डाॅक्टर डे विशेष : क्या हर बांझपन में IVF जरूरी है? जानिए सच डॉ. शाहिदा से
Story by ओनिका माहेश्वरी | Published by onikamaheshwari | Date 01-07-2026
"Changing lifestyle, pollution, and stress are the biggest causes of infertility":Dr SHAHIDA NAGHMA – Gynecologist, Obstetrician, and IVF Expert
ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, बढ़ता प्रदूषण, तनाव और असंतुलित खानपान का असर केवल हमारी सामान्य सेहत पर ही नहीं, बल्कि प्रजनन क्षमता पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बांझपन (इन्फर्टिलिटी) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और पहले की तुलना में कम उम्र के दंपति भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं। ऐसे में इस विषय से जुड़े भ्रम, सही इलाज और बचाव के उपायों को समझना बेहद जरूरी है। इसी मुद्दे पर आवाज द वॉयस ने स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ तथा IVF एक्सपर्ट डॉ. शाहिदा नगमा से विशेष बातचीत की। इस विशेष साक्षात्कार में उन्होंने बांझपन के बढ़ते कारणों, IVF से जुड़े मिथकों, उपचार की पूरी प्रक्रिया, महिलाओं की फर्टिलिटी को सुरक्षित रखने के उपायों और अपने डॉक्टर बनने के सफर पर विस्तार से चर्चा की।
डॉ. शाहिद एक समर्पित फर्टिलिटी और IVF स्पेशलिस्ट हैं, जिन्हें 10 साल से ज़्यादा का क्लिनिकल अनुभव है। उन्होंने भारत के कुछ सबसे प्रतिष्ठित कॉलेजों और अस्पतालों से एडवांस्ड ट्रेनिंग ली है। डॉ. शाहिद के सभी इलाज सबूतों पर आधारित होते हैं और वे खुद ही इन्हें करती हैं। उनका मानना है कि हर मरीज़ अलग होता है और फर्टिलिटी केयर के लिए उन्हें खास तौर पर उनके हिसाब से इलाज मिलना चाहिए।
सबसे पहले अपने बारे में और अपने सेंटर के बारे में बताइए।
डॉ. शाहिदा नगमा: मैं स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) और IVF विशेषज्ञ हूं। हाल ही में हमने रेडियंस लाइफलाइन एंड फर्टिलिटी क्लिनिक की शुरुआत की है। इस सेंटर को शुरू हुए लगभग चार से पांच महीने हुए हैं। इस सेंटर को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य यह था कि इस क्षेत्र के बहुत से मरीज मुझसे आकर कहते थे कि यहां उन्हें एमबीबीएस और पोस्टग्रेजुएट डिग्री वाले योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं मिलते।
उन्हें इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था। शुरुआत में हमारा उद्देश्य केवल फर्टिलिटी क्लिनिक शुरू करना था, लेकिन बाद में हमने देखा कि महिलाओं को सामान्य स्त्री रोग, सामान्य डिलीवरी, संक्रमण और अन्य स्त्री स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए भी विशेषज्ञ सेवाओं की आवश्यकता है। इसलिए अब यहां महिलाओं के संपूर्ण स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
आजकल बांझपन (Infertility) के मामले इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं?
डॉ. शाहिदा नगमा: आज बांझपन बहुत तेजी से बढ़ रहा है। सबसे चिंता की बात यह है कि अब 21-22 वर्ष की लड़कियों में भी यह समस्या देखने को मिल रही है। इसके कई कारण हैं। यदि हम शहर और गांव की जीवनशैली की तुलना करें तो शहरों में लोग प्रदूषित हवा, पानी और भोजन का सेवन कर रहे हैं।
भोजन में मिलावट और केमिकल्स होने के कारण महिलाओं के अंडों (Eggs) और पुरुषों के शुक्राणुओं (Sperms) की गुणवत्ता और संख्या दोनों प्रभावित हो रही हैं। इसके अलावा लोग पढ़ाई और नौकरी के लिए शहरों में बस रहे हैं। व्यस्त जीवन के कारण उनके पास अपनी सेहत का ध्यान रखने का समय नहीं है। नियमित व्यायाम, पौष्टिक भोजन, पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स की कमी भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है।
आजकल लोग प्रोसेस्ड फूड अधिक खा रहे हैं। घर का ताजा और संतुलित भोजन कम हो गया है। लंबे समय तक यात्रा, तनाव, भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित दिनचर्या भी इसकी बड़ी वजह हैं। पुरुषों में धूम्रपान और शराब का सेवन पहले से ही एक बड़ी समस्या थी, लेकिन अब कॉरपोरेट संस्कृति के कारण महिलाओं में भी यह बढ़ रहा है। इसके अलावा लैपटॉप का अधिक उपयोग, स्क्रीन टाइम बढ़ना और नींद का पूरा न होना भी बांझपन के प्रमुख कारण हैं।
अगर कोई दंपति आपके पास आता है तो आप उन्हें सबसे पहले क्या सलाह देती हैं?
