आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
अगर आपको रात के खाने में कुछ खास खाने की इच्छा हो रही है तो संभव है कि आपका दिमाग उसे खाने से पहले ही उसके स्वाद को महसूस करने लगे। एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है कि भूख की स्थिति में मस्तिष्क भोजन के स्वाद, गंध और उसे खाने के अनुभव की मानसिक कल्पना को अधिक सजीव रूप से महसूस करने लगता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, अधिकतर लोग यह अनुभव कर चुके हैं कि खाली पेट बाजार जाने पर वे जरूरत से ज्यादा मीठे, तैलीय या पसंदीदा खाद्य पदार्थ खरीद लेते हैं। आमतौर पर इसे भूख का असर माना जाता है, लेकिन नया अध्ययन बताता है कि भूख केवल खाने की इच्छा नहीं बढ़ाती, बल्कि भोजन से जुड़ी मानसिक छवियों और संवेदनाओं को भी अधिक प्रभावशाली बना देती है।
अध्ययन में कहा गया कि मानव मस्तिष्क के लिए भोजन हमेशा से एक बहु-संवेदी अनुभव रहा है। यह अनुभव किसी पेस्ट्री को देखने, भोजन की सुगंध महसूस करने या उसके स्वाद और बनावट को याद करने से शुरू हो सकता है। भोजन से जुड़े अनुभव मस्तिष्क में स्मृतियों के रूप में दर्ज हो जाते हैं और बाद में मानसिक कल्पना के माध्यम से दोबारा महसूस किए जा सकते हैं।
शोधकर्ताओं की मानें तो लोग अपने मन में नींबू के खट्टे स्वाद, ताजा बनी कॉफी की सुगंध या किसी पसंदीदा व्यंजन की बनावट तक की कल्पना कर सकते हैं। वैसे, यह क्षमता सभी लोगों में समान नहीं होती। कुछ लोग स्वाद और गंध से जुड़ी अनुभूतियों को अत्यंत स्पष्ट रूप से याद कर सकते हैं, जबकि कुछ लोगों को केवल धुंधली अनुभूति होती है।
अध्ययन के तहत डुनेडिन स्थित ओटागो विश्वविद्यालय में 60 प्रतिभागियों पर प्रयोग किया गया। सभी प्रतिभागियों ने पिछली रात उपवास रखा था। उन्हें दो अलग-अलग सत्रों में शामिल किया गया। एक सत्र में उन्हें भूखा रखा गया, जबकि दूसरे सत्र में उन्हें भरपेट नाश्ता कराया गया।
प्रतिभागियों को विभिन्न खाद्य पदार्थों की तस्वीरें दिखाई गईं और उनसे उन खाद्य पदार्थों के स्वाद या बनावट की कल्पना करने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्होंने बताया कि ऐसी कल्पना करना कितना आसान था, वह कितनी जल्दी मन में आई और वह कितनी स्पष्ट महसूस हुई।
अध्ययन में पाया गया कि भूखे प्रतिभागियों के लिए भोजन के स्वाद की कल्पना करना अपेक्षाकृत आसान था। वे स्वयं को वह भोजन खाते हुए अधिक स्पष्ट रूप से देख पा रहे थे और उस अनुभव को अधिक आनंददायक भी बता रहे थे। शोधकर्ताओं के अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि भूख दिमाग में भोजन से जुड़े पूरे अनुभव के अनुकरण को अधिक तीव्र बना देती है।