नई दिल्ली।
ज्यादा काम पूरा करने या व्यस्त दिनचर्या के कारण नींद का समय कम करना कई लोगों को सामान्य लग सकता है, लेकिन लगातार हर रात छह घंटे से कम सोना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। खासतौर पर लंबे समय तक नींद की कमी का असर हृदय और रक्त वाहिकाओं पर पड़ सकता है। नींद केवल शरीर को आराम देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह कई ऐसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है जो हृदय प्रणाली को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
छह घंटे से कम सोने के क्या जोखिम हैं?
लगातार पर्याप्त नींद न लेने से कई स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ना
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कोरोनरी आर्टरी डिजीज का जोखिम बढ़ना
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हृदय की धड़कन अनियमित होने की संभावना
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स्ट्रोक का खतरा बढ़ना
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टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ना
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वजन बढ़ने और मोटापे की संभावना बढ़ना
डायबिटीज और मोटापा दोनों ही आगे चलकर हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं।
2024 में American Journal of Preventive Cardiology में प्रकाशित एक समीक्षा में खराब नींद और हृदय संबंधी मृत्यु दर, कार्डियोमेटाबोलिक जोखिम तथा कोरोनरी आर्टरी डिजीज के बीच मजबूत संबंध की ओर संकेत किया गया था।
नींद की कमी दिल को कैसे प्रभावित करती है?
पर्याप्त नींद नहीं लेने पर शरीर की ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने वाली प्रणाली प्रभावित हो सकती है। सामान्य तौर पर गहरी नींद के दौरान रक्तचाप कुछ कम होता है। लेकिन अगर शरीर को लगातार पर्याप्त नींद नहीं मिलती, तो यह प्राकृतिक कमी बाधित हो सकती है। लंबे समय में इसका संबंध उच्च रक्तचाप से हो सकता है।
नींद की कमी शरीर में तनाव हार्मोन, विशेष रूप से कोर्टिसोल, के स्तर को प्रभावित कर सकती है। इससे रक्त वाहिकाओं और हृदय के सामान्य कामकाज पर दबाव पड़ सकता है।
इसके अलावा, अपर्याप्त नींद को शरीर में बढ़ी हुई सूजन से भी जोड़ा गया है। लंबे समय तक रहने वाली सूजन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने और हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हो सकती है।
वजन और ब्लड शुगर पर भी असर
कम नींद का असर केवल सीधे हृदय पर ही नहीं पड़ता। नींद शरीर में भूख और रक्त शर्करा को नियंत्रित करने वाली प्रक्रियाओं में भी भूमिका निभाती है। नींद की कमी से भूख और खाने के व्यवहार में बदलाव आ सकता है, जिससे वजन बढ़ने और मोटापे का जोखिम बढ़ सकता है।
इसी तरह, लंबे समय तक खराब नींद शरीर के चयापचय पर असर डाल सकती है और टाइप-2 डायबिटीज के खतरे से जुड़ी हो सकती है। डायबिटीज और अधिक वजन दोनों हृदय रोग के महत्वपूर्ण जोखिम कारक हैं।
नींद की अवधि और उसकी गुणवत्ता में गड़बड़ी स्वायत्त तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित कर सकती है। यह तंत्र हृदय की गति और उसकी लय को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Frontiers in Neuroscience में 2025 में प्रकाशित एक अध्ययन में भी नींद से जुड़े कारकों, जिनमें नींद की अवधि और नींद में व्यवधान शामिल हैं, तथा हृदय रोग के जोखिम के बीच महत्वपूर्ण संबंध पाया गया।
कितनी नींद लेना बेहतर है?
स्रोत में दिए गए हृदय स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देशों के अनुसार, अधिकांश वयस्कों के लिए हर रात करीब 7 से 9 घंटे की नींद बेहतर मानी जाती है। इसी अवधि को आम तौर पर हृदय संबंधी बीमारियों के अपेक्षाकृत कम जोखिम से जोड़ा जाता है।
इसलिए लगातार छह घंटे से कम सोने को सामान्य दिनचर्या बनाने के बजाय पर्याप्त और नियमित नींद को अपनी जीवनशैली का जरूरी हिस्सा बनाना चाहिए।