Celebrity Designer Asma Gulzar ने इंडो-फ्यूजन फैशन में बनाई वैश्विक पहचान
Story by ओनिका माहेश्वरी | Published by onikamaheshwari | Date 05-04-2026
Designer Asma Gulzar has carved a global identity in Indo-fusion fashion.
ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
इंडो-फ्यूजन फैशन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुकीं मशहूर डिजाइनर Asma Gulzar आज अपने संघर्ष, रचनात्मकता और आत्मबल के दम पर देश-विदेश में सफलता की नई मिसाल बन चुकी हैं।छोटे शहर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने वाली अस्मा गुलजार उन चुनिंदा डिजाइनर्स में शुमार हैं, जिन्होंने भारतीय और पश्चिमी शैलियों के संगम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उनका नाम आज न सिर्फ फैशन इंडस्ट्री बल्कि समाज में भी प्रेरणा के रूप में लिया जाता है।
करीब दो दशकों से फैशन इंडस्ट्री में सक्रिय अस्मा गुलजार ने अपने करियर की शुरुआत बेहद साधारण स्तर से की। लखनऊ से स्कूली शिक्षा और दिल्ली से फैशन डिजाइनिंग में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने महज 17 वर्ष की उम्र में काम शुरू कर दिया था। शुरुआती दौर में उन्होंने दिग्गज डिजाइनर Manish Malhotra के साथ काम कर अनुभव हासिल किया।
इसके अलावा उन्होंने कई बड़े फैशन हाउस और प्रोडक्शन प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया, जिससे उनके हुनर को निखारने का मौका मिला।
आज अस्मा गुलजार का नाम बॉलीवुड और ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर जाना-पहचाना है। उन्होंने Malaika Arora, Nushrat Bharucha, Pooja Batra और Celina Jaitly जैसी कई चर्चित हस्तियों के लिए डिजाइन तैयार किए हैं। इसके साथ ही वेब सीरीज, फैशन शो और अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स में भी उनकी मजबूत उपस्थिति दर्ज की गई है।
अस्मा गुलजार की खास पहचान उनके इंडो-अरेबिक और इंडो-वेस्टर्न फ्यूजन डिजाइन के लिए है। उनके आउटफिट्स में वेलवेट, स्कूबा और किमखाब जैसे रिच फैब्रिक्स के साथ जरी और जर्दोज़ी का बारीक और आकर्षक काम देखने को मिलता है। उनका हालिया कलेक्शन “Malak” भारतीय शादियों की भव्यता और रोमांटिक फैंटेसी से प्रेरित है, जिसमें पारंपरिक और आधुनिक डिजाइन का बेहतरीन संतुलन दिखाई देता है। उनके डिजाइन एस्थेटिक्स में “ब्यूटी विद एलिगेंस एंड कम्फर्ट” का स्पष्ट प्रभाव देखने को मिलता है।
उनका यह सफर आसान नहीं रहा। छोटे शहर से ताल्लुक रखने वाली अस्मा बचपन से ही क्रिएटिव थीं। वह अपने डिजाइन खुद तैयार करती थीं और स्थानीय दर्जी से उन्हें सिलवाती थीं।
खास बात यह थी कि वह अपने आउटफिट्स को सरप्राइज बनाए रखने के लिए अपने डिजाइन किसी को नहीं बताती थीं। बचपन से ही उनमें अलग दिखने और कुछ नया करने का जुनून था, जो आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
हालांकि, एक मुस्लिम परिवार से आने के कारण उन्हें शुरुआत में कई सामाजिक और पारिवारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
फैशन इंडस्ट्री को लेकर समाज में कई तरह की धारणाएं थीं, जिसके चलते उनके फैसलों पर सवाल उठाए गए। लेकिन उनके पिता और परिवार का साथ हमेशा उनके साथ रहा। उनकी दादी उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रहीं, जिन्होंने उन्हें “डिटरमिनेशन, डेडिकेशन और डिसिप्लिन” का मूलमंत्र दिया, जिसे अस्मा आज भी अपने जीवन में अपनाती हैं।
