नफरत के माहौल में समझदारी से बनती एक उम्मीद

Story by  हरजिंदर साहनी | Published by  [email protected] | Date 25-05-2026
A hope born of wisdom amidst an atmosphere of hatred.
A hope born of wisdom amidst an atmosphere of hatred.

 

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हरजिंदर

मैक्सिको की सीमा पर बसे अमेरिकी शहर सैन डियागो में जो हुआ वह डराने वाला है। नफरत जब लोगों की जान लेने पर उतारू हो तो ऐसी दर्दनाक घटनाओं के बाद क्या किया जाना चाहिए इसकी सीख भी हम इस शहर से ले सकते हैं।

भीड़भाड़ वाले इस शहर की एक रिहाइशी आबादी के पास अमेरिकन इस्लामिक रिलेशंस नाम के संगठन का शाखा कार्यालय है। यही पर एक मस्जिद भी है और छोटे बच्चों का एक स्कूल भी है जिसमें लगभग 150 बच्चे पढ़ते हैं।

पिछले हफ्ते दो बंदूकधारी नौजवान गोलियां दागते हुए इसी स्कूल में घुस गए। उस समय स्कूल में 140 बच्चे थे। वे बच्चों तक तो नहीं पहुंच सके लेकिन उन्हें रोकने और पकड़ने की कोशिश में तीन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

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पुलिस जांच में पता पड़ा कि पकड़े गए नौजवानों ने नफरत का यह पाठ इंटरनेट पर सीखा था। पूछताछ में पता पड़ा कि उनके मन में मुसलमानों ही नहीं यहूदियों और एलजीबीटी समूह के लोगों के प्रति समान नफरत थी। ये भी पता चला कि ये नौजवान उस विचारधारा से प्रभावित थे जिसे व्हाइट सुपमेसिस्ट कहा जाता है।

यानी वे लोग जो मानते हैं कि उनके देश में श्वेत लोगों के अलावा बाकी किसी को रहने का कोई अधिकार नहीं।बाद में जब पुलिस ने इन नौजवानों और उनके साथ जुड़े लोगों के यहां छापे मारे तो उन्हें 30 बंदूकें मिली।
वैसे सैन डियागों के लिए इस तरह की नफरत कोई नई नहीं है।

2023 में इसी शहर के इस्लामिक सेंटर के अहाते में नफरत भरे पर्चे फेंके गए। कुछ ही दिनों में ऐसे फेके जाने वाले पर्चों की बाढ़ आ गई तो आखिर वहां पुलिस तैनात करनी पड़ी।इसके पहले 2019 में यहां के यहूदी धार्मिक केंद्र में एक बंदूकधारी ने हमला करके एक व्यक्ति की जान ले ली थी। हाल के वर्षों में भी यहां के यहूदी केंद्रों और स्कूलों में उत्पात मचाने की खबरें आती रही हैं।

खुद सरकार के आंकड़ें बताते हैं 2024-25 में सैन डियागों में दूसरे अपराधों यहां तक कि जातीय नफरत के अपराधों में कमी आई लेकिन धार्मिक नफरत की वारदातों में 150 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।इन तथ्यों और आंकड़ों से हम समझ सकते हैं कि सैन डियागो के सभी अल्पसंख्यक किस खौफ के साए में जी रहे हैं।

पिछले हफ्ते की वारदात के बाद इसे लेकर जब सैन डियागो स्टेट यूनिवर्सिटी में शोक सभी हुई तो इसमें सभी धर्मों के लोग शामिल थे। शायद इस अहसास के साथ कि यह नफरत किसी एक समुदाय की दुशमन नहीं यह सबको तबाह कर देगी।

बच्चों को बचाने के लिए अपनी जान गंवाने वाले तीन नायकों को श्रद्धांजलि दी गई लेकिन  वहां सिर्फ शोक था किसी तरह को आक्रोश नहीं। वहां नफरत को मिटाने की बात की गई तो उसमें कोई आक्रामकता नहीं थी।
यही रवैया इसके पहले वारदात की जगह पर हुई सभाओं में भी दिखाई दिया।

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नफरत की वारदात करने वालों के दो मकसद होते हैं। एक तो दहशत पैदा करना और दूसरा लोगों को भड़काना ताकि वे प्रतिक्रिया दें और समाज को बांटने का उनका काम और आसान हो जाए।सैन डियागो के लोगों ने भड़कने से इनकार कर दिया, यह नफरत फेलाने वालों की सबसे बड़ी हार है। अब इन लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती समझदारी के इस सिलसिले को बरकरार रखने की है। 

( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)


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