रात में त्वचा की खुजली क्यों बढ़ जाती है? जानिए इसके कारण

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 18-09-2026
Why does skin itching worsen at night? Find out the reasons.
Why does skin itching worsen at night? Find out the reasons.

 

नई दिल्ली।

कई लोगों को दिन की तुलना में रात के समय त्वचा में अधिक खुजली महसूस होती है। दिनभर सामान्य रहने वाली त्वचा सोने के समय अचानक परेशान करने लगती है और कई बार खुजली इतनी बढ़ जाती है कि नींद भी प्रभावित होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, रात में खुजली बढ़ने के पीछे कोई एक कारण नहीं होता, बल्कि शरीर की आंतरिक घड़ी, हार्मोन में बदलाव, त्वचा की नमी और तापमान जैसे कई कारक एक साथ जिम्मेदार हो सकते हैं।

रात में कोर्टिसोल का स्तर घटता है

कोर्टिसोल शरीर में सूजन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला हार्मोन है। इसका स्तर दिनभर एक प्राकृतिक चक्र के अनुसार बदलता रहता है। शाम और रात के समय कोर्टिसोल का स्तर कम होने लगता है और सुबह दोबारा बढ़ता है।

रात में कोर्टिसोल कम होने से शरीर की कुछ सूजन संबंधी प्रक्रियाओं पर नियंत्रण अपेक्षाकृत कम हो सकता है। इससे त्वचा में खुजली या जलन की अनुभूति बढ़ सकती है।

2024 में Journal of Central South University में प्रकाशित एक समीक्षा में रात के समय खुजली बढ़ने के कई संभावित कारणों पर चर्चा की गई है। इनमें कोर्टिसोल में प्राकृतिक कमी, मेलाटोनिन में बदलाव, शरीर के तापमान में परिवर्तन और सूजन से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल हैं। शरीर की सर्कैडियन क्लॉक और उससे जुड़े कुछ जीन भी इन प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

रात में त्वचा की सुरक्षात्मक परत में बदलाव

त्वचा की बाहरी सुरक्षात्मक परत शरीर में नमी बनाए रखने और बाहरी जलन पैदा करने वाले तत्वों से बचाने में मदद करती है। रात के समय इस प्रक्रिया में बदलाव हो सकता है, जिससे त्वचा से पानी का नुकसान बढ़ सकता है।

इसे ट्रांसएपिडर्मल वॉटर लॉस (TEWL) के जरिए मापा जाता है। TEWL बढ़ने का मतलब है कि त्वचा से अधिक पानी बाहर निकल रहा है, जिससे त्वचा सूखी और संवेदनशील हो सकती है।

यह समस्या एक्जिमा या एटोपिक डर्मेटाइटिस से पीड़ित लोगों में अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। 2024 में Journal of Biological Rhythms में प्रकाशित एक छोटे अध्ययन में पाया गया कि एटोपिक डर्मेटाइटिस वाले लोगों में शाम के समय त्वचा की बाधा संबंधी कार्यक्षमता में बदलाव देखा गया।

हालांकि, इस अध्ययन में प्रतिभागियों की संख्या बहुत कम थी। इसलिए इस संबंध को पूरी तरह समझने के लिए बड़े स्तर पर शोध की जरूरत है। फिर भी, त्वचा का सूखापन और उसकी सुरक्षात्मक परत में बदलाव एक्जिमा, सोरायसिस और अन्य त्वचा संबंधी समस्याओं में रात की खुजली बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हो सकते हैं।

शरीर का तापमान भी हो सकता है वजह

रात में सोने की तैयारी के दौरान शरीर के आंतरिक तापमान में स्वाभाविक बदलाव होता है। वहीं, बिस्तर, कंबल और नाइटवियर के कारण त्वचा की सतह का तापमान बढ़ सकता है। तापमान में ये बदलाव खुजली से जुड़े तंत्रिका संकेतों को प्रभावित कर सकते हैं।

इसी वजह से बहुत गर्म कमरा, भारी कंबल या मोटे कपड़े कुछ लोगों में रात के समय खुजली को बढ़ा सकते हैं।

मनोवैज्ञानिक कारण भी हो सकते हैं जिम्मेदार

रात में खुजली बढ़ने में ध्यान और मानसिक स्थिति की भी भूमिका हो सकती है। दिन में व्यक्ति काम या दूसरी गतिविधियों में व्यस्त रहता है, इसलिए त्वचा की हल्की खुजली पर उसका ध्यान कम जाता है। रात में जब आसपास की गतिविधियां कम हो जाती हैं और व्यक्ति आराम कर रहा होता है, तो उसका ध्यान शरीर की संवेदनाओं पर अधिक केंद्रित हो सकता है। इससे खुजली अधिक तीव्र महसूस हो सकती है।

रात में खुजली से बचने के लिए क्या करें?

रात में खुजली कम करने के लिए कुछ सामान्य उपाय मददगार हो सकते हैं—

  • सोने से पहले मॉइस्चराइजर लगाएं। रिच मॉइस्चराइजर त्वचा में नमी बनाए रखने और सूखापन कम करने में मदद कर सकता है।
  • कमरे को बहुत गर्म न रखें। अत्यधिक गर्मी खुजली बढ़ा सकती है।
  • बहुत गर्म पानी से न नहाएं। गर्म पानी त्वचा का सूखापन और जलन बढ़ा सकता है।
  • ढीले और हवादार कपड़े पहनें। सूती कपड़े गर्मी और त्वचा के घर्षण को कम कर सकते हैं।
  • नए उत्पादों पर ध्यान दें। खुजली हाल में शुरू हुई है तो नए साबुन, डिटर्जेंट, परफ्यूम या स्किन केयर उत्पाद इसके संभावित कारण हो सकते हैं।
  • खुजली करने से बचें। बार-बार खुजलाने से त्वचा की सुरक्षात्मक परत को नुकसान पहुंच सकता है और खुजली का चक्र और बढ़ सकता है।

अगर खुजली लगातार बनी रहती है, बहुत ज्यादा है, नींद प्रभावित कर रही है या इसके साथ त्वचा पर लाल चकत्ते, घाव, सूजन या अन्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है। एक्जिमा, सोरायसिस या किसी अन्य त्वचा रोग से पीड़ित लोगों को डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार का ही पालन करना चाहिए। दवा या उपचार में बदलाव डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।