर से ज़िंदा कर दी है। आईपीएल में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम से बाहर चल रहे बिश्नोई के लिए यह वापसी आसान नहीं थी, लेकिन उन्होंने हालात को अपने पक्ष में मोड़ लिया।
बिश्नोई ने पिछले आईपीएल सीज़न को याद करते हुए कहा कि लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए खेलते हुए वह 11 मैचों में सिर्फ 9 विकेट ही ले पाए थे और उनका औसत 44 से ज़्यादा रहा। इस खराब प्रदर्शन का असर टीम पर भी पड़ा और वह प्लेऑफ में जगह नहीं बना सकी। इसके बाद फ्रेंचाइज़ी ने उन्हें रिलीज़ कर दिया, लेकिन इस साल नीलामी में राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें 7.20 करोड़ रुपये में खरीदकर नया मौका दिया।
25 वर्षीय लेग स्पिनर ने स्वीकार किया,“पिछले एक साल में मैंने सबसे ज़्यादा काम अपनी लेंथ पर किया। आईपीएल के पिछले सीज़न में मेरी लाइन और लेंथ पर नियंत्रण नहीं था, इसलिए चीज़ें मुश्किल हो गई थीं। इसके बाद मैंने स्टंप्स पर 5-6 मीटर की लेंथ पर गेंदबाज़ी पर ध्यान दिया, क्योंकि उस लेंथ से बल्लेबाज़ के लिए शॉट खेलना मुश्किल होता है।”
बिश्नोई ने भारत के लिए आखिरी बार फरवरी 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था। मौजूदा न्यूज़ीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज़ के लिए वह शुरुआती योजना का हिस्सा नहीं थे, लेकिन वॉशिंगटन सुंदर के चोटिल होने के बाद उन्हें टीम में शामिल किया गया। भारत के पास पहले से ही अक्षर पटेल, वरुण चक्रवर्ती, कुलदीप यादव जैसे स्थापित स्पिनर मौजूद हैं, ऐसे में मौके सीमित थे।
हालांकि, बिश्नोई ने तीसरे टी20 मैच में मिले मौके को दोनों हाथों से लपका। उन्होंने कसी हुई गेंदबाज़ी करते हुए 2/18 के आंकड़े दर्ज किए और खतरनाक मार्क चैपमैन (32) व ग्लेन फिलिप्स (48) को आउट कर न्यूज़ीलैंड की मध्यक्रम की कमर तोड़ दी। उनकी सटीक लेंथ और हवा में रफ्तार के चलते मेहमान टीम 153/9 तक ही सिमट गई, जिसे भारत ने सिर्फ 10 ओवर में हासिल कर 3-0 की अजेय बढ़त बना ली।
बिश्नोई ने कहा,“जब आप टीम से बाहर होते हैं तो लगता है कि आपको वहां होना चाहिए। लेकिन इस समय का मैंने सही इस्तेमाल किया—घरेलू क्रिकेट खेला, खुद पर काम किया।” उन्होंने विजय हज़ारे ट्रॉफी, सैयद मुश्ताक अली टी20 और रणजी मैचों में खेलकर लय हासिल की, जहां सैयद मुश्ताक अली में उन्होंने 7 मैचों में 9 विकेट लिए।
उन्होंने स्वीकार किया कि वापसी के मौके पर घबराहट और उत्साह दोनों थे, लेकिन नियंत्रण और अनुशासन ने मदद की। बिश्नोई ने भारतीय बल्लेबाज़ी की भी तारीफ की, खासकर अभिषेक शर्मा की, जिनकी आक्रामक बल्लेबाज़ी के दम पर मैच जल्दी खत्म हो गया।बिश्नोई के लिए यह प्रदर्शन संकेत है कि मेहनत और धैर्य से वापसी मुमकिन है—और टी20 वर्ल्ड कप की दौड़ में वह फिर से मजबूती से शामिल हो चुके हैं।




