आवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली/ भोपाल
मध्य प्रदेश की राजनीति में इस समय एक महिला राजनेता की खूब चर्चा हो रही है। इनका नाम बिलकिस जहां है। वह भारतीय जनता पार्टी की नवनिवुक्त मध्य प्रदेश प्रदेश कार्यसमिति में शामिल एकमात्र मुस्लिम चेहरा हैं। भाजपा ने हाल ही में अपने एक सौ छह सदस्यीय राज्य कार्यसमिति संगठन की घोषणा की है। इस सूची में बिलकिस जहां को जगह देकर पार्टी ने सियासी गलियारों में एक बड़ा संदेश दिया है। बिलकिस जहां का जीवन सामान्य नेताओं से बिल्कुल अलग है। वह एक निष्ठावान शिया दाउदी बोहरा मुस्लिम महिला हैं।
इसके साथ ही वह भगवान हनुमान की परम भक्त भी हैं। उनके जीवन में इस्लाम मजहब के प्रति अटूट सम्मान और सनातन हिंदू धर्म के प्रति गहरी आस्था एक साथ देखने को मिलती है। उनकी यही खूबी उन्हें मध्य प्रदेश की राजनीति में सबसे विशिष्ट बनाती है।

बिलकिस जहां की उम्र इस समय सत्तावन वर्ष है। वह भोपाल के पुराने इलाके अलीगंज की रहने वाली हैं। वह एक संभ्रांत बोहरा मुस्लिम व्यापारी परिवार से ताल्लुक रखती हैं। बिलकिस ने कॉमर्स से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा और राजनीति के लिए समर्पित कर दिया।
इसी वजह से उन्होंने कभी शादी नहीं की। भोपाल की जनता और बीजेपी के बड़े नेता उन्हें कई दिलचस्प नामों से पुकारते हैं। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती उन्हें प्यार से बिल्ली कहती हैं। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुराने नेता शशि भाई सेठ उन्हें आज भी बिल्लू चांद नाम से बुलाते हैं। यह नाम उन्हें साल उन्नीस सौ उनासी में मिला था जब वह पहली बार जनता पार्टी की नेता रजिया सुल्तान, आरिफ बेग और शशि भाई सेठ के संपर्क में आई थीं।
बिलकिस जहां की दिनचर्या बेहद कठिन और अनुशासित है। वह रोज सुबह तीन बजे बिस्तर छोड़ देती हैं। सुबह उठकर वह सबसे पहले अपने घर के पास अलीगंज की मस्जिद में जाती हैं। वहां वह अपने बोहरा समाज की धार्मिक परंपरा के मुताबिक नमाज पढ़ती हैं। इसके बाद उनका दूसरा नियम शुरू होता है जो पिछले बाईस सालों से बिना रुके जारी है।
सुबह ठीक साढ़े सात बजे बिलकिस भोपाल के वीआईपी रोड स्थित ऐतिहासिक कमला पार्क हनुमान मंदिर पहुंचती हैं। वहां वह बजरंगबली की पूजा-अर्थना करती हैं और पूरी श्रद्धा से हनुमान चालीसा का पाठ करती हैं। सिर्फ इतना ही नहीं वह हर मंगलवार को संकटमोचन के लिए उपवास भी रखती हैं। बिलकिस भगवान हनुमान को आदर से बब्बजी कहकर पुकारती हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि बब्बजी ने उनके जीवन के हर संकट को काटा है और हर मुश्किल राह आसान की है।
धार्मिक यात्राओं के मामले में भी बिलकिस का अनुभव बहुत अनोखा रहा है। वह इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना की हज यात्रा कर चुकी हैं। उन्होंने जेद्दा, ईरान और मिस्र के ऐतिहासिक स्थलों के दीदार भी किए हैं। दूसरी तरफ वह जम्मू स्थित माता वैष्णो देवी के दरबार में भी तीन बार हाजिरी लगा चुकी हैं।
बिलकिस जहां का नाता अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन से भी जुड़ा रहा है। साल उन्नीस सौ नब्बे के दौर में जब देश में राम जन्मभूमि आंदोलन चरम पर था तब वह भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ कारसेवा के लिए अयोध्या जा रही थीं। उस समय उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पुलिस ने उन्हें रोक लिया था।
वह तीन दिनों तक वहां हिरासत में रुकी रहीं। बिलकिस कहती हैं कि उन्हें कारसेवक होने पर गर्व महसूस होता है। वह आज भी लोगों का अभिवादन जय सियाराम कहकर करती हैं। उनका मानना है कि जय सियाराम कोई राजनीतिक नारा नहीं है बल्कि यह एक ऐसा उद्घोष है जिस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए।
