World Television Day: मशहूर टीवी एंकर सलमा सुल्तान जिनके गुलाबी अंदाज पर फिदा थे दर्शक

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari • 3 Months ago
Famous TV anchor Salma Sultan whose style impressed the audience
Famous TV anchor Salma Sultan whose style impressed the audience

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली 
 
विश्व टेलीविजन दिवस हर साल 21 नवंबर को मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का मकसद दुनिया भर में टेलीविजन के महत्व को उजागर करना है. इस खास दिन पर पढ़ें मशहूर टीवी एंकर सलमा सुल्तान का सफरनामा. मशहूर टीवी एंकर सलमा सुल्तान अपने बाएं कान के नीचे अपने बालों में एक सुंदर गुलाब लगाकर अपनी साड़ी के बॉर्डर को अपनी गर्दन के चारों ओर आधुनिक पारंपरिक तरीके से लपेटकर एंकरिंग किया करतीं थीं जो उनकी सिग्नेचर स्टाइल बन गई. सलमा सुल्तान का जन्म 16 मार्च 1944 को हुआ जो एक भारतीय टेलीविजन पत्रकार और निर्देशक रहीं. 1967 से 1997 तक दूरदर्शन में एक समाचार एंकर के रूप में काम करने के बाद, वह बाद में टेलीविजन शो का निर्देशन करने लगीं. 
 

60 के दशक के अंत में दूरदर्शन के साथ काम करते हुए सुल्तान एक घरेलू नाम बन गईं, जहां उन्होंने तीन दशकों तक काम किया. प्रसिद्ध दूरदर्शन समाचार वाचक ने 1997 में टीवी समाचार पढ़ना बंद कर दिया.
 
आपको बता दें कि 2019 में प्रतिष्ठित दूरदर्शन समाचार एंकर सलमा सुल्तान ने 72 साल की उम्र में रैंप वॉक किया था. वह अपनी व्यक्तिगत शैली प्रदर्शित करने वाली पहली समाचार एंकरों में से एक थीं, खासकर उस युग में जब स्टाइलिस्ट मौजूद नहीं थे.
 
खूबसूरत महिला ने 'साड़ी के फॉल सा' सहित कई बॉलीवुड नंबरों पर अपने नृत्य से उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध किया. सलमा सुल्तान कहतीं थीं कि मैं नहीं मानती कि नई पीढ़ी को साड़ी पहनने में कोई समस्या है, जब आत्मविश्वास हो तो आप कोई भी पोशाक पहन सकते हैं.
 
अपनी परिधान शैली के लिए प्रसिद्ध पत्रकार , पारंपरिक भारतीय पोशाक को बढ़ावा देने वाले एक कपड़े के ब्रांड - साड़ी संस्कृति का संचालन भी करती हैं.
 
सलमा सुल्तान का जन्म विद्वान और कृषि मंत्रालय में सचिव मोहम्मद असगर अंसारी और एक गृहिणी माँ की दूसरी संतान के रूप में हुआ था. सलमा की एक बड़ी बहन मैमूना सुल्तान (भोपाल से चार बार कांग्रेस सांसद) थीं. 
 
 
सलमा के व्यक्तित्व को आकार उनके पिता ने दिया. अपने माता- पिता की दूसरी संतान सलमा को अपनी बहन मैमूना सुल्तान से भी भरपूर प्यार और मार्गदर्शन भी मिला. मैमूना मप्र की पहली विधानसभा में सदस्य चुनी गई थीं और उसके बाद तीन बार वे सांसद भी रहीं. दोनों बहनें शाह शुजा की पड़पोती हैं. 
 
शाह शुज़ा दुर्रानी अफ़गानिस्तान के अमीर थे जो दोस्त मोहम्मद खान से पराजित होने के बाद कश्मीर में रह रहे थे. पहले आंग्ल-अफगान युद्ध के बाद अंग्रेज़ों की मदद से वे दोबारा अफ़गानिस्तान के शासक बन गए लेकिन दो साल के भीतर ही काबुल में उनकी हत्या कर दी गई. एक आक्रमण के दौरान महाराजा रणजीत सिंह ने उन्हें कश्मीर से छुड़ाया था, जिसके बदले उन्होंने रणजीत सिंह जी को प्रसिद्ध कोहिनूर का हीरा दिया था. 
 
सलमा और मैमूना अफगानिस्तान के शाह शुजा की परपोती थीं. सलमा ने अपनी स्कूलिंग और ग्रेजुएशन भोपाल से की. उन्होंने इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वुमेन, दिल्ली से अंग्रेजी में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की और साथ ही 23 साल की उम्र में दूरदर्शन पर एक उद्घोषक के लिए ऑडिशन दिया.
 
 
भोपाल के सुल्तानिया गर्ल्स हाई स्कूल से हायर सेकेंडरी करने के बाद सलमा जी ने महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज से स्नातक किया. फिर उच्च शिक्षा के लिए वे दिल्ली आ गईं और इंद्रप्रस्थ कॉलेज से अंग्रेज़ी साहित्य से स्नातकोत्तर करने के बाद एक उद्घोषक और प्रस्तुतकर्ता के रूप में दूरदर्शन से जुड़ गईं. दूरदर्शन की स्थापना 15 सितम्बर 1959 को हुई थी. 
 
1965 से समाचार बुलेटिन की शुरुआत हुई. उन दिनों प्रतिमा पुरी और गोपाल कौल, रोज़ टीवी पर ख़बरें पढ़ते नज़र आते थे. 1967 में सलमा सुल्तान भी दूरदर्शन पर समाचार वाचक के रूप में दिखाई देने लगीं. शुरुआती दिनों में उनकी तनख्वाह महज दो हज़ार रुपए महीना थी, लेकिन तब सलमा जी या किसी भी समाचार वाचक के लिए पैसे की उतनी अहमियत नहीं थी, जितनी लोगों से जुड़ने की ख़ुशी. उनके लिए यह ज़्यादा अहम था कि पूरा देश उन्हें देख रहा है और समाचार वाचक के रूप में वे आम लोगों के बीच जाने-पहचाने जाते हैं. 
 
