नई दिल्ली।
रमज़ान का महीना इबादत, सब्र और आत्मसंयम का समय होता है, लेकिन यह सेहत की दृष्टि से भी बेहद अहम होता है। पूरे दिन रोज़ा रखने के बाद शरीर को सही पोषण और पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है। अगर खान-पान में संतुलन रखा जाए तो रमज़ान के दौरान स्वस्थ और तरोताज़ा रहना बिल्कुल संभव है। इसके लिए किसी कठिन डाइट प्लान की जरूरत नहीं, बल्कि कुछ सरल आदतों को अपनाना ही काफी है।
सबसे पहले हाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखना बेहद ज़रूरी है। रोज़े के दौरान डिहाइड्रेशन सबसे बड़ा स्वास्थ्य जोखिम होता है, क्योंकि सूर्योदय से सूर्यास्त तक पानी नहीं पिया जाता। इसलिए इफ्तार से सहरी के बीच पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। एक साथ बहुत सारा पानी पीने के बजाय थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी लेना बेहतर होता है। नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ या बिना चीनी के ताज़े फलों का रस भी शरीर को तरोताज़ा रखने में मदद करता है। कैफीनयुक्त पेय जैसे ज्यादा चाय या कॉफी और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स से बचना चाहिए, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं।
इफ्तार के समय संयम सबसे अहम है। दिनभर भूखे रहने के बाद एक साथ बहुत अधिक तला-भुना या मसालेदार भोजन करने से अपच, एसिडिटी और सुस्ती हो सकती है। इफ्तार की शुरुआत खजूर और पानी से करना बेहतर माना जाता है। खजूर प्राकृतिक शर्करा का अच्छा स्रोत है, जो तुरंत ऊर्जा देता है, साथ ही इसमें फाइबर, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। इसके बाद हल्का सूप या सलाद लिया जा सकता है और फिर संतुलित मात्रा में मुख्य भोजन। भोजन को भाप में पकाया हुआ, उबला या ग्रिल्ड रखना तले हुए खाद्य पदार्थों की तुलना में ज्यादा लाभकारी होता है।
रमज़ान में ऊर्जा बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। इसके लिए ऐसे खाद्य पदार्थों का चयन करना चाहिए जो धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करें। फाइबर और प्रोटीन से भरपूर भोजन जैसे ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस, दालें, चना, राजमा, अंडा, पनीर और दही शरीर को लंबे समय तक संतुलित ऊर्जा देते हैं। अत्यधिक मीठे या ग्लूकोज से भरपूर खाद्य पदार्थ तुरंत ऊर्जा तो देते हैं, लेकिन थोड़ी देर बाद थकान भी ला सकते हैं, इसलिए मिठाइयों का सेवन सीमित रखना चाहिए।
सहरी को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। यह दिनभर की ऊर्जा का आधार होती है। सहरी में कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और पर्याप्त तरल शामिल होना चाहिए। मल्टीग्रेन रोटी, ओट्स, अंडा, दही, दूध और फल सहरी के लिए अच्छे विकल्प हैं। हल्की लेकिन पौष्टिक सहरी दिनभर कमजोरी और चक्कर आने की संभावना को कम करती है।
लंबे समय तक भोजन न लेने से शरीर स्वाभाविक रूप से विषहरण प्रक्रिया से गुजरता है। जब इफ्तार और सहरी में स्वच्छ, संतुलित और पौष्टिक भोजन लिया जाता है तो शरीर की कार्यक्षमता बेहतर होती है। पर्याप्त पानी और सही आहार शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होते हैं और पाचन तंत्र को आराम मिलता है।
रमज़ान के दौरान स्वस्थ रहने का मूल मंत्र है संतुलन और संयम। ज्यादा तला-भुना भोजन, अत्यधिक मिठाई और कम पानी से बचते हुए यदि आप संतुलित आहार अपनाते हैं तो पूरा महीना ऊर्जा से भरपूर और तरोताज़ा महसूस कर सकते हैं। रमज़ान केवल आत्मिक शुद्धि का ही नहीं, बल्कि शारीरिक अनुशासन का भी अवसर है। सही खान-पान अपनाकर आप इस पवित्र महीने को सेहतमंद और सुकूनभरा बना सकते हैं।