बीजेपी के प्रति बिलकिस जहां की वफादारी दशकों पुरानी है। वह साल अस्सी के दशक की शुरुआत से ही भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हुई हैं। वह बताती हैं कि भाजपा की राष्ट्रवादी विचारधारा उनके अंतर्मन में बसी है। शुरुआती दिनों में वह भोपाल के चौक मंडल में पार्टी की इकलौती मुस्लिम महिला सदस्य हुआ करती थीं।
भोपाल का सैफिया कॉलेज पोलिंग बूथ हमेशा से कांग्रेस का गढ़ और मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र माना जाता रहा है। उस संवेदनशील मतदान केंद्र पर बीजेपी की तरफ से पोलिंग एजेंट बनने की हिम्मत सिर्फ बिलकिस जहां ही दिखा पाती थीं। उन्होंने पार्टी की सदस्यता के लिए अपने ही परिवार के लोगों को राजी करने में कई दिन लगा दिए थे। उनकी अथक मेहनत का ही नतीजा था कि बाद में उनके पूरे परिवार ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा को वोट देना शुरू कर दिया।
बिलकिस जहां की राजनीतिक क्षमता का असली इम्तिहान साल उन्नीस सौ तिरानवे के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में हुआ था। उस समय भाजपा ने भोपाल उत्तर विधानसभा सीट से रमेश शर्मा को अपना प्रत्याशी बनाया था। यह सीट हमेशा से कांग्रेस का अभेद्य किला रही है।
बिलकिस ने उस मुश्किल चुनाव में रमेश शर्मा के लिए दिन-रात प्रचार किया। चुनाव प्रचार के दौरान विपक्षी दल के कार्यकर्ताओं ने उन पर हिंसक पथराव भी किया था। इस हमले में बिलकिस के माथे पर गहरी चोट आई और काफी खून बहा। इसके बावजूद वह मैदान छोड़कर पीछे नहीं हटीं।
वह मरहम-पट्टी करवाकर दोबारा प्रचार में जुट गईं। आखिरकार भाजपा ने उस सीट पर ऐतिहासिक फतह हासिल की। भोपाल उत्तर सीट पर बीजेपी की वह अब तक की पहली और आखिरी जीत है। बिलकिस कहती हैं कि पार्टी के काम करते हुए मिले जख्मों का दर्द जीत की खुशी के आगे बहुत छोटा था। उनके राजनीतिक सफर को दबाने के लिए विरोधियों ने उन पर अठारह अलग-अलग मुकदमे भी दर्ज कराए लेकिन वह कभी नहीं झुकीं। एक बार इतिहासकार महमूद गजनवी का पुतला फूंकने के आरोप में उन्हें एक दिन के लिए जेल भी जाना पड़ा था।
पार्टी ने उनकी इस वफादारी और कड़े संघर्ष को हमेशा सम्मान दिया। साल दो हजार दो के भोपाल नगर निगम चुनाव में भाजपा ने उन्हें वार्ड नंबर उन्नीस से पार्षद का टिकट दिया। यह वार्ड कांग्रेस के कद्दावर नेता और तत्कालीन कैबिनेट मंत्री आरिफ अकील का गृह क्षेत्र था।
कांग्रेस ने बिलकिस को हराने के लिए बोहरा समाज की ही शमीम बानो को उम्मीदवार बना दिया ताकि मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण हो सके। चुनाव इतना दिलचस्प था कि कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने खुद अलीगंज में चुनावी सभा की थी।
वहीं भाजपा नेता उमा भारती को अलीगंज में सभा करने की अनुमति नहीं मिली तो उन्होंने इतवारा चौक पर भाषण दिया। इस चुनाव में कैलाश जोशी, कैलाश सारंग, सुंदरलाल पटवा, बाबूलाल गौर और उमाशंकर गुप्ता जैसे भाजपा के तमाम दिग्गज नेताओं ने बिलकिस के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी।
नतीजा यह हुआ कि हिंदू और बोहरा मुस्लिम मतदाताओं के भारी समर्थन से बिलकिस जहां दो सौ बहत्तर वोटों से चुनाव जीत गईं। पार्षद बनने के बाद उन्होंने अपने क्षेत्र में विकास की गंगा बहाई। उन्होंने एक सरकारी प्राइमरी स्कूल खुलवाया और युवाओं के लिए एक पारंपरिक कुश्ती अखाड़ा भी स्थापित किया। हालांकि इसके बाद के दो निकाय चुनावों में उन्हें वार्ड नंबर सात और वार्ड उन्नीस से मामूली अंतर से हार झेलनी पड़ी।
बिलकिस जहां को भाजपा के बड़े संगठन में काम करने का बहुत लंबा अनुभव है। वह साल दो हजार दस से दो हजार अठारह के बीच तीन अलग-अलग प्रदेश अध्यक्षों के कार्यकाल में भाजपा राज्य कार्यसमिति की सम्मानित सदस्य रह चुकी हैं।
