सबकी सोच बदलने की एक कोशिश

Story by  हरजिंदर साहनी | Published by  [email protected] | Date 15-01-2026
An attempt to change everyone's mindset.
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d हरजिंदर

कहा जाता है कि समाज की समस्याओं से लड़ने का सबसे अच्छा हथियार है साहित्य। बदकिस्मती से इस समय जब ऐसी समस्याएं बढ़ रही हैं, इनके खिलाफ साहित्य का इस्तेमाल बहुत कम हो गया है। बहुत से साहित्य लिखने वालों ने यह मान लिया है कि यह उनका काम नहीं है और कईं लोग तो ऐसे हैं जो साहित्य को इस नजरिये से देखते भी नहीं हैं।लेकिन अमेरिकी डाॅक्टर सीमा यास्मीन ऐसे लोगों में नहीं हैं। हालांकि वे मेडिकल प्रोफेशन से जुड़ी हैं और इस क्षेत्र में उनका खासा नाम भी है, उन्हें बहुत सारे पुरस्कार भी मिले हैं। इसके साथ ही वे लिखने का काम भी लगातार करती हैं और उनकी किताबें भी पुरस्कार जीतती रही हैं।

ब्रिटेन में जन्मी और वहीं पर अपनी मेडिकल पढ़ाई करने वाली सीमा 2010 में अमेरिका आईं और फिर यहीं बस गईं। वे उस अमेरिका में पहंुची थीं जिसे ‘पोस्ट नाईन इलेवेन अमेरिका‘ कहा जाता है। उस आतंकवादी हमले के बाद पूरे अमेरिका में मुसलमानों को शक की नजर से देखा जाने लगा था। ये पूर्वाग्रह अभी भी जारी हैं, बल्कि कईं मामलों में तो बढ़ ही रहे हैं। इसी से जुड़ी प्रतिक्रियाओं को इस्लामफोबिया का नाम दिया गया है।

हालांकि सीमा यास्मीन का शुरुआती लेखन अपने पेशे से ही संबंधित था। उन्होंने कईं रिसर्च पेपर तो लिखे ही साथ ही आम पाठकों के लिए भी किताबें लिखीं। उनकी एक चर्चित किताब है- ‘व्हाट द फैक्ट?‘ जिसमें वे अफवाहों और फेक न्यूज़ का सच बताती हैं।

साल 2020 में उन्होंने एक और किताब लिखी - ‘मुस्लिम वुमन आर एवरीथिंग‘। इस किताब में वे अमेरिकी लोगों के मन में मुस्लिम औरतों के बारें में जो धारणाएं घर कर गई हैं उन्हें तोड़ने की कोशिश करती दिखाई देती हैं। इसमें ऐसी मुस्लिम औरतों के बारे में बताया गया है जो विभिन्न पदों पर पहंुची। इस किताब को भी कई पुरस्कार मिले। दोनों ही किताबें इस समय भारत में भी उपलब्ध हैं।

जल्द ही यास्मीन को समझ में आ गया कि इतना ही काफी नहीं है। उन्होंने यह देखा कि ज्यादातर लोकप्रिय साहित्य, फिल्मों और टीवी सीरियलों में मुसलमानों को नकारात्मक छवि के साथ पेश किया जा रहा है। इसी से लोगों की धारणा बनती हैं और फिर वह मजबूत होती जाती है। उन्होंने यह भी पाया कि बच्चों के साहित्य में ऐसे मुस्लिम पात्र ही नहीं है जिससे बच्चे मुसलमानों को अपने जैसे ही लोग समझने लगें।

और इसी समझ के साथ उन्होंने इस बार बच्चों के लिए एक किताब लिखी है।उनकी ताजा किताब है- ‘द ट्रयू स्टोरी आॅफ मेसून जईद‘। यह अमेरिका के एक मुस्लिम परिवार में पैदा हुई एक ऐसी बच्ची की कहानी है जो विकलांग है। इसके बावजूद उसके पास कईं सपने हैं और फिर उन्हीं सपनों से एक दिन वह कामयाब होकर दिखाती है।

इस बार भी उन्होंने मुसलमानों के बारे में प्रचलित धारणाओं को तोड़ने की कोशिश की है। इस किताब के बारे में वे कहती हैं, ‘मेरे लिए यह जरूरी था कि मैं बच्चों को यह भी समझाने की कोशिश करूं कि तब आप क्या करें जब लोग यह कह रहे हों कि तुम बहुत अच्छे नहीं हो।‘सीमा यास्मीन जो कर रही हैं वह सिर्फ एक प्रयास है, जबकि आज की दुनिया को ऐसे बहुत से प्रयासों की जरूरत है। 

 ( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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