डॉ. शाहिदा नगमा: आजकल लोग शादी से पहले भी परामर्श लेने आते हैं। वे चाहते हैं कि शादी से पहले ही उन्हें बताया जाए कि कौन-कौन से टेस्ट करवा लेने चाहिए ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी न हो। ऐसे मामलों में हम सबसे पहले कुछ बेसिक जांच करवाते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- हीमोग्लोबिन
- विटामिन B12
- विटामिन D3
- थायरॉयड जांच
- प्रोलैक्टिन
- हार्मोन प्रोफाइल (E2, LH, FSH)
- वायरल मार्कर टेस्ट
इसके अलावा महिलाओं में यह भी देखा जाता है कि अंडाशय में अंडों (Egg Reserve) की संख्या पर्याप्त है या नहीं। इसके लिए पीरियड्स के दूसरे या तीसरे दिन अल्ट्रासाउंड द्वारा Antral Follicle Count किया जाता है या फिर AMH (Anti-Mullerian Hormone) की जांच करवाई जाती है। AMH टेस्ट से यह पता चलता है कि महिला के पास भविष्य में गर्भधारण के लिए पर्याप्त अंडे मौजूद हैं या नहीं। पुरुषों में सीमन एनालिसिस कराया जाता है, जिसमें शुक्राणुओं की संख्या, उनकी गति (Motility) और उनकी बनावट (Morphology) की जांच की जाती है।
IVF क्या है? इसे आसान भाषा में समझाइए।
डॉ. शाहिदा नगमा: IVF का पूरा नाम इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (In Vitro Fertilization) है। सरल भाषा में कहें तो इसमें महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु को शरीर के बाहर लैब में मिलाकर भ्रूण (Embryo) तैयार किया जाता है। लगभग पांच दिन तक लैब में भ्रूण विकसित किया जाता है, जिसे ब्लास्टोसिस्ट (Blastocyst) कहा जाता है।
इसके बाद इस भ्रूण को महिला की बच्चेदानी (Uterus) में ट्रांसफर कर दिया जाता है। शुरुआत में IVF केवल उन महिलाओं के लिए विकसित किया गया था जिनकी दोनों फैलोपियन ट्यूब बंद होती थीं। ऐसी स्थिति में अंडा और शुक्राणु प्राकृतिक रूप से मिल नहीं पाते। लेकिन आज IVF का उपयोग कई अन्य स्थितियों में भी किया जाता है, जैसे:
- पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या या गुणवत्ता कम होना
- इरेक्टाइल डिस्फंक्शन
- एक या दोनों फैलोपियन ट्यूब का बंद होना
- PCOS या अन्य ओव्यूलेशन संबंधी समस्याएं
- अंडा न बनना या सही तरीके से विकसित न होना
इन स्थितियों में अंडे निकालकर लैब में शुक्राणुओं से निषेचित किया जाता है और भ्रूण बनने के बाद उसे गर्भाशय में स्थापित किया जाता है।
क्या हर बांझपन के मामले में IVF जरूरी होता है?
डॉ. शाहिदा नगमा: बिल्कुल नहीं। यदि डॉक्टर आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री लेकर सही तरीके से जांच करते हैं तो हर मरीज को IVF की जरूरत नहीं होती। लगभग 80 प्रतिशत दंपति शादी के पहले एक वर्ष में स्वाभाविक रूप से गर्भधारण कर लेते हैं।
बाकी में से अधिकांश दूसरे वर्ष में गर्भधारण कर लेते हैं। केवल लगभग 10 प्रतिशत दंपतियों को ही आगे चलकर IUI या IVF जैसे एडवांस इलाज की जरूरत पड़ती है। यदि दंपति को सही समय पर संबंध बनाने (Fertile Window), ओव्यूलेशन के लक्षण और गर्भधारण की प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी दी जाए तो अधिकांश लोग प्राकृतिक रूप से ही माता-पिता बन जाते हैं। यदि समस्या गंभीर हो जैसे ट्यूब ब्लॉक होना, तो फिर IVF की सलाह दी जाती है।
IVF से पहले कौन-कौन से इलाज किए जाते हैं?
