मुन्नी बेगम | गुवाहाटी
कभी सिर्फ धार्मिक पहचान और सादगी का प्रतीक माना जाने वाला हिजाब आज असम की मुस्लिम महिलाओं के बीच एक नया महत्व हासिल कर चुका है। आस्था और मर्यादा के साथ-साथ हिजाब अब एक नए ट्रेंड, आत्मविश्वास और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। स्कूलों और कॉलेजों से लेकर कार्यस्थलों, सामाजिक समारोहों और सोशल मीडिया पर भी विभिन्न रंगों, पैटर्नों और शैलियों के हिजाब ने आधुनिक जीवन में एक प्रमुख स्थान बना लिया है।
असम के अलग-अलग हिस्सों में युवा और बुजुर्ग महिलाओं के बीच हिजाब पहनने का चलन लगातार बढ़ रहा है। इसी के साथ बाजार में हिजाब की मांग भी काफी बढ़ गई है। सूती, शिफॉन, जॉर्जेट और सिल्क जैसे कपड़ों से बने हिजाब अब बाजार में आसानी से मिल जाते हैं। ईद, शादी के सीजन और अन्य सामाजिक अवसरों के दौरान हिजाब की बिक्री में विशेष रूप से तेजी आती है।
आवाज़ द वॉयस से बात करते हुए एक युवा महिला जेरिफा इस्लाम ने कहा कि आज कई महिलाएं अलग-अलग वजहों से हिजाब पहनती हैं। हालांकि मेरी राय में हिजाब कोई मजबूरी का मामला नहीं है। यह पूरी तरह से एक व्यक्तिगत पसंद है जो किसी के आध्यात्मिक विश्वासों से जुड़ी है।

हिजाब पहनने से मुझे मानसिक शांति मिलती है और मैं अल्लाह के करीब महसूस करती हूं। इसके साथ ही मुझे हिजाब बहुत आरामदायक लगता है। धार्मिक नजरिए से अलग यह बालों और त्वचा को धूल, धूप और अन्य बाहरी हानिकारक चीजों से बचाने में भी मदद करता है। आजकल कई लोग हिजाब को फैशन के तौर पर भी पहनते हैं। मेरा मानना है कि हिजाब महिला की खूबसूरती में एक अनोखा गौरव और शालीनता जोड़ता है।
जेरिफा इस्लाम का यह बयान साफ दिखाता है कि कई महिलाओं के लिए हिजाब सिर्फ एक धार्मिक दायित्व नहीं है। यह उनकी निजी पसंद, एक आध्यात्मिक अनुभव और उनकी जीवनशैली का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है।
दुनिया भर में 'मॉडेस्ट फैशन' यानी शालीन फैशन का एक नया ट्रेंड उभरा है। इसमें सादगी और फैशन दोनों को बराबर महत्व दिया जाता है। असम की मुस्लिम महिलाएं और युवतियां भी इस आंदोलन के साथ कदम से कदम मिला रही हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए स्थानीय कारोबारियों ने बाजार में कई तरह के हिजाब और मॉडेस्ट फैशन से जुड़े उत्पाद पेश किए हैं।
एक कामकाजी महिला मोनीजान बेगम ने कहा कि हिजाब एक पारंपरिक स्कार्फ है जिसे मुस्लिम महिलाएं पीढ़ियों से पहनती आ रही हैं। कई महिलाओं के लिए यह शालीनता, आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। पहले असम में कई मुस्लिम महिलाएं चादर या साड़ी के पल्लू से अपना सिर ढकती थीं।
लेकिन आज हिजाब का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अलावा कई महिलाएं हिजाब को शालीनता और आत्मसम्मान की अभिव्यक्ति के रूप में देखती हैं। बाजार में अब अलग-अलग रंगों, डिजाइनों और कपड़ों में हिजाब आसानी से उपलब्ध हैं। इसलिए कई महिलाओं और युवा लड़कियों ने इसे अपने दैनिक जीवन में शामिल करना शुरू कर दिया है।
मोनीजान बेगम ने आगे कहा कि पहले हमारे पास हिजाब पहनने की केवल एक ही समझ थी कि यह धार्मिक पहचान और आज्ञाकारिता का प्रतिनिधित्व करता है। कई मुस्लिम महिलाओं के लिए हिजाब अल्लाह के आदेश का पालन करने और अपनी धार्मिक पहचान व्यक्त करने का एक तरीका है।
हालांकि हिजाब कई स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी प्रदान करता है जिसके बारे में हममें से कई लोग पूरी तरह से जागरूक नहीं हैं। यह सिर और बालों को सूरज की हानिकारक किरणों, धूल और प्रदूषण से सुरक्षा देता है। धूप, हवा और प्रदूषण का असर कम होने से बालों के रूखे होने की संभावना कम हो जाती है।
