मुहर्रम की तैयारियों के बीच कश्मीर की नजर ईरान पर

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 16-06-2026
Muharram preparations intensify in Srinagar; Kashmir also keeps a close watch on the US-Iran peace deal.
Muharram preparations intensify in Srinagar; Kashmir also keeps a close watch on the US-Iran peace deal.

 

बासित जरगर/श्रीनगर
 
 कश्मीर घाटी में इस्लामी नए साल की आमद के साथ ही मुहर्रम को लेकर सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं। श्रीनगर के अलग-अलग इलाकों में मजलिसों और मातमी जुलूसों को लेकर तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। इस बार मुहर्रम की इन तैयारियों के बीच एक बड़ी वैश्विक हलचल ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में खबरें हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए एक शुरुआती समझौता हो गया है। इस कूटनीतिक बदलाव को लेकर कश्मीर के लोगों में भी काफी दिलचस्पी देखी जा रही है।
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इमामबाड़ों और मोहल्लों में दिखने लगी मुहर्रम की झलक

श्रीनगर के शिया बहुल इलाकों में मुहर्रम को लेकर इस वक्त गहरा धार्मिक और भावनात्मक माहौल है। जादीबल, हसनआबाद, बेमिना, आलमगरी बाजार और रैनावारी जैसे इलाकों में तैयारियां साफ देखी जा सकती हैं। ये वो इलाके हैं जो हर साल मुहर्रम के बड़े मातमी जुलूसों और मजलिसों के गवाह बनते हैं। स्थानीय धार्मिक संगठनों ने मजलिसों के लिए बकायदा तैयारियां शुरू कर दी हैं। इमामबाड़ों को काले कपड़ों और मजहबी परचमों से सजाया जा रहा है। इसके साथ ही लाउडस्पीकर और साउंड सिस्टम दुरुस्त किए जा रहे हैं ताकि दूर-दूर तक लोग मजलिसों को सुन सकें।
 
स्वयंसेवक भी इस काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। जुलूस के रास्तों पर अकीदतमंदों और मातम करने वालों के लिए सबीलें लगाने की तैयारी हो रही है। इन सबीलों के जरिए मुहर्रम के दिनों में लोगों को पीने का साफ पानी, शरबत और चाय-नाश्ता बांटा जाता है। स्थानीय कमेटियां इस बात का खास ख्याल रख रही हैं कि इस बार गर्मी के मौसम को देखते हुए पानी के पुख्ता इंतजाम हों।
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प्रशासन और धार्मिक संगठनों के बीच बैठकों का दौर

मुहर्रम के शांतिपूर्ण और सुचारू संचालन के लिए श्रीनगर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिख रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों और शिया संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं। इन बैठकों का मुख्य मकसद यह है कि जुलूसों के दौरान आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। प्रशासन ने बिजली की निर्बाध आपूर्ति, साफ-सफाई, सड़कों की मरम्मत और स्ट्रीट लाइट्स को ठीक करने का काम शुरू कर दिया है।
 
इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है। मुख्य जुलूसों के रास्तों पर एंबुलेंस और मेडिकल कैंप लगाने की योजना बनाई गई है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। यातायात पुलिस भी रूट डायवर्जन और ट्रैफिक मैनेजमेंट को लेकर नया प्लान तैयार कर रही है ताकि शहर में जाम की स्थिति पैदा न हो।
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कर्बला का संदेश और कश्मीर का नजरिया

स्थानीय समुदाय के नेताओं का कहना है कि कश्मीर में मुहर्रम सिर्फ एक मजहबी रस्म नहीं है। यह न्याय, हक और जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने का एक बड़ा प्रतीक है। कर्बला का वाकया इंसानियत को यह सिखाता है कि चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, हक का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। लोगों को उम्मीद है कि इस साल भी मुहर्रम के सभी कार्यक्रम बेहद शांतिपूर्ण तरीके से और कर्बला के शहीदों के सम्मान को ध्यान में रखकर पूरे किए जाएंगे।
 
आयोजकों का कहना है कि मुहर्रम के पहले दस दिनों में भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। विशेष रूप से 8वें और 10वें मुहर्रम (आशूरा) के दिन श्रीनगर में बहुत बड़े जुलूस निकलते हैं। इन दिनों में घाटी के कोने-कोने से लोग मातम और अजादारी के लिए श्रीनगर पहुंचते हैं। इसी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह सतर्क हैं और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात करने की तैयारी है।
अमेरिका-ईरान समझौते पर कश्मीरियों की दिलचस्पी

इस घरेलू तैयारियों के बीच मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) से आ रही खबरों ने कश्मीर के शिया समुदाय को काफी प्रभावित किया है। राजनयिक हलकों से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका और ईरान एक ऐसे फ्रेमवर्क पर राजी हो गए हैं जिससे क्षेत्र में शांति बहाली का रास्ता साफ हो सकता है। इस संभावित समझौते में युद्धविराम और आर्थिक मुद्दों पर बातचीत शामिल है।
 
श्रीनगर के धार्मिक विद्वानों और आम लोगों ने इस खबर का स्वागत किया है। उनका मानना है कि पश्चिम एशिया में शांति रहने से पूरी दुनिया के मुसलमानों को राहत मिलती है। ईरान के हालात पर कश्मीर के लोग हमेशा गहरी नजर रखते हैं। लोगों का कहना है कि अगर यह समझौता कामयाब रहता है तो मासूम लोगों की जान बचेगी और मध्य पूर्व में स्थिरता आएगी।
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प्रशासन की अपील: नियमों और रूट का पालन करें

श्रीनगर प्रशासन ने सभी धार्मिक कमेटियों और आम जनता से अपील की है कि वे सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने में सरकारी एजेंसियों का सहयोग करें। जुलूसों के लिए जो रूट और समय तय किए गए हैं, उनका पूरी तरह पालन किया जाए। किसी भी तरह की अफवाहों से बचने और आपसी भाईचारा बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
 
जैसे-जैसे मुहर्रम के दिन नजदीक आ रहे हैं, श्रीनगर की आबोहवा में एक संजीदगी और शोक की लहर साफ महसूस की जा सकती है। लोग खुद को इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को याद करने के लिए तैयार कर रहे हैं। इस बार की खासियत यह है कि जहां एक तरफ दुनिया में शांति की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी तरफ कश्मीर के लोग अपने पारंपरिक और आध्यात्मिक मूल्यों को सहेजने में जुटे हैं।