Riohlang Dhar: Indian referee at the FIFA U-20 World Cup
मलिक असगर हाशमी
भारतीय फुटबॉल प्रेमियों के लिए एक बेहद गर्व करने वाली खबर है। इस साल सितंबर में पोलैंड में होने जा रहे फीफा अंडर 20 महिला विश्व कप के लिए भारत की एक बेटी का चयन हुआ है। ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन यानी एआईएफएफ ने सोशल मीडिया पर इस बात की आधिकारिक घोषणा की है। इस बड़े टूर्नामेंट के लिए फीफा ने दुनिया भर से जिन 38 चुनिंदा मैच रेफरी और असिस्टेंट रेफरी पैनल को शॉर्टलिस्ट किया है, उसमें भारत से मेघालय की रियोहलांग धर का नाम भी शामिल है। यह खबर भारतीय फुटबॉल जगत में एक नई ऊर्जा भरने वाली है।
यह बात सही है कि पुरुषों के फीफा वर्ल्ड कप की तरह महिलाओं के इस अंडर 20 वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने वाली 24 टीमों में भारत की टीम शामिल नहीं है। मैदान पर हमारी टीम भले ही न खेल रही हो, लेकिन भारत की इस कमी को रियोहलांग धर रेफरी के रूप में पूरा करेंगी।
वह मैदान पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। उनकी यह कामयाबी देश की उन तमाम लड़कियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो खेल की दुनिया में अपना करियर बनाना चाहती हैं। आइए जानने की कोशिश करते हैं कि मेघालय पुलिस में काम करने वाली एक साधारण महिला कैसे अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल पटल पर रेफरी के रूप में इस मुकाम तक पहुंची।
रियोहलांग धर का सफर और उनकी बड़ी उपलब्धियां
छत्तीस साल की रियोहलांग धर मूल रूप से मेघालय की रहने वाली हैं। वह फीफा क्वालिफाइड असिस्टेंट रेफरी हैं जो पिछले कई सालों से लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं। यह उनके करियर का कोई पहला बड़ा मौका नहीं है।
इससे पहले साल 2024 में डोमिनिकन रिपब्लिक में आयोजित अंडर 17 महिला विश्व कप में भी उन्होंने अंपायरिंग की थी। रियोहलांग धर भारत की दूसरी ऐसी महिला रेफरी हैं जिन्हें किसी फीफा विश्व कप में मैच ऑफिशियल बनने का गौरव मिला है। उनसे पहले यह कारनामा केवल उवेना फर्नांडीस ही कर पाई थीं।
रियोहलांग ने पिछले कुछ सालों में कई बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में अपनी काबिलियत साबित की है। साल दो हजार चौबीस में उन्हें इंडोनेशिया में हुए एएफसी अंडर 17 महिला एशियन कप में भी मैच ऑफिशियल के तौर पर नियुक्त किया गया था।
इसके बाद उन्होंने चीन में आयोजित इसी टूर्नामेंट में शानदार तरीके से अंपायरिंग की जिम्मेदारी संभाली थी। रियोहलांग के इसी शानदार खेल प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें इस साल जनवरी में खेलों के क्षेत्र में प्रतिष्ठित यू कियांग नांगबाह अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। वह खेल के मैदान के साथ-साथ पुलिस विभाग में भी अपनी सेवाएं पूरी निष्ठा के साथ दे रही हैं।
जब दिवाली की रात रियोहलांग ने रचा था इतिहास
रियोहलांग धर की लगन और मेहनत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब पूरा भारत दिवाली के जश्न में डूबा हुआ था, तब वह सात समंदर पार देश का नाम रोशन कर रही थीं। डोमिनिकन रिपब्लिक में अंडर 17 महिला विश्व कप के दौरान उन्होंने स्पेन और इंग्लैंड के बीच हुए बेहद महत्वपूर्ण सेमीफाइनल मैच में रेफरी की भूमिका निभाई थी। उस मैच में स्पेन ने इंग्लैंड को तीन शून्य से हराया था। भारतीय समय के अनुसार जब यह मैच चल रहा था, तब भारत में लोग सो रहे थे या दिवाली मना रहे थे।
इस ऐतिहासिक पल के बाद रियोहलांग ने बेहद सादगी से कहा था कि वह खुश हैं कि वह अपने छोटे से तरीके से भारतीय फुटबॉल को दिवाली का यह खूबसूरत तोहफा दे सकीं। वह अपनी सफलताओं का ढिंढोरा पीटना पसंद नहीं करती हैं।
उनकी सादगी ही उनकी सबसे बड़ी पहचान है। उस विश्व कप में रियोहलांग धर, जापान की रेफरी असाका कोइजुमी और यूएई की अमल बधाफारी की तीन सदस्यीय टीम पूरे टूर्नामेंट में सबसे व्यस्त रहने वाले ऑफिशियल्स में से एक थी। उन्होंने ग्रुप स्टेज में स्पेन बनाम अमेरिका और मेजबान डोमिनिकन रिपब्लिक बनाम न्यूजीलैंड जैसे हाई-प्रेशर मैचों को बहुत ही शानदार तरीके से संभाला था।