डॉ. शाहिदा नगमा: सबसे पहले प्राकृतिक गर्भधारण की कोशिश कराई जाती है। यदि उससे सफलता नहीं मिलती तो दवाइयों के माध्यम से अंडा बनने की प्रक्रिया को बढ़ाया जाता है और फॉलिकुलर मॉनिटरिंग की जाती है। इसके बाद आवश्यकता होने पर IUI (Intra-Uterine Insemination) किया जाता है।
IUI में महिला के अंडाशय में प्राकृतिक रूप से बनने वाले अंडे की निगरानी की जाती है। सही समय आने पर पति के सीमेन को लैब में प्रोसेस करके सबसे सक्रिय शुक्राणुओं को सीधे गर्भाशय में डाला जाता है, जिससे प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। यदि इन सभी तरीकों से भी सफलता नहीं मिलती, तब IVF किया जाता है।
IVF को लेकर लोगों में कौन-कौन सी गलतफहमियां हैं?
डॉ. शाहिदा नगमा: IVF को लेकर कई मिथक हैं। सबसे बड़ी गलतफहमी यह होती है कि IVF में इस्तेमाल होने वाले अंडे और शुक्राणु किसी दूसरे व्यक्ति के होते हैं। दूसरी गलतफहमी यह है कि IVF से हमेशा लड़का ही पैदा होता है। तीसरी गलतफहमी यह है कि IVF में हमेशा जुड़वा, तीन या चार बच्चे होते हैं। ये सभी बातें गलत हैं। IVF शुरू करने से पहले डॉक्टर मरीज की काउंसलिंग करते हैं और इन सभी भ्रमों को दूर करते हैं ताकि मरीज पूरे विश्वास के साथ इलाज शुरू कर सके।
IVF की सफलता दर कितनी होती है?
डॉ. शाहिदा नगमा: IVF की सफलता दर हर लैब और मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग होती है। बेहतरीन और अच्छी तरह स्थापित लैब में भी सफलता दर लगभग 45 से 55 प्रतिशत होती है। यदि कोई सेंटर 100 प्रतिशत सफलता की गारंटी देता है तो मरीजों को सावधान हो जाना चाहिए। ऐसी बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। मरीजों को हमेशा उस सेंटर की पारदर्शिता देखनी चाहिए और यह पूछना चाहिए कि पिछले एक वर्ष में उनका वास्तविक सफलता प्रतिशत कितना रहा है।
IVF के दौरान मरीजों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
डॉ. शाहिदा नगमा: सबसे जरूरी है कि पति-पत्नी एक-दूसरे का भावनात्मक सहयोग करें। इसके अलावा:
- सभी दवाइयां और इंजेक्शन समय पर लें।
- कोई भी इंजेक्शन मिस न करें।
- डॉक्टर द्वारा बताए गए समय पर ही इंजेक्शन लगवाएं।
- पर्याप्त पानी पिएं।
- डॉक्टर द्वारा बताई गई डाइट का पालन करें।
- शरीर को स्वस्थ रखें ताकि सफलता की संभावना बढ़ सके।
महिलाएं अपनी फर्टिलिटी कैसे सुरक्षित रख सकती हैं?
डॉ. शाहिदा नगमा: महिलाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए।
- प्रतिदिन 7–8 घंटे की नींद लें।
- तनाव कम रखें।
- वजन नियंत्रित रखें।
- नियमित व्यायाम करें।
- प्रोटीन युक्त संतुलित आहार लें।
- ड्राई फ्रूट्स, अखरोट और हेल्दी फैट्स का सेवन करें।
- धूम्रपान और शराब से पूरी तरह बचें, विशेष रूप से यदि गर्भधारण की योजना बना रही हों।
आपने डॉक्टर बनने का फैसला क्यों किया?
