विपरीत हालात में आईशा वहाब की जीत

Story by  हरजिंदर साहनी | Published by  [email protected] | Date 24-08-2026
Aisha Wahab triumphs against the odds
Aisha Wahab triumphs against the odds

 

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कैलीफोर्निया में सीनेटर के लिए हुए उपचुनाव में आईशा वहाब की जीत अमेरिका के वर्तमान के बारे में बहुत कुछ कहती है। आईशा अफगान मूल की अमेरिकी नागरिक हैं और उन्होंने यह चुनाव एक बड़े अंतर से उस अमेरिका में जीता है जहां पिछले कुछ समय से इस्लामफोबिया को लगातर हवा दी जा रही है।

नफरत फैलाने वाली ताकते पिछले कुछ समय से वहां मजबूत हो रही हैं और वे खासकर उन मुसलमानों को लेकर कुछ ज्यादा ही सक्रिय हो जाती हैं जो वहां राजनीति में कोई भूमिका निभाना चाहते हैं।

ठीक यहीं पर अमेरिकी समाज का एक विरोधाभास भी है। अमेरिका के कईं हिस्सों में लोग उन योग्य मुस्लिम उम्मीदवारों को बड़े पदों के लिए लगातार चुन रहे हैं, जिन पर उन्हें भरोसा है कि वे अच्छे नुमाइंदे साबित हो सकते हैं।

अमेरिका के राजनीतिक परिदृश्य का यह सिलसिला उस समय काफी बड़े स्तर पर दिखाई दिया था जब जोहरान ममदानी ने न्यूयाॅर्क के मेयर पद का चुनाव लड़ा था। तब पहले तो इस्लामफोबिया पैदा करने की कोशिश की गई लेकिन बाद में जब दाल गलती नहीं दिखाई दी तो यह कहा गया कि वे यहूदी विरोधी हैं। अमेरिका में ऐसा प्रचार अभियान पर काफी अध्ययन भी किए गए।

हालांकि ये सारी कोशिशें काम नहीं आईं थी और ममदानी काफी अंतर से चुनाव जीत गए थे। यह बात अलग है कि उनके चुनाव जीतने के बाद भी उनके चुनाव जीतने के खिलाफ अभी भी उसी तरह का प्रचार हो रहा है।

ठीक ऐसा ही डियरबार्न के मेयर अब्दुल्ला हमूद के साथ हुआ। उनके खिलाफ इस समय स्थानीय स्तर पर जिस तरह का दुष्प्रचार चल रहा है उसने कईं अमेरिकी समाजशास्त्रियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। वहां यह कहा जा रहा है कि इस्लाम अमेरिकी मूल्यों के साथ मेल नहीं खाता और उसे अमेरिकी सभ्यता के लिए खतरा बताया जा रहा है। जबकि पहले उसे सुरक्षा के लिए खतरा बताया जाता था।

इतना ही नहीं उनके खिलाफ क्रिश्चियन क्रूसेडर मार्च शुरू किए गए हैं। न्यूयाॅर्क टाईम्स की एक  ताजा रिपोर्ट के अनुसार नफरत फैलाने का यह सिलसिा इस साल जनवरी से काफी बढ़ गया है। हालात कितने खराब हैं इसका अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों अब्दुल्ला हमूद जब अपने इलाके के लोगों से संपर्क कर रहे थे तो एक सात साल के बच्चे ने उनसे आकर यह कहा कि ‘क्रूसेडर‘ आप की जान ले सकते हैं।

ये नुमाइंदे ऐसे इलाकों से भी जीत रहे हैं जहां मुस्लिम समुदाय की आबादी बहुत ज्यादा नहीं है। मतदाताओं को बहुमत उन्हें वोट दे रहा है इसका मतलब यह है कि वहां के ज्यादातर लोग नफरत अभियान का शिकार नहीं बने हैं। लेकिन राजनीतिक और सामाजिक जीवन में बहुत कम लोग भी बहुत बड़ी परेशानियां खड़ी कर सकते हैं, और यही हो रहा है।

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आईशा वहाब ने अभी सिर्फ उप-चुनाव जीता है। यानी उनका कार्यकाल बहुत कम समय का ही रहेगा और फिर एक बार उन्हें मतदाताओं के सामने जाना होगा। अमेरिका में मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है- तमाम विपरीत परिस्थितियों में उनकी जीत।

( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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