Loneliness can increase the risk of heart disease; find out why.
नई दिल्ली
बढ़ती उम्र के साथ हृदय रोग का खतरा भी बढ़ जाता है। आमतौर पर इसकी वजह उम्र, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली या पहले से मौजूद बीमारियों को माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अकेलापन और सामाजिक अलगाव भी हृदय स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। विशेष रूप से बुजुर्गों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है, क्योंकि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से वे सामाजिक गतिविधियों में कम भाग ले पाते हैं और अधिक समय घरों तक सीमित रहते हैं।
हाल के शोध बताते हैं कि लंबे समय तक अकेलापन केवल मानसिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि हृदय और रक्त वाहिकाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए इसे केवल भावनात्मक समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
अध्ययन में सामने आया संबंध
वर्ष 2025 में सोशल साइंस एंड मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में अकेलेपन और हृदय रोग के बढ़ते खतरे के बीच स्पष्ट संबंध की ओर संकेत किया गया है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, अकेलापन और सामाजिक अलगाव दोनों अलग-अलग तरीके से हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, लेकिन दोनों ही स्थितियां हृदय रोग से होने वाली मृत्यु के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि लंबे समय तक अकेले रहने वाले लोगों में हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का खतरा अधिक होता है।
कैसे प्रभावित होता है दिल?
विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक सामाजिक रूप से अलग-थलग रहता है, तो उसका शरीर लगातार तनाव की स्थिति में रहने लगता है। इसे 'फाइट ऑर फ्लाइट' (लड़ो या भागो) प्रतिक्रिया कहा जाता है।
लगातार तनाव के कारण शरीर में कई बदलाव होते हैं, जैसे—
रक्तचाप बढ़ना
रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ना
शरीर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) बढ़ना
हृदय पर अतिरिक्त भार पड़ना
समय के साथ ये परिवर्तन दिल का दौरा (हार्ट अटैक) और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
बुजुर्गों में अधिक दिखती है समस्या
साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 45 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 33 प्रतिशत लोग किसी न किसी स्तर पर अकेलेपन का अनुभव करते हैं। वहीं 65 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 25 प्रतिशत लोग सामाजिक अलगाव से प्रभावित हैं।
कई अध्ययनों के संयुक्त विश्लेषण (मेटा-विश्लेषण) में यह भी सामने आया कि अकेलापन और सामाजिक अलगाव हृदय रोग का खतरा लगभग 29 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं।
अकेलेपन के संकेत पहचानें
विशेषज्ञों का कहना है कि अकेलापन केवल अकेले रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह वह स्थिति है जब व्यक्ति खुद को दूसरों से कटा हुआ या भावनात्मक रूप से अलग महसूस करता है।
इसके कुछ सामान्य लक्षण हैं—
लोगों से मिलने-जुलने की इच्छा कम होना
सामाजिक संबंधों से दूरी बनाना
व्यक्तिगत साफ-सफाई की अनदेखी करना
अनियमित समय पर भोजन करना
दिनचर्या का बिगड़ जाना
अत्यधिक टीवी, मोबाइल या अन्य आदतों में समय बिताना
अनिद्रा या नींद से जुड़ी समस्याएं
याददाश्त कमजोर होना
ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होना
यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
हृदय को स्वस्थ रखने के लिए सामाजिक जुड़ाव भी जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद के साथ-साथ सामाजिक रूप से सक्रिय रहना भी हृदय को स्वस्थ रखने का महत्वपूर्ण हिस्सा है। परिवार, मित्रों और समाज के साथ नियमित संपर्क, सामुदायिक गतिविधियों में भागीदारी तथा भावनात्मक सहयोग तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।
विशेष रूप से बुजुर्गों के लिए परिवार का साथ, बातचीत, टहलना, समूह गतिविधियों में शामिल होना और नियमित स्वास्थ्य जांच हृदय रोग के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी व्यक्ति में लंबे समय तक अकेलेपन, अवसाद या सामाजिक अलगाव के लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय रहते उठाया गया यह कदम मानसिक और हृदय—दोनों स्वास्थ्य की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।