अनिरुद्ध
भारत में रह रहीं बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हाल ही में जून और जुलाई 2026 के अपने इंटरव्यू में ढाका लौटने की इच्छा जताई है।उन्होंने साफ कहा है कि वह इस साल के अंत तक, यानी दिसंबर के आसपास बांग्लादेश वापस लौट सकती हैं।शेख हसीना ने बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) द्वारा उन्हें सुनाई गई मौत की सजा के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है।उन्होंने इस फैसले को पूरी तरह असंवैधानिक और राजनीति से प्रेरित बताया है।उनका मानना है कि यह सब उनकी पार्टी, अवामी लीग को कमजोर करने और राजनीतिक बदला लेने के लिए किया जा रहा है।
अपनी वापसी की चुनौतियों पर बात करते हुए हसीना ने कहा कि उन्हें मौत का कोई डर नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि 1975 में उन्होंने अपने माता-पिता और भाइयों सहित लगभग पूरे परिवार को खो दिया था। इसके बाद 21 अगस्त को भी उन पर ग्रेनेड से जानलेवा हमला हुआ था। उनके खिलाफ कई साजिशें रची गईं, लेकिन वे पीछे नहीं हटीं। इन बयानों से उनका इरादा बेहद मजबूत दिखता है।
लेकिन हकीकत में उनकी वापसी इतनी आसान नहीं है। यह सिर्फ उनके बांग्लादेश में कदम रखने का मामला नहीं है। 2024 में तख्तापलट के बाद वहां का पूरा राजनीतिक माहौल बदल चुका है। उनके सामने कई बड़ी कानूनी और सामाजिक मुश्किलें खड़ी हैं।

कानूनी पेचीदगियां और मौत की सजा का खतरा
शेख हसीना की राह में सबसे बड़ा रोड़ा इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल का फैसला है।साल 2024 में हुए छात्र आंदोलन को दबाने के लिए सुरक्षा बलों ने भारी ताकत का इस्तेमाल किया था।संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट के मुताबिक इस हिंसा में लगभग 1400 लोगों की जान गई थी।इसी मामले में कोर्ट ने हसीना को दोषी मानते हुए उनकी गैर-मौजूदगी में मौत की सजा सुनाई है।
भले ही हसीना इन आरोपों को मनगढ़ंत और राजनीति से प्रेरित कह रही हैं, लेकिन ढाका का मौजूदा प्रशासन इस दलील को कतई स्वीकार नहीं करेगा।बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और अंतरिम सरकार की पूरी साख ही पिछली सरकार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पर टिकी है।
अगर वे हसीना को बिना किसी कानूनी कार्रवाई के देश में आने देते हैं, तो जनता का गुस्सा फिर से भड़क सकता है। इससे वहां चल रही लोकतांत्रिक सुधार की प्रक्रिया को भी धक्का लगेगा।मौजूदा हालात को देखकर लगता है कि शेख हसीना जैसे ही पैर रखेंगी, उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया जाएगा।

बांग्लादेश की जनता का मूड
दूसरा सबसे बड़ा सवाल जनता के नजरिए का है। 2024 का आंदोलन सिर्फ सत्ता बदलने के लिए नहीं था। वह हसीना सरकार के कथित तानाशाही रवैये, गिरती अर्थव्यवस्था और भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों का सालों से जमा गुस्सा था।
हालांकि शेख हसीना के 15 साल के शासनकाल में बांग्लादेश दक्षिण एशिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ, लेकिन इसी दौरान उन पर विपक्ष को दबाने और अभिव्यक्ति की आजादी छीनने के गंभीर आरोप भी लगे।
बांग्लादेश का एक बड़ा हिस्सा इस बदलाव को देश को लोकतांत्रिक तरीके से दोबारा खड़ा करने के मौके के रूप में देखता है।शेख हसीना भले ही कह रही हैं कि वे लोगों के अधिकारों और लोकतंत्र के लिए लड़ना चाहती हैं, लेकिन आम जनता आसानी से उनकी बातों पर भरोसा नहीं करने वाली।हिंसा और कार्रवाई की यादें अभी भी लोगों के जेहन में ताजा हैं।ऐसे माहौल में अवामी लीग के लिए अपनी राजनीतिक साख वापस पाना बेहद मुश्किल होगा।

पार्टी का बिखराव और भविष्य
हसीना का कहना है कि वापसी के लिए एक सही और निष्पक्ष लोकतांत्रिक माहौल होना जरूरी है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अवामी लीग को एंटी-टेररिज्म एक्ट के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया है।
2024 के बाद से पार्टी के दफ्तर बंद हैं और इसके नेताओं पर हजारों मुकदमे दर्ज हैं।ज्यादातर बड़े नेता या तो जेल में हैं या देश छोड़कर भाग चुके हैं। ऐसे में अवामी लीग का दोबारा खड़ा होना नामुमकिन सा लगता है।
शेख हसीना का यह भी मानना है कि अगर उनका मामला इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) में चले, तो वहां उन्हें पूरा न्याय मिलेगा।वे बीएनपी सरकार के साथ बातचीत के जरिए एक सम्मानजनक राजनीतिक रास्ता निकालने के लिए भी तैयार दिखती हैं। मगर वर्तमान परिस्थितियों में इसकी गुंजाइश बेहद कम है।
VIDEO | Dhaka, Bangladesh: "Sheikh Hasina must return to Bangladesh. We are ready to welcome her warmly," says Nahida Luna, Bangladesh Chhatra League (student wing of Awami League) leader.
— Press Trust of India (@PTI_News) July 10, 2026
Bangladesh's deposed prime minister Sheikh Hasina is preparing to voluntarily return to… pic.twitter.com/MJDVMzKqog
क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक चाल है?
इन सब बातों को देखते हुए शेख हसीना की जल्द वापसी की उम्मीदें बहुत कम नजर आती हैं। जानकार मानते हैं कि उनका यह बयान एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति हो सकता है।इससे वे अपने बचे हुए कार्यकर्ताओं और समर्थकों को यह संदेश देना चाहती हैं कि अवामी लीग अभी खत्म नहीं हुई है।
दूसरा, खुद को जनता के अधिकारों के लिए लड़ने वाली नेता के रूप में पेश करके वे अपने पक्ष में थोड़ी सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रही हैं। उनकी यह कोशिश कितनी कामयाब होती है, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
इस विषय को गहराई से समझने के लिए आपNDTV Exclusive with Sheikh Hasina देख सकते हैं, जिसमें शेख हसीना ने बांग्लादेश की राजनीति, अवामी लीग के भविष्य और अपनी वापसी की योजनाओं पर विस्तार से बात की है।
(अनिरुद्ध दिल्ली यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट में जूनियर रिसर्च फेलो हैं। उनकी रुचि का क्षेत्र सिक्योरिटी स्टडीज़ और इंटरनेशनल पॉलिटिक्स है। इससे पहले, उन्होंने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी और ICSSR में रिसर्च एसोसिएट के तौर पर काम किया है।)