क्या जागने के एक घंटे के भीतर नाश्ता करना जरूरी है? जानिए क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 06-07-2026
Is it necessary to have breakfast within an hour of waking up? Find out what health experts say.
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नई दिल्ली:

अक्सर कहा जाता है कि नाश्ता दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन होता है। हाल के वर्षों में सोशल मीडिया पर एक और दावा तेजी से लोकप्रिय हुआ है कि सुबह उठने के एक घंटे के भीतर नाश्ता कर लेना चाहिए, अन्यथा स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। लेकिन क्या यह दावा वैज्ञानिक रूप से सही है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसका उत्तर हर व्यक्ति के शरीर, जीवनशैली और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सभी लोगों के लिए ऐसा कोई निश्चित नियम नहीं है कि उन्हें जागने के 60 मिनट के भीतर ही भोजन करना चाहिए। कुछ लोगों को सुबह उठते ही तेज भूख लगती है, जबकि कई लोग बिना किसी परेशानी के कुछ समय बाद नाश्ता करते हैं। इसलिए नाश्ते का सही समय व्यक्ति विशेष के शरीर की जरूरतों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

दरअसल, जब हम सो रहे होते हैं, तब भी हमारा शरीर लगातार काम करता रहता है। नींद के दौरान सांस लेना, हृदय का धड़कना, हार्मोन का संतुलन बनाए रखना, कोशिकाओं की मरम्मत करना और अन्य महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। चूंकि इस दौरान हम भोजन नहीं करते, इसलिए शरीर पहले से संग्रहित ऊर्जा का उपयोग करता है।

सुबह जागने पर कुछ लोगों के रक्त में शर्करा (ब्लड शुगर) का स्तर सामान्य से थोड़ा कम हो सकता है। ऐसे लोगों को भूख, थकान या कमजोरी महसूस हो सकती है और उन्हें जल्दी भोजन करने की आवश्यकता महसूस होती है। वहीं, कुछ लोग पूरी तरह ऊर्जावान महसूस करते हैं और उन्हें कुछ समय तक भूख नहीं लगती। यह पूरी तरह सामान्य स्थिति है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि नाश्ता शरीर, मस्तिष्क और मांसपेशियों को ऊर्जा प्रदान करता है। संतुलित नाश्ता दिनभर ध्यान केंद्रित करने, काम करने की क्षमता बढ़ाने और शारीरिक सक्रियता बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि, नाश्ता कब किया जाए, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उसमें पौष्टिक और संतुलित खाद्य पदार्थ शामिल हों।

वैज्ञानिक अध्ययनों में भी ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है कि हर व्यक्ति के लिए जागने के एक घंटे के भीतर नाश्ता करना अनिवार्य है। शोध बताते हैं कि नाश्ते का समय उम्र, मेटाबॉलिज्म, स्वास्थ्य स्थिति, दैनिक दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों के आधार पर अलग-अलग लोगों पर अलग प्रभाव डाल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को सुबह उठते ही भूख लगती है, तो उसे पौष्टिक नाश्ता करना चाहिए। वहीं, यदि किसी को कुछ समय बाद भूख लगती है, तो वह थोड़ी देर बाद भी स्वस्थ नाश्ता कर सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि शरीर के संकेतों को समझा जाए और अनावश्यक रूप से केवल घड़ी देखकर भोजन न किया जाए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि नाश्ते में प्रोटीन, साबुत अनाज, ताजे फल, दही, अंडे, अंकुरित अनाज या मेवे जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जाएं। अत्यधिक चीनी, तले हुए खाद्य पदार्थ या केवल मीठे पेय पर निर्भर रहने से बचना चाहिए।

विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए केवल नाश्ते का समय ही नहीं, बल्कि उसका पोषण मूल्य, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार अधिक महत्वपूर्ण हैं। इसलिए किसी तय समय सीमा का पालन करने के बजाय अपने शरीर की जरूरतों को समझकर भोजन करना बेहतर विकल्प माना जाता है।