प्रतिमा पुरी और गोपाल कौल उस समय दूरदर्शन के नियमित चेहरे थे, जिसने 15 सितंबर 1959 को अपना परिचालन शुरू किया था. दूरदर्शन ने 1965 में 5 मिनट का समाचार बुलेटिन शुरू किया. सलमा सुल्तान ने इंदिरा गांधी की हत्या की पहली खबर दूरदर्शन की शाम की खबर 31 अक्टूबर 1984 को दी, उन्हें गोली लगने के 10 घंटे से भी अधिक समय बाद.
 
अपनी सेवानिवृत्ति के बाद, सलमा सुल्तान अपने प्रोडक्शन हाउस लेंसव्यू प्राइवेट लिमिटेड के तहत दूरदर्शन के लिए सामाजिक विषयों पर धारावाहिकों का निर्देशन करने लगीं. उनके धारावाहिक पंचतंत्र से, सुनो कहानी, स्वर मेरे तुम्हारे और जलते सवाल ने ध्यान खींचा. पंचतंत्र से का प्रसारण 1989 में महाभारत के तुरंत बाद किया गया था और इसने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था. जलते सवाल महिलाओं के मुद्दों पर एक धारावाहिक था, जो 2004 में डीडी न्यूज़ पर रविवार को सुबह 11 बजे प्रसारित किया गया था.
 
 
सलमा का समाचार वाचक बनना अनायास ही हुआ. दरअसल दूरदर्शन में तब प्रतिमा पुरी या गौतम कौल के अलावा और कोई इस काम के लिए नहीं था. एक दिन श्री कौल ने समाचार पढ़ने में अनिच्छा ज़ाहिर की और साथियों की मनुहार के बावजूद वे सर मुंडवाकर दूरदर्शन पहुँच गए. कोई चारा न देख सभी ने सलमा जी से पूछा कि क्या वे यह काम कर पाएंगी. उन्होंने हाँ कहा और स्टूडियो की तरफ बढ़ गईं. 
 
उस वक़्त दैनिक बुलेटिन की अवधि 10 मिनट की हो चुकी थी. सलमा जी जब बुलेटिन पढ़कर वापस लौटीं तो साथियों ने उन्हें बताया कि 10 मिनट का बुलेटिन उन्होंने 5 मिनट में ही पढ़ डाला है. बचे हुए 5 मिनट बिताने के लिए 'फ़िलर' का इस्तेमाल करना पड़ा. लेकिन समाचार पढ़ने की शैली और स्पष्ट उच्चारण सभी कायल हो गए. 
 
इस तरह शुरू हुई उनकी समाचार वाचन यात्रा 1997 तक जारी रही. बालों में गुलाब उनका प्रिय श्रृंगार था. सलमा कहती हैं, कि पहली बार जब दर्शकों ने उन्हें गुलाबी साड़ी और बालों में गुलाब के साथ देखा, तो उनके पास ढेरों प्रशंसकों के फोन आए. तब से वे बिला नागा बालों में गुलाब लगाकर समाचार पढ़ने लगीं. 
 
उनके अनुसार वह टेलीविजन का श्वेत-श्याम युग था, जिसमें कई प्रयोग किये गए - समाचार वाचन शैली से लेकर परिधान और श्रृंगार तक, जिसमें पहली शर्त थी शालीनता. लगभग तीस सालों तक उन्होंने दूरदर्शन पर ख़बरें पढ़ीं उसके बाद भी जुड़ी रहीं.
 
खाने की बेहद शौकीन सलमा को टीवी धारावाहिकों में महिलाओं को साज़िशें करते हुए दिखाने से सख्त ऐतराज़ रहा, संगीत में रुचि रखने वाली सलमा सिंथेसाइज़र, हारमोनियम और कम्प्यूटर तकनीक पर भी हाथ आजमाती. वे एक कुशल इंटीरियर डिजाइनर भी हैं, लेकिन इसे उन्होंने कभी व्यवसाय नहीं बनाया. 
 
 
शौकिया तौर पर अपने घर की साज-सज्जा पर उन्होंने खूब काम किया. दरअसल वे स्वभाव से ही रचनात्मक रही हैं इसलिए लगातार नई-नई संभावनाओं में खुद तलाशती और तराशती रहती हैं. 
 
सलमा सुल्तान आमिर किदवई की विधवा हैं, जो इंजीनियर्स इंडिया (ईआईएल) के लिए काम करते थे. सुल्तान के बेटे साद किदवई इनकम टैक्स कमिश्नर हैं और उनकी बेटी सना कोरियोग्राफर हैं. सलमा के दो पोते-पोतियाँ हैं. साद किदवई का विवाह गेटी खान किदवई का जन्म 1978 में हुआ, जो एक डिजाइनर हैं और उनके दो बच्चे हैं- समर और मेहर. साद और गेटी अब बीआरएस नगर, लुधियाना में बस गए हैं.
 
सलमा सुल्तान को कई पुरस्कार एवं सम्मान भी प्राप्त हैं:
 
सन् 1969 : दिल्ली में यूनाइटेड नेशन द्वारा बेस्ट पर्सनालिटी का ख़िताब
 
वर्ष 2022 : नीति आयोग के उद्यमिता मंच द्वारा वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवार्ड के पांचवे संस्करण में 'सशक्त और समर्थ भारत में योगदान हेतु पुरस्कृत