बिहार: इमाम की बेटी 'नाहिद सुल्ताना' ने किया कमाल, मैट्रिक में 489 अंक लाकर किया टॉप

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 01-04-2026
Bihar: Imam's Daughter 'Nahid Sultana' Achieves a Remarkable Feat—Tops Matriculation Exam with 489 Marks.
Bihar: Imam's Daughter 'Nahid Sultana' Achieves a Remarkable Feat—Tops Matriculation Exam with 489 Marks.

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत और लगन से हर मंज़िल हासिल की जा सकती है। बेगूसराय जिले की नाहिद सुल्ताना ने इस बार अपने शानदार प्रदर्शन से राज्य में दूसरा स्थान हासिल किया और पूरे जिले में खुशी का माहौल बना दिया। साधारण परिवार से आने वाली नाहिद की यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे इलाके के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

बेगूसराय जिले की नाहिद सुल्ताना ने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 489 अंक हासिल किए और राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया। साधारण परिवार से आने वाली नाहिद की यह सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने समाज में मौजूद कई चुनौतियों और बाधाओं को पार कर यह मुकाम हासिल किया है। नाहिद की इस उपलब्धि से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरे इलाके में खुशी का माहौल बन गया है और लोग उन्हें बधाइयां देने के लिए लगातार जुटे हुए हैं।

नाहिद सुल्ताना बेगूसराय के राजकीयकृत उच्च विद्यालय, बनवारीपुर की छात्रा हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और परिवार व शिक्षकों के सहयोग को दिया। नाहिद ने बताया कि उन्होंने रोजाना छह से सात घंटे सेल्फ स्टडी की और सभी विषयों पर बराबर ध्यान दिया। इसके साथ ही उन्होंने ऑनलाइन क्लासेस और प्राइवेट ट्यूशन का भी सहारा लिया। उनकी मेहनत का नतीजा यह रहा कि उन्होंने उर्दू में 98 अंक और गणित में 97 अंक हासिल किए, जो उनके मजबूत विषय रहे।

नाहिद ने कहा कि उन्हें शुरू से ही विश्वास था कि वह टॉप फाइव में जगह बनाएंगी और उनकी मेहनत रंग लाई। कठिन समय में उनके बड़े भाई मो. दानिश ने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया और उन्हें मोटिवेट किया। नाहिद ने बताया कि उनके भाई ने पढ़ाई का सही रोडमैप समझाया और हर विषय में मार्गदर्शन किया। उन्होंने कोई कोचिंग नहीं ली, बल्कि घर पर ही पढ़ाई करके यह सफलता प्राप्त की।

नाहिद की सफलता में उनके परिवार का योगदान भी अहम रहा। उनके पिता सोहराब आलम, जो बेंगलुरु में मस्जिद में इमाम हैं, और माता नूर सबा, जो गृहिणी हैं, ने हमेशा उनकी पढ़ाई में सहयोग किया। तीन भाइयों के बीच नाहिद इकलौती बहन हैं और उन्होंने बताया कि घरवालों का समर्थन उनके लिए सबसे बड़ी ताकत रहा। विद्यालय के शिक्षक भी उनकी सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं। नाहिद ने बताया कि पढ़ाई के दौरान उन्हें सभी विषयों में शिक्षकों का मार्गदर्शन मिला, जिससे उनकी तैयारी मजबूत हुई।

नाहिद की यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने सामाजिक धारणाओं और अल्पसंख्यक समुदाय में लड़कियों की शिक्षा को लेकर मौजूद कई बाधाओं को चुनौती दी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते हुए यह मुकाम हासिल किया। उनके इस प्रयास ने पूरे इलाके में प्रेरणा और उत्साह का संचार किया है। रिजल्ट आने के बाद उनके परिवार ने मिठाई खिलाकर खुशी जताई और पूरे गांव में जश्न जैसा माहौल बन गया।

नाहिद ने अपने भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया कि उनका सपना आगे चलकर मेडिकल की पढ़ाई करना है ताकि वह समाज और देश के लिए कुछ अच्छा कर सकें। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में कई लोगों की असमय मौत ने उन्हें बहुत प्रभावित किया और इसी कारण उन्होंने तय किया कि वह डॉक्टर बनकर जरूरतमंद लोगों की मदद करेंगी। नाहिद ने अन्य छात्रों को भी संदेश दिया कि अगर मन में कुछ करने का जज्बा हो तो कोई भी मुश्किल रास्ता रोक नहीं सकता।

बिहार स्कूल एग्ज़ामिनेशन बोर्ड द्वारा जारी 10वीं कक्षा के रिजल्ट में नाहिद सुल्ताना ने पूरे राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त किया। उन्होंने कुल 489 अंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि मेहनत, सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। नाहिद बेगूसराय जिले के भगवानपुर प्रखंड, बनवारीपुर पंचायत के वार्ड नंबर 11 की रहने वाली हैं। उनके पिता गांव की मस्जिद में इमाम हैं जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इसी गांव से वर्ष 2006 में भी टॉप 5 की छात्रा आई थी और अब 20 साल बाद नाहिद ने यह गौरव हासिल किया।

नाहिद की सफलता का मुख्य आधार उनकी सेल्फ स्टडी और अनुशासन रहा। उन्होंने बताया कि वह रोजाना 6 से 7 घंटे पढ़ाई करती थीं और सभी विषयों पर समान ध्यान देती थीं। उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों का उपयोग किया। उन्होंने अपने भाई मो. दानिश को अपनी सफलता का श्रेय दिया जिन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया और कठिन समय में उनका उत्साह बनाए रखा।

नाहिद अब 12वीं में साइंस लेकर अच्छे अंक लाना चाहती हैं और आगे मेडिकल की पढ़ाई कर डॉक्टर बनना चाहती हैं। उनका लक्ष्य समाज सेवा करना और जरूरतमंद लोगों की मदद करना है। उनकी कहानी न केवल छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत है बल्कि यह साबित करती है कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। नाहिद सुल्ताना ने यह दिखा दिया कि सामाजिक बाधाओं और व्यक्तिगत कठिनाइयों के बावजूद यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार की जाए तो सफलता निश्चित है।

 

 

 

 

 

 

 

बेगूसराय जिले और खासकर बनवारीपुर पंचायत में नाहिद की इस सफलता ने नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार किया है। उनके प्रयासों ने साबित किया कि मेहनत, आत्मविश्वास और परिवार व शिक्षकों के सहयोग से हर छात्र अपने सपनों को साकार कर सकता है। नाहिद की यह उपलब्धि बिहार के लिए गर्व का कारण बन गई है और पूरे राज्य में उनकी कहानी प्रेरणा का उदाहरण बनकर सामने आई है।