ठंड के मौसम में सिर और कान ढकने से शरीर की गर्माहट बनी रहती है। हालांकि अगर हिजाब को बहुत कसकर बांधा जाए या गंदे कपड़े का इस्तेमाल किया जाए तो स्कैल्प पर पसीना जमा हो सकता है। इससे खुजली या फंगल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। बालों की जड़ों पर ज्यादा खिंचाव से बाल झड़ने की समस्या भी हो सकती है। इसलिए हिजाब पहनते समय साफ और आरामदायक कपड़ों का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है ताकि इसे स्वस्थ तरीके से पहना जा सके।
उन्होंने आगे कहा कि हिजाब कई महिलाओं को आत्मविश्वासी और सहज महसूस कराने में मदद करता है। यह लोगों को केवल बाहरी सुंदरता पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय व्यक्तित्व, ज्ञान और उपलब्धियों को महत्व देने के लिए प्रोत्साहित करने में सकारात्मक भूमिका निभाता है। नतीजतन समय के साथ हिजाब के प्रति जागरूकता और समझ बढ़ी है। इसी वजह से वर्तमान पीढ़ी की कई महिलाएं और युवा लड़कियां अपनी प्राथमिकताओं और विश्वासों के अनुसार हिजाब में दिलचस्पी दिखा रही हैं।
इस बदलाव में सोशल मीडिया ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर हिजाब स्टाइल और मॉडेस्ट फैशन कंटेंट की बढ़ती लोकप्रियता ने असम की युवा पीढ़ी को भी आकर्षित किया है। कई युवतियां अपने हिजाब को अपने कपड़ों के साथ मैच करती हैं। इससे आधुनिकता और शालीनता का एक खूबसूरत तालमेल बनता है।
एक अन्य युवती अपर्णा दास ने कहा कि चाहे इस्लाम हो, हिंदू धर्म हो या कोई अन्य धर्म, महिलाओं के सम्मान और गरिमा को बनाए रखते हुए खुद को शालीनता से ढकने की परंपरा रही है। महिलाएं लंबे समय से अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के अनुसार घूंघट या पर्दे का इस्तेमाल करती आई हैं। उस नजरिए से मैं हिजाब को भी एक तरह का पर्दा या आवरण ही मानती हूं। मेरी राय में इस मामले में कोई जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए। यह व्यक्तिगत पसंद और आराम का सवाल है।
अपर्णा ने आगे कहा कि मैं भी अक्सर स्कूल, कॉलेज, ऑफिस या बाजार जाते समय अपने सिर और चेहरे को स्कार्फ से ढकती हूं। इसका एक कारण आजकल बढ़ता प्रदूषण का स्तर है। धूल, धुआं और सूरज की हानिकारक किरणें बालों और त्वचा पर बुरा असर डाल सकती हैं।
इसलिए मैं खुद को इन चीजों से बचाने के लिए स्कार्फ का इस्तेमाल करती हूं। आजकल यह देखा जा सकता है कि कई युवा महिलाएं न केवल धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से बल्कि स्किनकेयर, हेयरकेयर, आत्मविश्वास और व्यक्तिगत आराम के लिए भी हिजाब या हिजाब जैसे पर्दे पहनती हैं।
हिजाब पर अपने विचार व्यक्त करते हुए एक अन्य युवती अस्फियारा बेगम ने कहा कि हिजाब मूल रूप से एक धार्मिक परिधान है जिसे लंबे समय से मुस्लिम महिलाओं के लिए पहचान और शालीनता का प्रतीक माना जाता रहा है। यह महिलाओं को शालीनता का अभ्यास बनाए रखने में मदद करता है।

बदलते समय के साथ हिजाब की स्टाइल में भी नए प्रयोग सामने आए हैं। आज कई महिलाएं अलग-अलग तरह के हिजाब पहनती हैं जो उनके पहनावे को पूरा करते हैं। एक मायने में यह कहा जा सकता है कि हिजाब ने अपने धार्मिक महत्व को बनाए रखते हुए आधुनिक फैशन ट्रेंड के साथ तालमेल बिठाने में कामयाबी हासिल की है।
विभिन्न रंगों, डिजाइनों और कपड़ों के हिजाब अब बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं जो एक महिला के व्यक्तित्व और स्टाइल की समझ को दर्शाते हैं। संक्षेप में कहें तो अपने मूल धार्मिक महत्व को बनाए रखते हुए हिजाब ने फैशन की आधुनिक दुनिया में अपने लिए एक नया स्थान बना लिया है।
आज की बदलती सामाजिक हकीकत में हिजाब अब सिर्फ एक धार्मिक पोशाक नहीं रह गया है। कई महिलाओं के लिए यह पहचान, आत्मविश्वास, शालीनता और आधुनिकता का एक अनोखा प्रतीक बन गया है। आस्था और फैशन के इस खूबसूरत मिलन ने असम के मुस्लिम समाज के भीतर हिजाब को एक नया आयाम दिया है।