🇮🇳 Another FIFA appointment for Riiohlang Dhar! 🙌
The Indian FIFA Assistant Referee has been selected as a match official for the FIFA U20 Women’s World Cup Poland 2026. 🇵🇱
After officiating at the FIFA U17 Women’s World Cup 2024, this will be the second FIFA tournament… pic.twitter.com/yuAqgwuFIB
चुनौतियों से भरा रहा है अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का रास्ता
रियोहलांग के लिए इस मुकाम तक पहुंचना इतना आसान नहीं था। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की है और कई बड़ी कुर्बानियां दी हैं। डोमिनिकन रिपब्लिक पहुंचने की उनकी कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लगती है।
उन्होंने बताया था कि उनका सफर मेघालय के शिलांग से गुवाहाटी तक कार से शुरू हुआ था। गुवाहाटी से उन्होंने दिल्ली की फ्लाइट ली और फिर दिल्ली से इस्तांबुल की उड़ान भरी। इस्तांबुल में उनकी अगली कनेक्टिंग फ्लाइट लेट हो गई। जब वह पनामा पहुंचीं, तो उनकी आगे की तय फ्लाइट छूट चुकी थी।
इस वजह से रियोहलांग को पनामा एयरपोर्ट पर लगातार चौदह घंटे बिताने पड़े। उस समय एयरपोर्ट पर सारी दुकानें और फूड काउंटर बंद थे। उनके पास न तो सोने की जगह थी और न ही खाने के लिए कुछ था।
लगभग तीन दिनों के इस थका देने वाले सफर के बाद वह आखिरकार सांतो डोमिंगो पहुंचीं। वहां पहुंचने के बाद वह केवल तीन घंटे ही सो सकीं क्योंकि उन्हें तुरंत स्पेन और अमेरिका के मैच की ट्रेनिंग के लिए रिपोर्ट करना था। इन तमाम दिक्कतों के बाद भी उनके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती है और वह हर चुनौती का हंसकर सामना करती हैं।
मेरिट और काबिलियत के दम पर आगे बढ़ रही हैं महिला रेफरी
पोलैंड में होने वाले फीफा अंडर 20 महिला विश्व कप में चयन होने के बाद रियोहलांग ने एक इंटरव्यू में अपने विचार साझा किए। उनका मानना है कि टॉप लेवल के फुटबॉल में महिला रेफरी की बढ़ती संख्या यह दिखाती है कि अब खेल की दुनिया में केवल काबिलियत को तवज्जो दी जा रही है।
उन्होंने अमेरिका की टोरी पेंसो और मेक्सिको की काटिया इटजेल गार्सिया का उदाहरण दिया जिन्होंने पुरुषों के फीफा क्लब वर्ल्ड कप में अंपायरिंग करके इतिहास रचा है। फ्रांस की स्टेफनी फ्रैपार्ट के बाद ये महिलाएं पुरुषों के सीनियर टूर्नामेंट में अंपायरिंग करने वाली चुनिंदा नाम बन चुकी हैं।
रियोहलांग कहती हैं कि जब हम इन महिलाओं को इतने बड़े स्तर पर रेफरी की भूमिका निभाते देखते हैं, तो हमें गर्व महसूस होता है। इससे यह साफ संदेश जाता है कि महिलाएं फुटबॉल जगत में किसी भी जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकती हैं।
समय बदल रहा है और उन्हें उम्मीद है कि इस बदलाव को देखकर भारत और दुनिया की और भी महिलाएं खुद पर भरोसा करेंगी। वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे आएंगी।
मेघालय पुलिस और स्थानीय फुटबॉल क्लबों का मिला सहयोग
एक अंतरराष्ट्रीय रेफरी के लिए अपनी फिटनेस और तकनीकी मानकों को बनाए रखना सबसे जरूरी होता है। रियोहलांग के लिए यह काम कभी बोझ नहीं रहा क्योंकि वह फुटबॉल से बेहद प्यार करती हैं। वह खेल के हर नए नियम और तकनीक से खुद को अपडेट रखती हैं।
इस सफर में उन्हें अपनी फैमिली, दोस्तों और मेघालय पुलिस डिपार्टमेंट से पूरा सपोर्ट मिला। रियोहलांग ने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन और मेघालय फुटबॉल एसोसिएशन का भी शुक्रिया अदा किया।
शिलांग जैसे शहर में बड़े और खुले मैदानों की काफी कमी है। इसके बावजूद मावलई मदानदेह और रैटसन एरिना फुटबॉल ग्राउंड्स ने उन्हें अपनी ट्रेनिंग सुविधाएं इस्तेमाल करने की अनुमति दी। वहां के स्थानीय फुटबॉल क्लबों ने उनकी तैयारी में हर संभव मदद की।
रियोहलांग का कहना है कि इन सभी के सहयोग के बिना उनका यहां तक पहुंचना नामुमकिन था। पोलैंड का यह टूर्नामेंट उनके लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसके लिए वह पूरी तरह तैयार हैं। वह हर मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए उत्सुक हैं।