उन्होंने नरेंद्र सिंह तोमर, प्रभात झा और नंदकुमार सिंह चौहान के नेतृत्व में पार्टी के लिए अहम रणनीतियां बनाईं। इसके बाद साल दो हजार बाईस से दो हजार पच्चीस के बीच जब वी डी शर्मा मध्य प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष थे तब भी उन्हें संगठन में बड़े पद की पेशकश की गई थी लेकिन निजी कारणों से उन्होंने उस समय पद लेने से मना कर दिया था। अब उन्हें चौथी बार इस महत्वपूर्ण नीति निर्धारक समिति में शामिल करके पार्टी ने उनके अनुभव पर मुहर लगाई है।
सक्रिय राजनीति में इतने लंबे समय तक रहने के कारण कुछ मौकों पर उन्हें अपनों से ही निराशा भी हाथ लगी। साल दो हजार अठारह के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में वह भोपाल उत्तर सीट से भाजपा का टिकट मांग रही थीं। लेकिन पार्टी ने उनकी अनदेखी करके कांग्रेस के पूर्व विधायक रसूल अहमद सिद्दीकी की बेटी फातिमा रसूल सिद्दीकी को चुनावी मैदान में उतार दिया।
इस फैसले से बिलकिस बेहद आहत हुई थीं। उन्होंने अपनी पीड़ा तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने भी बयां की थी। तब शिवराज सिंह ने उन्हें ढाढस बंधाया था कि जो किस्मत में लिखा होगा वह समय आने पर जरूर मिलेगा। बाद में फातिमा वह चुनाव हार गईं और कुछ समय बाद वापस कांग्रेस में लौट गईं। बिलकिस को इस बात का मलाल आज भी है लेकिन उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा को कभी आंच नहीं आने दी।
बिलकिस जहां समसामयिक सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय बहुत बेबाकी से व्यक्त करती हैं। वह मानवाधिकारों और कौमी एकता की प्रबल पैरोकार हैं। वह जहां एक तरफ गाजा और ईरान में बेगुनाह मुसलमानों की हत्या की कड़े शब्दों में निंदा करती हैं वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर होने वाले अत्याचारों और नरसंहार के खिलाफ भी खुलकर आवाज उठाती हैं।
देश के भीतर गोवंश संरक्षण के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग यानी भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा की वारदातों को भी वह पूरी तरह अमानवीय और गैर-कानूनी मानती हैं। वह कहती हैं कि मवेशी तस्करी रोकने के नाम पर किसी इंसान की जान लेना सनातन धर्म की सीख नहीं है।
इसके साथ ही अयोध्या के भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए आए चंदे में हुई कथित हेराफेरी की खबरों से भी एक हनुमान भक्त के रूप में उनका दिल बहुत रोता है। वह चाहती हैं कि प्रभु श्रीराम के काम में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।
वर्तमान समय में संगठन में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद बिलकिस जहां भविष्य की योजनाओं को लेकर बहुत आशान्वित हैं। वह चाहती हैं कि प्रदेश सरकार और भाजपा संगठन उनके राजनीतिक अनुभवों का सही इस्तेमाल करे। उनकी दिली इच्छा है कि उन्हें मध्य प्रदेश राज्य मदरसा बोर्ड या राज्य अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष मनोनीत किया जाए।
वह राज्य महिला आयोग के सदस्य के रूप में भी काम करने की इच्छुक हैं ताकि वह मुस्लिम महिलाओं के हक और उनके अधिकारों के लिए जमीनी स्तर पर काम कर सकें। मध्य प्रदेश के सियासी हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि भाजपा आने वाले दिनों में उन्हें कोई बड़ी सांगठनिक जिम्मेदारी सौंप सकती है।
इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी उन्हें भोपाल उत्तर सीट से चेहरा बना सकती है क्योंकि वह उस इलाके के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को बहुत गहराई से समझती हैं। बिलकिस जहां का यह पूरा सफर भारतीय लोकतंत्र में सर्वधर्म समभाव और व्यक्तिगत ईमानदारी का एक अनूठा उदाहरण पेश करता है।