Does drinking milk at night lead to better sleep? Find out the truth.
नई दिल्ली
भारतीय परिवारों में रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध पीने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। बचपन से ही घर के बड़े यह सलाह देते हैं कि सोने से पहले दूध पीने से अच्छी नींद आती है और शरीर को आराम मिलता है। लेकिन क्या यह केवल एक घरेलू मान्यता है या इसके पीछे वैज्ञानिक आधार भी मौजूद है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रात में सीमित मात्रा में दूध पीना कुछ लोगों के लिए लाभदायक हो सकता है, लेकिन इसे नींद का चमत्कारी उपाय मानना सही नहीं होगा।
दूध और नींद का क्या है संबंध
विशेषज्ञों के अनुसार, दूध में ट्रिप्टोफैन नामक एक आवश्यक अमीनो एसिड पाया जाता है। शरीर इसी ट्रिप्टोफैन की मदद से सेरोटोनिन और मेलाटोनिन जैसे हार्मोन बनाता है। सेरोटोनिन मूड को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है, जबकि मेलाटोनिन शरीर की जैविक घड़ी यानी स्लीप साइकिल को नियंत्रित करने वाला प्रमुख हार्मोन माना जाता है।
हालांकि दूध में मौजूद ट्रिप्टोफैन की मात्रा इतनी अधिक नहीं होती कि वह तुरंत नींद ले आए, लेकिन यह शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया को हल्का सहयोग जरूर दे सकता है। यही कारण है कि कई लोगों को रात में दूध पीने के बाद अधिक आराम महसूस होता है।
आदत भी निभाती है बड़ी भूमिका
डॉक्टरों का कहना है कि अच्छी नींद केवल भोजन या किसी एक पेय पर निर्भर नहीं करती। नियमित दिनचर्या भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यदि कोई व्यक्ति रोजाना एक ही समय पर गर्म दूध पीकर सोने जाता है तो धीरे-धीरे शरीर इसे सोने का संकेत मानने लगता है। इस नियमित आदत से दिमाग और शरीर दोनों आराम की स्थिति में आने लगते हैं।
यानी कई मामलों में दूध से अधिक उसका नियमित सेवन और सोने का तय समय बेहतर नींद में मदद करता है।
किसे रात में दूध पीने से बचना चाहिए
हालांकि रात में दूध पीना हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता। यदि किसी को लैक्टोज इनटॉलरेंस की समस्या है तो दूध पीने के बाद पेट फूलना, गैस, पेट दर्द या दस्त जैसी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में नींद बेहतर होने के बजाय और अधिक प्रभावित हो सकती है।
इसी तरह जिन लोगों को दूध से एलर्जी है, उन्हें रात ही नहीं बल्कि किसी भी समय दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना ऐसे लोगों को डेयरी उत्पादों से भी दूरी बनाए रखनी चाहिए।
एसिड रिफ्लक्स वाले लोग रखें सावधानी
यदि किसी व्यक्ति को एसिड रिफ्लक्स या बार-बार सीने में जलन की समस्या रहती है तो सोने से ठीक पहले अधिक मात्रा में दूध पीना परेशानी बढ़ा सकता है। लेटने के बाद पेट का दबाव बढ़ने से एसिड ऊपर आ सकता है, जिससे नींद में बाधा आती है।
ऐसे लोगों को अपने डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही रात में दूध पीना चाहिए।
दूध पीने का सही समय क्या है
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आप रात में दूध पीना चाहते हैं तो इसे सोने से 30 से 60 मिनट पहले पीना बेहतर माना जाता है। इससे शरीर को दूध पचाने का समय मिल जाता है और बार-बार उठकर शौचालय जाने की संभावना भी कम रहती है।
दूध हमेशा सीमित मात्रा में पीना चाहिए। एक छोटा या मध्यम गिलास पर्याप्त माना जाता है। बहुत अधिक मात्रा में दूध पीने से रात में बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है, जिससे नींद टूट सकती है।
मीठे और फ्लेवर्ड दूध से बचें
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रात में सादा और बिना चीनी वाला दूध पीना अधिक फायदेमंद होता है। चॉकलेट, फ्लेवर्ड या अधिक मीठा दूध अतिरिक्त कैलोरी और शुगर बढ़ा सकता है। लंबे समय तक इसका सेवन वजन बढ़ने और रक्त शर्करा पर भी असर डाल सकता है।
अच्छी नींद के लिए क्या करें
डॉक्टरों का कहना है कि केवल दूध पीने से अच्छी नींद की गारंटी नहीं मिलती। इसके लिए संतुलित जीवनशैली भी जरूरी है। सोने से पहले मोबाइल और लैपटॉप का कम इस्तेमाल करें, कैफीन वाले पेय पदार्थों से बचें, नियमित समय पर सोएं और रोजाना हल्का व्यायाम करें। यदि इन आदतों के साथ सीमित मात्रा में गर्म दूध लिया जाए तो यह बेहतर नींद में सहायक हो सकता है।
रात में गर्म दूध पीना कोई जादुई उपाय नहीं है, लेकिन यह स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा बन सकता है। दूध में मौजूद ट्रिप्टोफैन और नियमित सोने की आदत मिलकर कुछ लोगों की नींद की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकते हैं। हालांकि लैक्टोज इनटॉलरेंस, दूध से एलर्जी या एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। यदि लगातार नींद की समस्या बनी रहती है तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प है।