श्रीनगर के पोलो ग्राउंड पार्क में कबाड़ से बना अनोखा वंडर गार्डन

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 23-08-2026
A unique 'Wonder Garden' made from scrap at Srinagar's Polo Ground Park.
A unique 'Wonder Garden' made from scrap at Srinagar's Polo Ground Park.

 

श्रीनगर से रिपोर्ट और तस्वीरें बासित जरगर

श्रीनगर की वादियों में इन दिनों एक बेहद अनोखी और प्रेरणादायक पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। शहर के मशहूर पोलो ग्राउंड पार्क को एक नए रूप में ढाला गया है। यहाँ कबाड़ और बेकार पड़ी चीजों से एक शानदार 'वेस्ट वंडर गार्डन' तैयार किया गया है। इस अनोखे बगीचे को देखने के बाद लोग यही कह रहे हैं कि अगर सोच सकारात्मक हो, तो कचरे को भी खूबसूरती में बदला जा सकता है।

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इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि इसे तैयार करने में बाजार से एक भी नई चीज नहीं खरीदी गई है। बागवानी विभाग और स्थानीय दफ्तरों में बेकार पड़े सामान को ही इस खूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है कि देखने वाले हैरान रह जाते हैं। आइए जानते हैं कि कैसे श्रीनगर के इस पार्क ने कचरे को कला में बदल दिया है।

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कबाड़ से सजा पोलो ग्राउंड पार्क

श्रीनगर के दिल में स्थित पोलो ग्राउंड पार्क में अब पारंपरिक फूलों के साथ-साथ रीसाइकिल की गई चीजों के कमाल के नमूने भी देखने को मिलते हैं।यहाँ लगभग 35 से ज्यादा सजावटी और आकर्षक इंस्टॉलेशन बनाए गए हैं।

यहाँ आने वाले पर्यटकों और बच्चों के लिए ये कलाकृतियां मुख्य आकर्षण का केंद्र बन चुकी हैं।गिरे हुए पेड़ों की सूखी लकड़ियों से एक छोटी टॉय ट्रेन बनाई गई है।पुराने और बेकार हो चुके टायरों को काटकर खूबसूरत प्लांटर्स का रूप दिया गया है।

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चाय बनाने वाली पुरानी और खराब इलेक्ट्रिक केतलों को फूलों के गुलदस्ते यानी वास (Vase) की तरह इस्तेमाल किया गया है।बच्चों को लुभाने के लिए मकड़ी और कैटरपिलर जैसे कीड़ों की कलाकृतियां भी तैयार की गई हैं।

इसके अलावा पुराने पहिए, लकड़ी के लट्ठे, बेकार पड़े खंभे और यहाँ तक कि कबाड़ बन चुके वाहनों को भी इस गार्डन की सजावट में शामिल किया गया है।यह सब देखकर साफ पता चलता है कि थोड़ी सी कल्पना शक्ति से किसी भी बेकार वस्तु को उपयोगी बनाया जा सकता है।

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बिना एक भी पैसा खर्च किए तैयार हुआ प्रोजेक्ट

इस पूरे प्रोजेक्ट के पीछे कश्मीर की फ्लोरीकल्चर डायरेक्टर मातूरा मासूम और उनकी टीम की मेहनत साफ झलकती है। उनका कहना है कि इस गार्डन को बनाने का मकसद लोगों को यह सिखाना है कि कचरे को फेंकने के बजाय उसका दोबारा इस्तेमाल कैसे किया जाए।

मातूरा मासूम बताती हैं कि जब उन्होंने देखा कि हर दिन बागवानी और दफ्तरों के रखरखाव में कितनी सारी चीजें बेकार समझकर फेंक दी जाती हैं, तब उनके मन में यह विचार आया।उन्होंने निर्देश दिए कि पुराने टायरों, पेड़ों की गिरी हुई शाखाओं और लोहे के कबाड़ को फेंका न जाए।इन सभी चीजों को निशात, शालीमार, पहलगाम और बारामूला जैसे अलग-अलग बगीचों से इकट्ठा किया गया।

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इस पहल का उद्देश्य शहर को साफ-सुथरा रखना और आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है।खासकर बच्चों के लिए यह जगह शिक्षा और मनोरंजन दोनों का एक बेहतरीन साधन बन रही है।यहाँ आकर बच्चे यह सीख सकते हैं कि घर की पुरानी और बेकार चीजों से कैसेखूबसूरत सजावटी सामान बनाया जा सकता है।

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डल झील के खरपतवार से बन रहा है नया हैंडीक्राफ्ट

श्रीनगर में कचरे से सिर्फ पार्क ही नहीं सज रहे हैं, बल्कि पारंपरिक कला को भी एक नई दिशा मिल रही है।शहर की एक पारंपरिक पेपर-मैशे (साख्तसाजी) कलाकार सिमरन डल झील की सफाई के दौरान निकलने वाले खरपतवार और जलीय घासों से अद्भुत कलाकृतियां बना रही हैं।

अक्सर डल झील से निकाली जाने वाली घास और जलीय पौधे झील के लिए एक बड़ी समस्या बन जाते हैं। लेकिन सिमरन ने इसी कचरे को अपनी कला का मुख्य हिस्सा बना लिया है। वह इन पौधों को इकट्ठा करके सुखाती हैं और फिर एक खास प्रक्रिया के जरिए इन्हें पल्प या गूदे में बदल देती हैं।इस प्रक्रिया में रीसाइकिल किए गए कागज को भी मिलाया जाता है।

इस अनोखे मिश्रण से जो सामग्री तैयार होती है, उसकी बनावट काफी मजबूत और पत्थर जैसी होती है। पारंपरिक पेपर-मैशे से यह काफी अलग और टिकाऊ होती है। सिमरन इस मटेरियल से घर की सजावट का सामान और सुंदर हस्तशिल्प वस्तुएं तैयार कर रही हैं।

उनकी यह पहल न केवल झील की सफाई में मदद कर रही है, बल्कि पारंपरिक कश्मीरी कला को पर्यावरण के अनुकूल भी बना रही है। अगर इस तकनीक को और बड़े पैमाने पर अपनाया जाए, तो यह कश्मीर के दूसरे कारीगरों के लिए भी रोजगार के नए रास्ते खोल सकती है।

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पर्यावरण संरक्षण की ओर एक बेहतरीन कदम

श्रीनगर का यह वंडर गार्डन और डल झील के कचरे से बन रहा हस्तशिल्प इस बात की मिसाल है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। आज के समय में जब दुनिया भर के शहर कचरा प्रबंधन की समस्या से जूझ रहे हैं, तब श्रीनगर का यह मॉडल एक नई राह दिखाता है।

प्रशासन को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह वंडर गार्डन पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण बनेगा। यहाँ के रंग-बिरंगे फूल और कबाड़ से बनी कलाकृतियों का मेल पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रहा है। यह पहल न केवल शहर की खूबसूरती बढ़ा रही है, बल्कि लोगों को यह संदेश भी दे रही है कि प्रकृति और पर्यावरण को बचाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।