डॉ. शाहिदा नगमा: मेरे डॉक्टर बनने की प्रेरणा मेरे नाना से मिली। वे यूनाइटेड किंगडम (UK) में पीडियाट्रिक डॉक्टर थे। जब भी वे भारत आते थे, मैं उनके पास बैठकर उनके अनुभव और डॉक्टर बनने की यात्रा के बारे में घंटों सवाल पूछती थी। उनकी कहानी ने मुझे बहुत प्रेरित किया और तभी मैंने तय कर लिया था कि मुझे भी डॉक्टर बनना है।
आपकी शिक्षा कहाँ से हुई है?
डॉ. शाहिदा नगमा: मेरी प्रारंभिक पढ़ाई धनबाद के कमल कॉन्वेंट स्कूल से हुई। इसके बाद मैंने दिल्ली के आर्मी पब्लिक स्कूल, धौला कुआँ से आगे की पढ़ाई पूरी की। मैंने आर्मी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (ACMS), MBBS, VMMC और सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली से किया है।
और वहीं से इंटर्नशिप भी पूरी की। इसके बाद वर्ष 2015 में मैंने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एवं सुचेता कृपलानी अस्पताल, नई दिल्ली से एमएस (स्त्री एवं प्रसूति रोग) में प्रवेश लिया और तीन वर्ष की पढ़ाई पूरी की। साल 2018 से 2021 तक वहीं सीनियर रेजिडेंसी की। इसके बाद मैंने सर गंगाराम अस्पताल में डॉ. आभा के मार्गदर्शन में एक वर्ष की IVF फेलोशिप की। वर्तमान में मैं अपनी प्रैक्टिस कर रही हूं। VMMC और सफदरजंग अस्पताल से 3 साल की सीनियर रेजिडेंसी।
आपके सेंटर का नाम क्या है?
डॉ. शाहिदा नगमा: मेरे सेंटर का नाम रेडियंस लाइफलाइन एंड फर्टिलिटी सेंटर है।
क्या इस पेशे में आपको कभी किसी तरह के सामाजिक पूर्वाग्रह (Stereotype) या टैबू का सामना करना पड़ा?
डॉ. शाहिदा नगमा: नहीं, मुझे व्यक्तिगत रूप से किसी तरह के सामाजिक पूर्वाग्रह का सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि, सरकारी अस्पतालों में काम करते समय सबसे बड़ी चुनौती अत्यधिक मरीजों का दबाव था। वहां मरीजों की संख्या बहुत अधिक होती है, लेकिन डॉक्टरों की संख्या अपेक्षाकृत कम होती है।
ऐसे माहौल में डॉक्टर हमेशा अत्यधिक कार्यभार और तनाव में रहते हैं। मेरा मानना है कि इस पेशे में सफल होने के लिए अपने निर्णय पर दृढ़ रहना जरूरी है। कई डॉक्टर अत्यधिक कार्यभार और तनाव के कारण बीच में ही टूट जाते हैं, इसलिए धैर्य, समर्पण और सेवा भावना सबसे महत्वपूर्ण हैं।
FAQs & Answers
डॉ. शहीदा नगमा, Cloudnine पर किस शहर और सेंटर में प्रैक्टिस करती हैं?
डॉ. शहीदा नगमा कैलाश कॉलोनी, नई दिल्ली में प्रैक्टिस करती हैं।
मैं डॉ. शहीदा नगमा से अपॉइंटमेंट कैसे बुक कर सकता/सकती हूँ?
आप 'Cloudnine ऐप', Cloudnine की वेबसाइट, कस्टमर केयर नंबर पर फ़ोन करके या सीधे अस्पताल जाकर डॉ. शहीदा नगमा से कंसल्टेशन बुक कर सकते/सकती हैं।
लोग डॉ. शहीदा नगमा से सलाह क्यों लेते हैं?
मरीज़ अक्सर फर्टिलिटी और IVF से जुड़ी समस्याओं के लिए सलाह और इलाज के लिए डॉ. शहीदा नगमा के पास आते हैं।
मैं अपॉइंटमेंट कब बुक कर सकता/सकती हूँ?
'Cloudnine ऐप' या Cloudnine की वेबसाइट के ज़रिए कभी भी।
डॉ. शहीदा नगमा की एजुकेशनल क्वालिफ़िकेशन क्या है?
डॉ. शहीदा नगमा के पास ये क्वालिफ़िकेशन हैं: MBBS, MS, FRM।