नई दिल्ली
व्यस्त जीवनशैली के बीच हर सुबह अलग-अलग नाश्ता तैयार करना कई लोगों के लिए मुश्किल होता है। ऐसे में कुछ लोग रोज एक ही तरह का नाश्ता करना पसंद करते हैं। सवाल यह है कि क्या हर दिन एक जैसा नाश्ता करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, हर दिन एक जैसा नाश्ता करना अपने आप में नुकसानदायक नहीं है। अगर आपके नाश्ते में शरीर की जरूरत के मुताबिक प्रोटीन, फाइबर, स्वस्थ वसा, विटामिन और खनिज पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं, तो इसे रोजाना लिया जा सकता है। इससे नाश्ते की योजना बनाने में समय बचता है और भोजन की मात्रा को नियंत्रित करना भी आसान हो सकता है।
हालांकि, समस्या तब पैदा होती है जब रोज के नाश्ते में पोषक तत्वों की विविधता नहीं होती। लंबे समय तक एक ही तरह के सीमित खाद्य पदार्थ खाने से शरीर को मिलने वाले पोषक तत्वों की विविधता कम हो सकती है। खासकर तब, जब नाश्ते में चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट ज्यादा हों, जबकि प्रोटीन और फाइबर की मात्रा कम हो।
हर दिन नाश्ता बदलना जरूरी नहीं है। इसके बजाय एक संतुलित नाश्ते का ढांचा तैयार करके उसमें समय-समय पर खाद्य पदार्थों में बदलाव किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए नाश्ते में साबुत अनाज, प्रोटीन, फल या सब्जियां और मेवे या बीज शामिल किए जा सकते हैं। प्रोटीन के लिए अंडे, पनीर, दही, टोफू या दाल जैसे विकल्प लिए जा सकते हैं। इसी तरह फलों, सब्जियों और अनाज के अलग-अलग विकल्पों को सप्ताह के दौरान बदलते रहने से भोजन में विविधता बनी रहती है।
इसका मतलब यह है कि रोज नया नाश्ता करना जरूरी नहीं, बल्कि रोज का नाश्ता संतुलित और पोषक होना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
2024 में Journal of Nutrition, Health & Aging में प्रकाशित एक अध्ययन में नाश्ते की गुणवत्ता और मात्रा को संपूर्ण स्वास्थ्य से जोड़कर देखा गया। अध्ययन में पाया गया कि पौष्टिक नाश्ता हृदय स्वास्थ्य और शरीर के मेटाबॉलिज्म के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
अध्ययन के अनुसार, सुबह के भोजन से दैनिक ऊर्जा का लगभग 20 से 30 प्रतिशत प्राप्त करने वाले लोगों में हृदय और रक्त वाहिका संबंधी स्वास्थ्य के कुछ संकेतक बेहतर पाए गए। वहीं, बहुत अधिक मात्रा में नाश्ता करने वालों में शरीर में वसा अधिक होने और कुछ मेटाबॉलिक जोखिमों का संबंध देखा गया।
शोध में नाश्ते की गुणवत्ता और गुर्दे की कार्यक्षमता के बीच भी संबंध पाया गया। हालांकि, ऐसे अध्ययनों के निष्कर्षों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर सीधे लागू करने से पहले व्यक्ति की उम्र, जीवनशैली, बीमारी और कुल आहार को ध्यान में रखना जरूरी है।
सुबह वही खाना खाना गलत नहीं है जिसे आप पसंद करते हैं। लेकिन यह जरूर देखना चाहिए कि उस भोजन से शरीर को पर्याप्त पोषण मिल रहा है या नहीं। यदि रोज के नाश्ते में प्रोटीन और फाइबर की कमी है या उसमें अत्यधिक चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट हैं, तो उसमें बदलाव करना बेहतर होगा।
कुल मिलाकर, स्वस्थ नाश्ते का सबसे महत्वपूर्ण नियम विविधता से ज्यादा संतुलन और पोषण है। एक ही नाश्ता रोज लिया जा सकता है, बशर्ते वह पौष्टिक हो और पूरे दिन के भोजन में अलग-अलग खाद्य समूहों को पर्याप्त जगह मिलती हो।