शाहताज खान / मुंबई
रमजान के मुबारक महीने में पिछले 30 वर्षों से ताज कुरैशी की आवाज सेहरी में जगाती है और शाम को भीड़ में लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी देती है. डोंगरी इलाके की तंग गलियां हों या दक्षिण मुंबई में मीनारा मस्जिद का बाजार. इस आवाज को सभी पहचानते हैं. बाजार में खरीदारी करने आए बेफिक्र घूमते हुए लोगों को ताज कुरैशी की आवाज जेब कतरों से सावधान रहने और साथ ही कानून का पालन करने का पैगाम देती है.

रमजान के मुबारक महीने में दक्षिण मुंबई के भिंडी बाजार में मीनारा मस्जिद की इन गलियों में दो साल बाद फिर रौनक लौट आई है. रमजान से लेकर ईद तक की खरीदारी के लिए लोग इन गलियों का रुख करते हैं. रमजान के पूरे महीने यहां ऐसे ऐसे पकवान मिलते हैं कि अगर इन्हें खाने से चूक गए, तो फिर ग्यारह महीने बाद अगले रमजान में ही इनका लुत्फ लिया जा सकता है.

उत्तर भारत में मिट्टी की प्यालियों में बर्फ पर सजी फिरनी से यह बहुत भिन्न है. इसे सांदल कहते हैं. सांदल बनाने के लिए नारियल, दूध, खोया और चावल का प्रयोग किया जाता है. सेहरी और इफ्तार दोनों ही समय लोग सांदल को खाना पसन्द करते हैं. ठंडा-ठंडा सांदल खानों के शौकीनों को खूब भाता है.

63 वर्ष की फातिमा हारून बालानी पूरे ग्यारह महीने रमजान का इंतजार करती हैं. इस बार तो महामारी ने उन का इंतजार बहुत लम्बा कर दिया था. वह वर्षों से स्वादिष्ट सांदल बनाती हैं और केवल रमजान के महीने में ही मीनारा मस्जिद के बाजार में फरोख्त करती हैं.
इस एक महीने की आमदनी से वह अपने ग्यारह महीनों का खर्च पूरा करती हैं. 16 वर्ष पूर्व उनके पति के गुजर जाने के बाद से वह पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. रमजान में सांदल खाने के शौकीन पहले ही दिन से फातिमा हारून को एक मिनट भी खाली नहीं रहने देते.
भिंडी बाजार में अब्दुल कादिर सांदल के ऐसे इकलौते विक्रेता हैं, जो अपने ग्राहकों के लिए वर्ष के बारह महीने सांदल बनाते हैं. अब्दुल कादिर का कहना है कि उनका परिवार पिछले 200 वर्षों से यह कारोबार कर रहा है. शुरू में केवल रमजान के महीने में ही सांदल बनाते थे, लेकिन लोगों के शौक और फरमाईश पर हर रोज तैयार करते हैं और लोगों को परोसते हैं.
उनका कहना है कि रमजान के महीने में तो कई लोग इसे बनाते हैं, लेकिन ईद के बाद अगर कोई सांदल खाना चाहे, तो उसे सिर्फ हमारे पास ही सांदल मिल सकता है.

कुल मिलाकर बाजारों की रौनक लौट आई है. हंसते मुस्कराते, खाते-पीते और खरीदारी करते लोगों को ताज कुरेशी की सतर्क रहने की चेतावनी, ‘अपने पर्स और सामान का ध्यान रखें’ लोगों को सावधान करती रहती है. खास बात यह है कि वह अपने इस काम के लिए किसी से कोई मुआवजा भी नहीं लेते.