ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
होली का त्योहार नजदीक आ रहा है और इस अवसर पर घर-घर में मिठाइयों की तैयारियाँ जोरों पर हैं। गुजिया, रसगुल्ले और लड्डू जैसी पारंपरिक मिठाइयाँ होली के उत्सव का अहम हिस्सा मानी जाती हैं। हालांकि, बाजार में मिलने वाली तैयार मिठाइयों में अक्सर मिलावटी मावा, आर्टिफिशियल कलर और अधिक मात्रा में रिफाइंड शुगर पाई जाती है, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। यही कारण है कि इस बार लोग घर पर ही मिठाइयां बनाने की ओर अधिक ध्यान दे रहे हैं, ताकि त्योहार सुरक्षित और स्वादिष्ट दोनों हो।
मिठाइयों में चीनी की मात्रा को नियंत्रित करना इस समय एक प्रमुख चिंता का विषय बन गया है। इसके लिए घर में मिठाई बनाने के दौरान चीनी की जगह गुड़, धागे वाली मिश्री या खजूर का पेस्ट इस्तेमाल किया जा सकता है। गुजिया की स्टफिंग में अगर चीनी के बजाय बारीक कटा हुआ गुड़ या किशमिश डाली जाए तो स्वाद में अलग तरह की मिठास और सोंधापन आता है। इसके अलावा प्राकृतिक स्वीटनर जैसे स्टीविया का उपयोग भी किया जा सकता है, जिससे डायबिटीज के मरीज बिना किसी चिंता के मिठाइयों का आनंद ले सकते हैं। इससे ना केवल स्वाद बढ़ता है, बल्कि सेहत पर भी नकारात्मक असर नहीं पड़ता।

त्योहारी सीजन में बाजार में मिलावटी और सिंथेटिक मावा भी आसानी से मिल जाता है। ऐसे में घर पर ही ताजा दूध से मावा तैयार करना बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। यदि समय की कमी हो, तो ताजा पनीर या कंडेंस्ड मिल्क का इस्तेमाल करके भी झटपट मिठाइयां बनाई जा सकती हैं। घर पर बने मावे में नमी और शुद्धता बनी रहती है, जिससे मिठाई का स्वाद और शेल्फ-लाइफ भी बेहतर रहता है। शुद्ध दूध से बनी मिठाइयां बाजार की मिलावटी मिठाइयों के मुकाबले अधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक होती हैं।
पारंपरिक मिठाइयां जैसे गुजिया और मालपुआ आम तौर पर मैदे से बनाई जाती हैं, जो पचने में भारी होती हैं और पेट से संबंधित समस्याएं भी पैदा कर सकती हैं। इस बार घर पर मिठाई बनाने वालों ने मैदे का प्रयोग पूरी तरह कम करने या 50-50 अनुपात में गेहूं के आटे, सूजी या रागी के आटे के साथ करने का विकल्प अपनाया है। आटे से बनी गुजिया न केवल फाइबर से भरपूर होती है, बल्कि लंबे समय तक ऊर्जा भी प्रदान करती है। इसके अलावा बेसन या मूंग दाल का हलवा भी एक पौष्टिक विकल्प के रूप में सामने आया है, जो स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का संतुलन बनाए रखता है।
होली की ज्यादातर मिठाइयां घी या तेल में डीप-फ्राई की जाती हैं, जिससे इनमें कैलोरी की मात्रा काफी बढ़ जाती है। इस बार लोग सेहत का ख्याल रखते हुए बेक्ड गुजिया या एयर-फ्रायर में तैयार मिठाइयों को तरजीह दे रहे हैं। ओवन या एयर-फ्रायर का उपयोग करके बिना तेल के कुरकुरी और स्वादिष्ट मिठाइयां बनाई जा सकती हैं। यदि तलना ही हो, तो शुद्ध देसी घी का सीमित उपयोग किया जा सकता है या राइस ब्रान ऑयल जैसे लो-कोलेस्ट्रॉल तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि एक ही तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल न किया जाए, क्योंकि इससे हानिकारक ट्रांस-फैट बनने का खतरा होता है।

मिठाइयों को रंगीन और आकर्षक बनाने के लिए अब सिंथेटिक फूड कलर का उपयोग कम किया जा रहा है। इसके स्थान पर केसर, हल्दी या चुकंदर के रस का इस्तेमाल कर मिठाईयों को प्राकृतिक और सुरक्षित रंग दिया जा रहा है। साथ ही काजू, बादाम, पिस्ता और अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स की मात्रा बढ़ाकर मिठाई के क्रंच और पौष्टिकता को भी बढ़ाया जा रहा है। इन ड्राई फ्रूट्स से शरीर को आवश्यक ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन्स भी मिलते हैं। मिठाइयों में इलायची और जायफल जैसी मसालों का इस्तेमाल स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ पाचन में मदद करता है, जिससे मिठाई खाने का अनुभव और भी बेहतर बन जाता है।
इस प्रकार इस बार होली के अवसर पर लोग स्वाद और सेहत दोनों का ध्यान रखते हुए मिठाइयों की तैयारी कर रहे हैं। घर पर बनी मिठाइयों में न केवल स्वाद और ताजगी बनी रहती है, बल्कि यह सेहत के लिए भी सुरक्षित रहती हैं। लोग नए विकल्प अपनाकर पारंपरिक मिठाइयों को और भी पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे यह त्योहार हर किसी के लिए आनंद और स्वास्थ्य का संतुलन लेकर आए।