मुस्लिम बुद्धिजीवी बोले, इजरायल-फिलिस्तीन मामले में मानवाधिकार का करें आदर

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] • 4 Months ago
Muslim intellectuals said – support the country's policy in Israel issue
Muslim intellectuals said – support the country's policy in Israel issue

 

आवाजा द वॉयस /नई दिल्ली

हमास और इजरायल के बीच जारी संघर्श को लेकर देश के कतिपय मुस्लिम बुद्धिजीवियों एवं इस्लामिक विद्वानों ने भारत सरकार की नीतियों का समर्थन किया है. इनका कहना है कि हर तरह की हिंसा का विरोध होना चाहिए.प्रमुख इस्लामिक विद्वान .मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने दोनों पक्षों से मानवाधिकार का आदर करने की अपील की है.

डॉ. ख्वाजा इफ्तिखार अहमद ने कहा कि मेरा मानना है कि जब कोई संघर्ष बहुत लंबा खिंच जाता है तो उसका अंत हिंसा के रूप में होता है.1948 में जब इजराइल एक स्वतंत्र देश के रूप में अस्तित्व में आया तो दुनिया भर के यहूदियों को अपना देश मिल गया. लेकिन फिलिस्तीनी अभी भी अपने देश की स्थापना का इंतजार कर रहे हैं और संघर्ष कर रहे हैं.

दरअसल, इस समय मध्य पूर्व समस्या का समाधान सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन के बीच है, इसलिए बातचीत बहुत शांति से चल रही है. माना जा रहा है कि इजरायल और फिलिस्तीनियों के बीच एक स्वीकार्य समझौता लगभग तैयार है. ऐसी संभावना है कि जल्द ही कोई स्थायी समाधान निकल जाएगा, लेकिन दुर्भाग्य से इस पर हमला हो गया.

उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि सऊदी अरब और ईरान के बीच क्षेत्र में वर्चस्व का मामला है. इसमें कोई संदेह नहीं है कि सऊदी अरब का वर्चस्व है, जबकि ईरान उसे चुनौती देता रहता है. मामले में यह पहलू भी संभव है. मैं यह नहीं कह रहा कि ईरान जिम्मेदार है, लेकिन यह कारक संभव है.

ख्वाजा इफ्तिखार अहमद ने कहा कि एक शांतिप्रिय नागरिक के तौर पर मौजूदा हालात बेहद दर्दनाक हैं. हजारों लोगों की जान जा रही है. चाहे वे फिलिस्तीनी हों या इजरायली.यह मानवता के लिए ठीक नहीं.पेशे से चिकित्सक एवं पसमांदा आंदोलन के प्रमुख एक्टिविस्ट डॉ. फैयाज अहमद फैजी ने कहा कि वह भारत सरकार के स्टैंड के साथ हैं.

देश के तमाम मुसलमानों का भी यही स्टैंड होना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमास ने पहले हिंसा की शुरूआत की है. वह हर तरह के हिंसा के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा कि हमास ने  मानवाधिकार का उल्लंघन किया है, जो इस्लाम और मानवता विरोधी है.

उन्होंने हमास के समर्थन में अलीगढ़ सहित देश के कुछ हिस्से में मुसलमानों द्वारा किए गए प्रदर्शन का विरोध किया. डॉ फैयाज ने कहा कि यदि इजरायल के हमले में कोई निर्देष फलस्तीनी मारा जाता है. उसके विरोध में यदि कोई प्रदर्षन करता है तो वह उसके साथ हैं.

इस्लाम में एक चींटी तक को  मारने की मनाही है और ऐसे में इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष में आखिरकार हानी तो प्राणियों की ही हो रही है जोकि सरासर इस्लाम और मानवता के विरुद्ध है.इस जंग की जमीयत उलेमा फरीदाबाद के अध्यक्ष मौलाना जमालुद्दीन ने कड़ी शब्दों में निंदा की और कहा की इतिहास गवाह है भारत हमेशा हिंसा से परे रहा है.

इस युद्ध से दोनों देशों में काफी नुकसान हो रहा है.लोग सहमे हुए है.कारोबार भी ठप्प हो गया है. मौलाना जमालुद्दीन ने भारत वासियों से अपील की कि शांति और अमन के लिए उनको इस जंग में किसी का भी पक्ष न लेते हुए भारत सरकार पर भरोसा करना चाहिए.

उन्होनें आवाज द वॉयस के माध्यम से भारत सरकार से इस जंग को रोकने की अपील की, कहा कि जंग से कभी भी मानव जाती का भला नहीं हुआ है. मैं ऊपर वाले से दुआ करता हूँ कि उन लोगों को सद्बुद्धि दे जो लोग ये उत्पात मचा रहें हैं और धरती और मानव जाति का नुकसान कर रहें हैं.

साथ ही जो लोग सड़क पर आकर आक्रोश प्रकट कर रहें हैं,उन्हें भी अपने घरों में ऊपर वाले से दुआ करनी चाहिए कि माहौल जल्द ठीक हो .सभी तरक्की की राह पर आगे बढ़ें.जम्मू-कश्मीर इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना हिलाल अहमद लोन ने कहा कि मानवता ही इस दुनिया और कायनात की पूंजी है.

मानवता के बिना दुनिया वीरान हो जाएगी, इसीलिए प्रकृति ने मानवता को सबसे मूल्यवान संपत्ति घोषित किया है. इजराइल और हमास के बीच युद्ध में सबसे बड़ी क्षति मानवता की है.मानव जीवन की क्षति को किसी भी कीमत पर उचित नहीं ठहराया जा सकता.

उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान बातचीत से हो सकता है. मध्य पूर्व में भी ऐसा ही होगा, इसलिए युद्ध में शामिल होना किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता.  मौलाना हिलाल अहमद लोन ने कहा कि अगर हम भारतीय मुसलमानों की बात करें तो हम हमेशा शांति के पक्षधर रहे हैं और शांति को प्राथमिकता देते रहे हैं.

भारतीय मुसलमान भी चाहते हैं कि भारत सरकार दोनों पक्षों पर दबाव बनाए और इस युद्ध को रोके. शांति का रास्ता खोजें. भारतीय सभी आतंकवाद, हिंसा और सैन्य आक्रामकता के खिलाफ रहे हैं और हमेशा इसकी निंदा करते हैं.