स्मार्टफोन का बढ़ता इस्तेमाल बना आंखों की सेहत के लिए खतरा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 06-01-2026
The increasing use of smartphones poses a threat to eye health.
The increasing use of smartphones poses a threat to eye health.

 

नई दिल्ली।
स्मार्टफोन आज हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। कामकाज से लेकर पढ़ाई, मनोरंजन, खरीदारी और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तक, हर जरूरत के लिए हम मोबाइल फोन पर निर्भर होते जा रहे हैं। लेकिन सुविधा के इस दौर में स्क्रीन पर

बढ़ता समय हमारी आंखों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है। नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल आंखों से जुड़ी कई परेशानियों को जन्म दे रहा है, जो धीरे-धीरे दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकती हैं।

हालांकि विशेषज्ञ यह स्पष्ट करते हैं कि मोबाइल फोन से आंखों को कोई स्थायी या अपूरणीय क्षति नहीं होती, लेकिन अत्यधिक और गलत तरीके से उपयोग करने पर आंखों की कार्यक्षमता, आराम और नींद पर नकारात्मक असर जरूर पड़ता है। खासतौर पर युवा वर्ग और बच्चों में इस समस्या के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग से होने वाली सबसे आम समस्या डिजिटल नेत्र तनाव है, जिसे कंप्यूटर विजन सिंड्रोम भी कहा जाता है। लंबे समय तक छोटी स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करने से आंखों की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके कारण आंखों में थकान, सिरदर्द, धुंधला दिखना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और कभी-कभी दोहरी दृष्टि जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

दूसरी प्रमुख समस्या सूखी आंखें हैं। स्क्रीन देखने के दौरान हम सामान्य से कम बार पलकें झपकाते हैं, जिससे आंखों में नमी बनाए रखने वाली आंसुओं की परत प्रभावित होती है। नतीजतन आंखों में सूखापन, जलन, लालिमा, पानी आना और रेत जैसा एहसास होने लगता है। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या पढ़ने, वाहन चलाने और लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने में बाधा बन सकती है।

इसके अलावा, स्मार्टफोन स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी आंखों के लिए एक और चुनौती है। यह रोशनी आंखों में असहजता पैदा करने के साथ-साथ शरीर की जैविक घड़ी को भी प्रभावित करती है। नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को कम कर देती है, जिससे नींद आने में दिक्कत होती है और नींद की गुणवत्ता घटती है। खासकर रात में मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल आंखों की थकान और अनिद्रा को बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्क्रीन टाइम को सीमित करना, नियमित अंतराल पर आंखों को आराम देना और सही रोशनी में मोबाइल का उपयोग करना आंखों को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है। स्मार्टफोन का संतुलित इस्तेमाल ही आंखों की सेहत की सबसे बड़ी सुरक्षा है।