करियर के शुरुआती दिनों में उन्हें कई तरह की मुश्किलों और शोषण का भी सामना करना पड़ा। एक फैक्ट्री को संभालना, टीम को मैनेज करना और खुद को साबित करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी, खासकर कम उम्र में। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने घर के गैराज से एक मशीन के साथ काम शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और आज उनका ब्रांड अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है।
अस्मा गुलजार ने बातचीत के दौरान अपने जीवन के एक बेहद कठिन दौर का भी जिक्र किया। वर्ष 2022 में उन्हें एक गंभीर बीमारी का पता चला, जिसने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया। उस समय उन्हें लगा कि सब कुछ खत्म हो गया है और उनके मन में बार-बार यह सवाल आता था कि “क्यों मैं?” लेकिन उन्होंने अपने मजबूत इरादों और सकारात्मक सोच के दम पर इस चुनौती का सामना किया।
इलाज के दौरान भी उन्होंने अपने काम को नहीं छोड़ा। अस्पताल में इलाज कराने के बाद वह सीधे अपने शोरूम जाती थीं और काम संभालती थीं। सर्जरी के बाद भी उन्होंने अपने आत्मबल के दम पर खुद को संभाला और आगे बढ़ती रहीं। यह उनका जज्बा और दृढ़ निश्चय ही था जिसने उन्हें फिर से खड़ा किया और सफलता की राह पर आगे बढ़ाया।
अस्मा खुद को बेहद धार्मिक मानती हैं और उनका मानना है कि ईश्वर ने हर कठिन समय में उनका साथ दिया है। उनके अनुसार, जीवन में आने वाली चुनौतियां हमें मजबूत बनाती हैं और हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। यही सोच उन्हें हर परिस्थिति में सकारात्मक बनाए रखती है।
फैशन डिजाइनिंग को लेकर अस्मा का नजरिया भी काफी स्पष्ट है।
उनका मानना है कि फैशन सिर्फ कपड़े नहीं, बल्कि व्यक्ति की पहचान और आत्मविश्वास को दर्शाने का माध्यम है। किसी भी डिजाइन को तैयार करने से पहले वह व्यक्ति की बॉडी टाइप, हाइट, अवसर और पर्सनैलिटी को समझती हैं। इसके बाद वह अपने दिमाग में डिजाइन को विकसित करती हैं और उसे एक खास रूप देती हैं, जिससे हर आउटफिट यूनिक बनता है।
युवा फैशन डिजाइनर्स के लिए उन्होंने एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक है, लेकिन सफलता के लिए सबसे जरूरी है मौलिकता। उन्होंने नए डिजाइनर्स को “कट, कॉपी, पेस्ट” से बचने और अपनी क्रिएटिविटी को सामने लाने की सलाह दी। उनके अनुसार, जो लोग अपनी पहचान खुद बनाते हैं, वही इस इंडस्ट्री में लंबे समय तक टिक पाते हैं।
अपने सामाजिक सरोकारों के तहत अस्मा गुलजार साल 2014 से लगातार इफ्तार दावत का आयोजन भी करती आ रही हैं। उनके अनुसार यह केवल एक दावत नहीं, बल्कि मोहब्बत, एकता और भाईचारे का संदेश है। इस आयोजन में हर धर्म और हर वर्ग के लोग शामिल होते हैं। उन्होंने दुबई में भी कई बार इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जहां भारतीय संस्कृति और सामाजिक सौहार्द की झलक देखने को मिलती है।
अपने भविष्य की योजनाओं के बारे में अस्मा गुलजार ने बताया कि उन्होंने हाल ही में अपनी परफ्यूम लाइन लॉन्च की है और जल्द ही मेंसवियर सेगमेंट में भी कदम रखने वाली हैं। उनका लक्ष्य अपने ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत बनाना है।
अस्मा गुलजार को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें ब्रिटिश पार्लियामेंट अवॉर्ड, स्टारडस्ट ग्लोबल इंडियन आइकन अवॉर्ड और बीइंगशी यूनिवर्स अवॉर्ड जैसे सम्मान मिल चुके हैं। इसके अलावा उन्हें इंडो-रशियन सांस्कृतिक संबंधों में योगदान के लिए रशियन कल्चर सेंटर द्वारा भी सम्मानित किया गया है।
अपने काम, संघर्ष और सकारात्मक सोच के जरिए अस्मा गुलजार आज न केवल फैशन इंडस्ट्री में बल्कि समाज में भी एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर मेहनत, जुनून और आत्मविश्वास हो, तो किसी भी छोटे शहर से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंचा जा सकता।