आवाज द वाॅयस / नई दिल्ली
ऑल इंडिया सूफी सज्जादनशीन काउंसिल (AISSC) का देशव्यापी अभियान "मेरा मुल्क, मेरी पहचान" अब दक्षिण भारत तक पहुंच गया है। हाल ही में इस परिषद के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल ने तेलंगाना और कर्नाटक का दो दिनों का दौरा पूरा किया। इस यात्रा के दौरान दोनों राज्यों के कई शहरों में बड़े कार्यक्रम हुए। इन आयोजनों में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया और देश में एकता बनाए रखने का संकल्प लिया।
यह दौरा सिर्फ धार्मिक नहीं था। इसका मुख्य मकसद लोगों को देश के संविधान, राष्ट्रीय एकता और आपसी भाईचारे के प्रति जागरूक करना था। तेलंगाना के हैदराबाद, संगारेड्डी, जहीराबाद और हुमनाबाद में बड़े कार्यक्रम हुए। वहीं कर्नाटक के कलबुर्गी, आलंद और हलकट्टा में भी लोगों ने इस अभियान का दिल से स्वागत किया।
देश के कोने-कोने से जुटे सूफी संत
इस महत्वपूर्ण दौरे का नेतृत्व अजमेर दरगाह प्रमुख के उत्तराधिकारी और ऑल इंडिया सूफी सज्जादनशीन काउंसिल के चेयरमैन हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने किया। उनके साथ देश की कई बड़ी दरगाहों के प्रमुख और सूफी विद्वान भी शामिल थे।
इस प्रतिनिधिमंडल में उत्तर प्रदेश की मशहूर दरगाह रुदौली के सज्जादानशीन हज़रत शाह अहमद अहमद साहब (नैयर मियां) और जयपुर की दरगाह मीर जी का बाग के सज्जादानशीन जनाब हबीबुर रहमान नियाज़ी साहब शामिल थे।
इनके अलावा गुजरात से जनाब सैयद अंजुम फ़रीद साहब (सज्जादानशीन दरगाह अम्बेटा शरीफ़), हैदराबाद से जनाब हुसैन खान साहब (चिन्नू बाबा), और कर्नाटक एआईएसएससी के स्टेट प्रेसिडेंट जनाब सैयद अली ज़की हुसैनी साहब भी इस दौरे का हिस्सा रहे। पूरे कार्यक्रम के तालमेल की जिम्मेदारी नेशनल कोऑर्डिनेटर जनाब सैयद अब्दुल क़ादिर क़ादरी साहब ने संभाली।
सभी शहरों में स्थानीय लोगों, युवाओं और महिलाओं ने फूल-मालाओं के साथ सूफी संतों का भव्य स्वागत किया।
ऑल इंडिया सूफी सज्जादनशीन काउंसिल (AISSC) का देशव्यापी अभियान "मेरा मुल्क, मेरी पहचान" अब दक्षिण भारत तक पहुंच गया है। हाल ही में इस परिषद के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल ने तेलंगाना और कर्नाटक का दो दिनों का दौरा पूरा किया। इस यात्रा के दौरान दोनों राज्यों के कई शहरों में बड़े… pic.twitter.com/IuyPbARY6E
— Awaz -The Voice हिन्दी (@AwazTheVoiceHin) June 30, 2026
"मेरा मुल्क, मेरी पहचान" सिर्फ नारा नहीं, एक राष्ट्रीय संकल्प है
हैदराबाद और कलबुर्गी सहित विभिन्न सभाओं को संबोधित करते हुए हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने बेहद सरल और प्रभावशाली बातें कहीं। उन्होंने कहा कि भारत की असली ताकत इसकी विविधता में एकता है। सूफी संतों ने हमेशा इंसानों से मोहब्बत करना सिखाया है। जब हम दुनिया के किसी भी कोने में जाते हैं, तो हमारी पहचान सिर्फ एक भारतीय के रूप में होती है, किसी धर्म या जाति से नहीं।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि "मेरा मुल्क, मेरी पहचान" कोई आम नारा नहीं है। यह भारत की गंगा-जमुनी तहजीब को बचाने और मजबूत करने का एक बड़ा आंदोलन है। आज के समय में देश के हर नागरिक को संविधान का सम्मान करना चाहिए और देश की अखंडता के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
"नफरत का जवाब नफरत से नहीं दिया जा सकता। सूफी संतों की शिक्षाएं हमें सिखाती हैं कि समाज को जोड़ने के लिए मोहब्बत से बड़ा कोई हथियार नहीं है।" —हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती
समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुटता
कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश से आए हज़रत शाह अहमद अहमद साहब (नैयर मियां) और जयपुर के जनाब हबीबुर रहमान नियाज़ी साहब ने भी जनता को संबोधित किया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में सूफी विचारधारा की प्रासंगिकता बहुत ज्यादा बढ़ गई है। आज जब कुछ ताकतें समाज को बांटने की कोशिश कर रही हैं, तब सूफी दरगाहें लोगों को एक मंच पर लाने का काम कर रही हैं।
सभी वक्ताओं ने युवाओं से अपील की कि वे सोशल मीडिया या किसी भी माध्यम से फैलने वाली नफरत और कट्टरपंथ से दूर रहें। देश के विकास में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं।
तेलंगाना और कर्नाटक के इन मुख्य केंद्रों पर हुए कार्यक्रम
इस दो दिवसीय दौरे के दौरान जिन प्रमुख जगहों पर सूफी संतों का जमावड़ा हुआ, उनकी सूची इस प्रकार है:
इन सभी जगहों पर कार्यक्रमों के अंत में एक विशेष प्रार्थना (दुआ) की गई। सूफी संतों और हजारों की तादाद में जुटे अकीदतमंदों (श्रद्धालुओं) ने देश में शांति, समृद्धि और आपसी भाईचारे के लिए हाथ उठाए। सभी ने एक सुर में कसम खाई कि वे समाज में शांति बनाए रखने के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे।