पंडित नेहरू, खामेनेई और बदलती दुनिया की हकीकत

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 02-03-2026
Pandit Nehru, Khamenei and the truth of the acceptable world
Pandit Nehru, Khamenei and the truth of the acceptable world

 

मलिक असगर हाशमी

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनके जाने के बाद पश्चिम एशिया के समीकरण पूरी तरह उलझ गए हैं। इजरायल और अमेरिका के साझा ऑपरेशनों ने ईरान को हिला कर रख दिया है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने जिस तरह खाड़ी देशों (गल्फ देशों) पर मिसाइलें और ड्रोन दागे, उससे मुस्लिम जगत में भी दरार आ गई है। मुस्लिम वर्ल्ड लीग और ओआईसी जैसे संगठनों ने ईरान के इस कदम की तीखी आलोचना की है। इस तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई के शासकों से फोन पर बात कर अपनी चिंता जताई है। यह बदलते वैश्विक रिश्तों की एक बानगी है।

लेकिन इस भारी तनाव और युद्ध की खबरों के बीच सोशल मीडिया पर एक अलग ही चर्चा छिड़ी है। लोग खामेनेई के उन पुराने वीडियो को खूब शेयर कर रहे हैं जिनमें वे भारत और पंडित जवाहरलाल नेहरू की तारीफ करते दिखते हैं। खामेनेई का भारत को लेकर नजरिया हमेशा एक जैसा नहीं रहा। कई मौकों पर उन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर भारत की आलोचना भी की। भारत का एक बड़ा वर्ग इस वजह से उनसे नाराज भी रहता था। इसके बावजूद, खामेनेई के मन में भारत की आजादी की लड़ाई और पंडित नेहरू के प्रति एक खास तरह का सम्मान था।

खामेनेई अक्सर ईरान के युवाओं को संबोधित करते हुए भारत का जिक्र करते थे। वे चाहते थे कि ईरानी नौजवान भारत की आजादी के संघर्ष और नेहरू की जीवनी से सबक लें। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में खामेनेई नेहरू की मशहूर किताब 'ग्लिम्पसेस ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री' (विश्व इतिहास की झलकियां) पढ़ने की पुरजोर वकालत कर रहे हैं। वे कहते हैं कि अगर किसी को यह समझना है कि पश्चिमी देशों ने किस तरह साम्राज्यवाद के जरिए भारत को गुलाम बनाया और लूटा, तो उसे नेहरू को जरूर पढ़ना चाहिए।

पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और बॉलीवुड के कलाकार इस वीडियो को बड़े चाव से साझा कर रहे हैं। फिल्म क्रिटिक केआरके ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि एक पढ़ा-लिखा इंसान ही ज्ञान की कद्र कर सकता है। वहीं पत्रकार गोविंद प्रताप सिंह ने लिखा कि खामेनेई ने विस्तार से बताया था कि कैसे अंग्रेजों ने भारत आकर अपनी 'करतूतें' दिखाईं और नेहरू ने उसे कितनी बखूबी अपनी किताब में दर्ज किया।

सोशल मीडिया पर इन वीडियो को शेयर करने के पीछे एक राजनीतिक संदेश भी है। विपक्षी खेमे और नेहरू समर्थकों का कहना है कि जब पूरी दुनिया नेहरू के विजन और उनकी विद्वत्ता का लोहा मानती है, तब भारत में ही कुछ लोग उनका मजाक उड़ाते हैं। खामेनेई का वह भाषण आज के दौर में नेहरू की विरासत पर हो रही बहस को एक नई दिशा दे रहा है।

खामेनेई और प्रधानमंत्री मोदी के रिश्तों की बात करें तो वे काफी हद तक कूटनीतिक और गर्मजोशी भरे रहे। दोनों नेताओं की मुलाकात की कई तस्वीरें आज भी इंटरनेट पर मौजूद हैं। चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स ने दोनों देशों को करीब लाने का काम किया। लेकिन खामेनेई की मौत और उसके बाद ईरान की आक्रामक सैन्य नीति ने भारत को भी संभलकर चलने पर मजबूर कर दिया है। ईरान ने जब खाड़ी देशों पर हमले किए, तो भारत के लिए अपने पुराने दोस्तों (यूएई और सऊदी अरब) के साथ खड़ा होना जरूरी हो गया।

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 आज जब खाड़ी देश ईरान से दूरी बना रहे हैं, तब भारत की कूटनीति भी अपनी भलाई और वैश्विक शांति को ध्यान में रखकर कदम बढ़ा रही है। भारत ने ईरान पर हमलों के बाद पैदा हुई स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। पीएम मोदी का यूएई के हुक्मरानों को फोन करना इसी रणनीति का हिस्सा है। भारत नहीं चाहता कि पश्चिम एशिया में युद्ध की आग और भड़के, क्योंकि वहां लाखों भारतीय रहते हैं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी उसी क्षेत्र पर टिकी है।

खामेनेई के जाने के बाद अब ईरान का भविष्य क्या होगा, यह बड़ा सवाल है। लेकिन उनके पुराने बयानों ने भारत में एक नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ कट्टरपंथी विचारधारा और युद्ध का शोर है, तो दूसरी तरफ नेहरू की किताबों और इतिहास के सबक हैं। खामेनेई का नेहरू प्रेम यह बताता है कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद, ज्ञान और संघर्ष की कहानियाँ सरहदें लांघ कर लोगों को प्रभावित करती हैं। ईरान और भारत के रिश्ते अब किस करवट बैठेंगे, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन नेहरू की वह 'विश्व इतिहास की झलक' आज भी ईरान से लेकर भारत तक अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है।