नई दिल्ली
फैटी लिवर की समस्या को अक्सर मोटापे से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह सामान्य वजन वाले या दुबले लोगों को भी हो सकती है। अच्छी बात यह है कि शुरुआती चरण में फैटी लिवर को कई मामलों में दवाओं के बजाय जीवनशैली में बदलाव के जरिए काफी हद तक नियंत्रित और बेहतर किया जा सकता है।
फैटी लिवर को अब आमतौर पर मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) कहा जाता है। इसमें लिवर में जरूरत से ज्यादा वसा जमा हो जाती है और अक्सर इसका संबंध इंसुलिन प्रतिरोध, टाइप-2 डायबिटीज, बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी जैसी स्थितियों से होता है।
फैटी लिवर में सुधार के लिए अचानक ‘डिटॉक्स’ या बहुत सख्त डाइट अपनाना जरूरी नहीं है। इसके बजाय खान-पान, शारीरिक गतिविधि और वजन प्रबंधन में ऐसे स्थायी बदलाव करना अधिक महत्वपूर्ण है, जिन्हें लंबे समय तक दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सके।
कई मामलों में, खासकर बीमारी का शुरुआती चरण होने पर, जीवनशैली में बदलाव से लिवर में जमा वसा और सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है। शरीर के वजन में करीब 3 से 5 प्रतिशत की कमी भी लिवर में जमा वसा को कम करने में सहायक हो सकती है। अधिक वजन या मोटापे वाले लोगों में लिवर की सूजन और फाइब्रोसिस में सुधार के लिए करीब 7 से 10 प्रतिशत वजन कम करना अधिक प्रभावी हो सकता है।
हालांकि, फैटी लिवर में सुधार के लिए केवल वजन कम करना ही जरूरी नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि भी लिवर के लिए फायदेमंद हो सकती है, भले ही वजन में बहुत ज्यादा बदलाव न आए।
यदि आपका वजन अधिक है तो धीरे-धीरे और टिकाऊ तरीके से वजन कम करना फैटी लिवर में सुधार का एक प्रभावी तरीका हो सकता है। इसके लिए बेहद सख्त डाइट अपनाने की जरूरत नहीं होती। भोजन की मात्रा पर नियंत्रण, अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों को कम करना और शारीरिक गतिविधि बढ़ाना मददगार हो सकता है।
तेजी से वजन घटाने वाली क्रैश डाइट लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होती। इसलिए ऐसे बदलाव करना बेहतर है जिन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से जारी रखा जा सके।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि दुबले या सामान्य वजन वाले लोगों को भी फैटी लिवर हो सकता है। ऐसे लोगों में केवल वजन घटाने के बजाय चयापचय स्वास्थ्य बेहतर करने पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
बहुत अधिक चीनी, मीठे पेय और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाद्य पदार्थ अतिरिक्त कैलोरी और चयापचय संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। इसलिए शीतल पेय, मीठे जूस, मिठाइयां, बिस्कुट, केक और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना चाहिए।
इसके बजाय सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, फलियां, मेवे और फल जैसे फाइबर तथा पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल किया जा सकता है। चीनी को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है, लेकिन उसकी मात्रा और स्रोत पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
फैटी लिवर का मतलब यह नहीं है कि हर तरह की वसा से पूरी तरह दूरी बना ली जाए। इसके बजाय संतृप्त और ट्रांस वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना और सीमित मात्रा में स्वस्थ असंतृप्त वसा को आहार में शामिल करना बेहतर हो सकता है।
मेवे, बीज, मछली और कुछ वनस्पति तेल स्वस्थ वसा के स्रोत हो सकते हैं। तले हुए खाद्य पदार्थों और अधिक संतृप्त वसा वाले भोजन का सेवन सीमित करना चाहिए। किसी एक खाद्य पदार्थ पर ध्यान देने के बजाय पूरे आहार की गुणवत्ता अधिक महत्वपूर्ण है।
फैटी लिवर में सुधार के लिए व्यायाम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, भले ही इससे वजन में तुरंत बदलाव न आए। तेज चलना, साइकिल चलाना, तैरना और जॉगिंग जैसी एरोबिक गतिविधियां चयापचय स्वास्थ्य बेहतर करने और लिवर में जमा वसा कम करने में मदद कर सकती हैं। इसके साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मांसपेशियों को मजबूत और बनाए रखने में सहायक हो सकती है।
व्यायाम की शुरुआत बहुत कठिन तरीके से करने की जरूरत नहीं है। अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे रोजाना की शारीरिक गतिविधि बढ़ाना और ऐसी गतिविधियां चुनना बेहतर है जिन्हें लंबे समय तक जारी रखा जा सके।
फैटी लिवर का संबंध शरीर के चयापचय स्वास्थ्य से भी है। हाई ब्लड शुगर, इंसुलिन प्रतिरोध, असामान्य कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर लिवर की बीमारी के बढ़ने का जोखिम बढ़ा सकते हैं। इसलिए केवल खान-पान में बदलाव करना पर्याप्त नहीं है। ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित रखना जरूरी है।
कुछ लोगों को इन स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर द्वारा दवाएं दी जा सकती हैं। दवा लेने का मतलब यह नहीं है कि जीवनशैली में बदलाव काम नहीं कर रहे हैं। कई मामलों में दवाओं के साथ स्वस्थ खान-पान, नियमित व्यायाम और वजन प्रबंधन से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
जरूरी बात: फैटी लिवर की गंभीरता हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। यदि लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस या अन्य समस्या मौजूद है, तो केवल घरेलू उपायों या डाइट पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच और सलाह लेना जरूरी है।