घंटों रील देखने की आदत से बढ़ सकता है स्वास्थ्य जोखिम

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 13-07-2026
The habit of watching reels for hours can increase health risks.
The habit of watching reels for hours can increase health risks.

 

नई दिल्ली

स्मार्टफोन आज लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। खाली समय मिलते ही अधिकांश लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रील और वीडियो देखने लगते हैं। यह आदत केवल युवाओं तक सीमित नहीं रही। बड़ी संख्या में बुजुर्ग भी घंटों मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित उपयोग फायदेमंद हो सकता है, लेकिन लगातार कई घंटे वीडियो देखना शरीर और दिमाग दोनों पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, स्मार्टफोन का संतुलित उपयोग बुजुर्गों के लिए उपयोगी भी साबित हो सकता है। वीडियो कॉल के जरिए परिवार और दोस्तों से जुड़े रहना या ऑनलाइन गेम खेलकर सामाजिक संपर्क बनाए रखना मानसिक सक्रियता को बढ़ाता है। इससे अकेलेपन की भावना कम होती है और मस्तिष्क को सक्रिय रखने में मदद मिलती है।

हालांकि समस्या तब शुरू होती है जब मोबाइल ही दिनचर्या का सबसे बड़ा हिस्सा बन जाए। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार रील और शॉर्ट वीडियो देखने की आदत लोगों को वास्तविक जीवन से दूर कर सकती है। इससे परिवार के साथ समय बिताने की आदत कम होती है। कई लोग नियमित सैर, व्यायाम और सामाजिक गतिविधियों से भी दूरी बनाने लगते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर मोबाइल देखने से शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है। इसका असर वजन बढ़ने, मांसपेशियों की कमजोरी, कमर दर्द और घुटनों की समस्या के रूप में सामने आ सकता है। लगातार बैठे रहने से हृदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी भी चिंता का विषय है। डॉक्टरों के अनुसार, यह शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के निर्माण को प्रभावित करती है। यही हार्मोन अच्छी नींद के लिए जिम्मेदार होता है। देर रात तक रील देखने की आदत अनिद्रा, अधूरी नींद और थकान जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है।

लगातार छोटे वीडियो देखने का असर दिमाग पर भी पड़ता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि 15 से 30 सेकंड के वीडियो देखने की आदत धीरे धीरे लंबे समय तक किसी विषय पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को कमजोर कर सकती है। इससे पढ़ाई, काम और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर देखा जा रहा है। लगातार मनोरंजक वीडियो देखने से कुछ समय के लिए खुशी महसूस हो सकती है, लेकिन लंबे समय में अकेलापन, खालीपन, चिड़चिड़ापन और तनाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। कई लोगों में सोशल मीडिया की लत चिंता और अवसाद का कारण भी बन रही है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि तकनीक का इस्तेमाल पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है, बल्कि उसका संतुलित उपयोग करना अधिक महत्वपूर्ण है। दिन का एक निश्चित समय मोबाइल और सोशल मीडिया के लिए तय करें। बाकी समय किताब पढ़ने, टहलने, व्यायाम करने, बागवानी करने या परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने की आदत विकसित करें। यही संतुलन शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को बेहतर बनाए रखने में सबसे अधिक मददगार साबित हो सकता है।