क्या रात में उदासी बढ़ जाती है? जानिए कारण और इससे निपटने के आसान तरीके

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 24-09-2026
Does sadness increase at night? Find out the reasons and easy ways to cope with it.
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नई दिल्ली

क्या आपको दिन की तुलना में रात के समय ज्यादा उदासी, चिंता या बेचैनी महसूस होती है? ऐसा कई लोगों के साथ होता है। दिनभर काम, बातचीत और दूसरी गतिविधियों में व्यस्त रहने के बाद रात में जब शांति और अकेलापन बढ़ता है, तो दबे हुए विचार और भावनाएं अधिक तीव्र महसूस हो सकती हैं।

हालांकि, रात में उदास महसूस करने का मतलब यह जरूरी नहीं कि व्यक्ति अवसाद से पीड़ित है। थकान, अकेलापन, नींद की गड़बड़ी और जरूरत से ज्यादा सोचने की आदत भी रात के समय नकारात्मक भावनाओं को बढ़ा सकती है।

दिन में काम और सामाजिक गतिविधियां हमारा ध्यान दूसरी चीजों में लगाए रखती हैं। लेकिन रात में इन गतिविधियों की कमी के कारण चिंता, पछतावे और अधूरे काम या समस्याओं से जुड़े विचार ज्यादा हावी हो सकते हैं।

इसके अलावा, शरीर की सर्कैडियन रिदम यानी जैविक घड़ी नींद, हार्मोन और मूड को प्रभावित करती है। दिन के अंत तक मानसिक और शारीरिक थकान बढ़ जाने से व्यक्ति के लिए मुश्किल भावनाओं से निपटना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

अगर आपको अक्सर रात में उदासी या बेचैनी महसूस होती है, तो कुछ आसान आदतें मददगार हो सकती हैं।

1. सोने से पहले खुद को शांत होने का समय दें

काम, घर के तनाव या किसी परेशान करने वाली बातचीत के तुरंत बाद बिस्तर पर जाने के बजाय सोने से पहले 30 से 60 मिनट का शांत समय रखें।

इस दौरान हल्का संगीत सुनना, किताब पढ़ना, स्नान करना या कुछ देर बिना फोन के बैठना मददगार हो सकता है। इससे दिमाग को यह संकेत मिलता है कि दिन की गतिविधियां अब समाप्त हो रही हैं।

2. रात में समस्याओं का समाधान करने की कोशिश न करें

रात में अत्यधिक सोच-विचार के कारण छोटी समस्याएं भी बहुत बड़ी लग सकती हैं। अगर कोई चिंता बार-बार दिमाग में आ रही है, तो उसे कागज पर लिख लें। अगले दिन क्या करना है, उसका छोटा-सा नोट बना लें और फिर उस विषय को रात के लिए छोड़ने की कोशिश करें।

थके हुए दिमाग से हर समस्या का समाधान निकालने के बजाय उसे अगले दिन के लिए टालना कई बार बेहतर होता है।

3. सोने और जागने का समय नियमित रखें

रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें। नियमित नींद शरीर की जैविक घड़ी को संतुलित रखने में मदद करती है और नींद का संबंध मूड से भी है।

इसके विपरीत, लगातार अनियमित नींद की आदतें खराब मानसिक स्वास्थ्य और अवसाद के लक्षणों से जुड़ी पाई गई हैं।

4. रात में लगातार सोशल मीडिया स्क्रॉल करने से बचें

सोने से पहले तनावपूर्ण खबरें, ऑनलाइन बहसें या लगातार सोशल मीडिया पोस्ट देखना मानसिक बेचैनी बढ़ा सकता है।

2024 में प्रकाशित एक अध्ययन में सोशल मीडिया के इस्तेमाल और अवसाद तथा चिंता के बीच एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण संबंध पाया गया था। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सोशल मीडिया का हर इस्तेमाल नुकसानदायक है। अगर आपको महसूस होता है कि रात में स्क्रॉल करने के बाद आपका मूड और खराब हो जाता है, तो सोने से पहले फोन का इस्तेमाल कम करके शांत गतिविधियां अपनाने की कोशिश करें।

5. अकेलेपन से परेशान हैं तो किसी से बात करें

कभी-कभी रात की उदासी का कारण सिर्फ अकेलापन होता है। ऐसे में किसी भरोसेमंद दोस्त या परिवार के सदस्य को फोन या मैसेज करना मदद कर सकता है।

जरूरी नहीं कि आप अपनी सभी समस्याओं पर लंबी बातचीत करें। कुछ देर सामान्य बातचीत करना, दिनभर का हाल साझा करना या साथ में कुछ देखना भी अकेलेपन की भावना कम कर सकता है।

कब विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए?

अगर उदासी, निराशा, चिंता या खालीपन की भावना लगातार बनी रहती है, रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं या नींद और भूख में लगातार बदलाव दिखाई देता है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना उचित है।

रात में कभी-कभार उदास महसूस करना और लगातार अवसाद के लक्षण होना एक ही बात नहीं है। अपने मूड में होने वाले बदलावों को समझना और जरूरत पड़ने पर समय पर मदद लेना महत्वपूर्ण है।