नई दिल्ली
पेट दर्द, गैस, दस्त, कब्ज या वजन कम होने जैसी समस्याओं को कई लोग आंतों में कीड़े होने से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, पेट से जुड़ी हर परेशानी का कारण आंतों के कृमि नहीं होते। आंतों के कृमि परजीवी होते हैं, जो दूषित भोजन या पानी, ठीक से न धोए गए फल-सब्जियों, अधपके मांस या दूषित मिट्टी और सतहों के संपर्क के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।
आंतों में पाए जाने वाले सामान्य कृमियों में गोलकृमि, हुकवर्म, व्हिपवर्म और पिनवर्म शामिल हैं। इनके संक्रमण के लक्षण कृमि के प्रकार और संक्रमण की मात्रा पर निर्भर करते हैं। हल्के संक्रमण में कोई लक्षण दिखाई नहीं दे सकता, जबकि गंभीर संक्रमण पाचन संबंधी समस्याओं और कुछ मामलों में पोषण की कमी का कारण बन सकता है।
ऐसे में यह समझना जरूरी है कि किन लक्षणों में आंतों के कृमि संक्रमण की आशंका हो सकती है और कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
कुछ आंतों के कृमि संक्रमण में बिना किसी स्पष्ट कारण के पेट में दर्द या बेचैनी हो सकती है। यह दर्द हल्का और रुक-रुककर भी हो सकता है, जिसके कारण इसे अपच या किसी अन्य पाचन समस्या समझ लिया जाता है।
हालांकि, पेट दर्द के कई कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल पेट दर्द के आधार पर इसे कृमि संक्रमण का लक्षण मानना उचित नहीं है।
कुछ कृमि संक्रमणों के कारण दस्त, पतला मल या मल त्याग की सामान्य आदत में बदलाव हो सकता है। कुछ मामलों में कब्ज या बार-बार मल त्याग की समस्या भी हो सकती है।
यदि दस्त लगातार हो रहे हों और उनके साथ कमजोरी, वजन कम होना या शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
रात के समय गुदा के आसपास तेज खुजली पिनवर्म संक्रमण का प्रमुख लक्षण हो सकती है। मादा पिनवर्म रात में गुदा के आसपास जाकर त्वचा पर अंडे दे सकती हैं।
इसके कारण नींद प्रभावित हो सकती है और व्यक्ति बार-बार खुजली कर सकता है। बच्चों में बेचैनी, चिड़चिड़ापन या रात में बार-बार नींद खुलने जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
कुछ मामलों में मल में कृमि या उनके अंश दिखाई दे सकते हैं। इनका आकार और स्वरूप कृमि के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
हालांकि, मल में दिखाई देने वाली हर धागेनुमा या हल्के रंग की चीज कृमि नहीं होती। भोजन के रेशे और बलगम भी कभी-कभी कृमि जैसे दिखाई दे सकते हैं। यदि मल में बार-बार कोई असामान्य चीज दिखाई दे, तो खुद से निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
कुछ आंतों के परजीवी पोषक तत्वों के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं या भोजन से पोषक तत्व हासिल कर सकते हैं। गंभीर संक्रमण की स्थिति में इसका असर वजन पर पड़ सकता है।
यदि खान-पान या शारीरिक गतिविधि में कोई बदलाव किए बिना वजन लगातार कम हो रहा है, तो इसकी चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है, क्योंकि वजन कम होने के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।
कुछ कृमि, विशेष रूप से हुकवर्म, आंतों में रक्तस्राव का कारण बन सकते हैं। गंभीर संक्रमण की स्थिति में आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है।
इससे थकान, कमजोरी, चक्कर, सिरदर्द या त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, लंबे समय तक रहने वाली थकान के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए बिना स्पष्ट कारण लगातार थकान होने पर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
आंतों में कृमि संक्रमण होने पर कुछ लोगों की भूख कम हो सकती है, जबकि कुछ लोगों में भूख बढ़ने की शिकायत भी हो सकती है।
लेकिन भूख में बदलाव केवल कृमि संक्रमण के कारण नहीं होता। इसके पीछे पाचन, चयापचय या मनोवैज्ञानिक कारण भी हो सकते हैं। यदि भूख में लगातार बदलाव के साथ वजन कम होना या अन्य लक्षण भी दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
कुछ परजीवी संक्रमणों में मतली, उल्टी, पेट फूलना और अन्य पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
यदि ये लक्षण लगातार बने रहें या इनके साथ तेज पेट दर्द, वजन कम होना अथवा मल त्याग की आदत में बदलाव हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
परजीवी संक्रमण के दौरान कुछ लोगों को पेट फूलने, गैस बनने या पेट में बेचैनी की शिकायत हो सकती है।
हालांकि, गैस और पेट फूलना बहुत सामान्य समस्याएं हैं और इनके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इनमें भोजन से असहिष्णुता, कब्ज, अपच और अन्य पाचन संबंधी विकार शामिल हैं। इसलिए केवल गैस या पेट फूलने को आंतों में कीड़े होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
परजीवी के प्रकार के अनुसार संक्रमण का जोखिम अलग-अलग हो सकता है। हाथों की खराब स्वच्छता, दूषित भोजन या पानी, दूषित मिट्टी पर नंगे पैर चलना और अधपका मांस या मछली खाना जोखिम बढ़ा सकता है।
बच्चों में घर, स्कूल और बाल देखभाल केंद्रों में करीबी संपर्क के कारण पिनवर्म संक्रमण का जोखिम अधिक हो सकता है।
आंतों के कृमि संक्रमण से बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
ध्यान रखें: पेट दर्द, गैस, कब्ज, दस्त या पेट फूलने जैसे लक्षण कई अलग-अलग कारणों से हो सकते हैं। इसलिए केवल इन लक्षणों के आधार पर आंतों में कीड़े होने का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से उचित जांच और सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।