नई दिल्ली:
मोतियाबिंद दुनिया भर में दृष्टि कमजोर होने और अंधता के प्रमुख कारणों में से एक है। हर साल लाखों लोग इस समस्या से प्रभावित होते हैं। आमतौर पर इसे बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली भी इसके खतरे को काफी हद तक प्रभावित करती है। अच्छी बात यह है कि कुछ स्वस्थ आदतों को अपनाकर मोतियाबिंद के जोखिम को कम किया जा सकता है और आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
मोतियाबिंद तब होता है जब आंख का प्राकृतिक लेंस धीरे-धीरे धुंधला होने लगता है। इसके कारण देखने में परेशानी, धुंधलापन, रोशनी से चुभन और रात में कम दिखाई देने जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं। यदि समय पर इलाज न कराया जाए तो यह दृष्टि को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार उम्र इसका सबसे बड़ा जोखिम कारक है, लेकिन कुछ जीवनशैली संबंधी आदतें इस बीमारी के विकास की गति को तेज या धीमा कर सकती हैं।
सूर्य की पराबैंगनी यानी यूवी किरणों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से मोतियाबिंद का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए जब भी घर से बाहर निकलें, अच्छी गुणवत्ता वाले ऐसे धूप के चश्मे का उपयोग करें जो यूवीए और यूवीबी किरणों को रोकने में सक्षम हों।
इसके अलावा चौड़ी किनारी वाली टोपी पहनना भी फायदेमंद हो सकता है। यह आंखों को सीधे पड़ने वाली तेज धूप से बचाने में मदद करती है और आंखों पर पड़ने वाले दबाव को कम करती है।
आंखों की सेहत का सीधा संबंध हमारे खानपान से है। विशेषज्ञों का कहना है कि एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थ आंखों के लेंस को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं।
पालक, मेथी, सरसों और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियां आंखों के लिए लाभकारी मानी जाती हैं। संतरा, आम, पपीता और अन्य रंग-बिरंगे फल भी आवश्यक विटामिन और पोषक तत्व प्रदान करते हैं। इसके अलावा मछली में पाए जाने वाले ओमेगा-3 फैटी एसिड आंखों के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
धूम्रपान केवल फेफड़ों और हृदय को ही नहीं, बल्कि आंखों को भी नुकसान पहुंचाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार धूम्रपान करने वालों में मोतियाबिंद होने का खतरा धूम्रपान न करने वालों की तुलना में कई गुना अधिक होता है।
सिगरेट के धुएं में मौजूद हानिकारक तत्व आंखों में ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ाते हैं और लेंस को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए धूम्रपान छोड़ना आंखों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
मधुमेह, उच्च रक्तचाप और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल मोतियाबिंद के खतरे को बढ़ा सकते हैं। विशेष रूप से मधुमेह के मरीजों में लंबे समय तक बढ़ी हुई रक्त शर्करा आंखों के लेंस को प्रभावित कर सकती है।
नियमित जांच, संतुलित भोजन, व्यायाम और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन करके इन बीमारियों को नियंत्रित रखना जरूरी है।
नेत्र रोग विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर आंखों की जांच कराना मोतियाबिंद से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। नियमित जांच से मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और अन्य आंखों की बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है।
40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को कम से कम हर दो वर्ष में एक बार आंखों की जांच करानी चाहिए। वहीं 60 वर्ष की आयु के बाद साल में एक बार नेत्र परीक्षण कराना बेहतर माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित जांच के माध्यम से मोतियाबिंद के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आंखें जीवनभर स्वस्थ रहें, इसके लिए आज से ही इन अच्छी आदतों को अपनाना जरूरी है।